अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

सेहत की बात…..बजाइना (योनि) की बीमारियां और बचाव !

Share

 [परामर्स से लेकर ट्रीटमेंट तक में शुल्क नहीं लेने वाली, दिल्ली- मेरठ- देहरादून में सक्रिय, चेतना मिशन की चिकित्सिका डॉ. गीता शुक्ला की सेवा लेने के लिए व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है. यह लेख उन्ही से हुए संवाद पर आधारित है.]   

*~ आरती शर्मा (बोधगया)*
     _राधा की योनि से लगातार 6 महीनों से स्राव होने के साथसाथ उस में खुजली होती रही. पति के साथ संबंध बनाते वक्त उसे दर्द होता. पेशाब करने के वक्त उसे परेशानी होती. उस ने डाक्टर से संपर्क किया. जांच के बाद डाक्टर ने बताया कि उसे *ट्राइकोमोनियासिस* बीमारी हो गई है._
पढ़ेलिखे होने के बावजूद अधिकांश महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट्स की देखभाल के प्रति गंभीर नहीं होतीं. 

     _महिला-पुरुषों में स्पष्ट शारीरिक भिन्नता होती है. स्त्रियों में प्राइवेट पार्ट्स का योनि, गर्भाशय व गर्भनली के माध्यम से सीधा संबंध होता है. पतिपत्नी के बीच शारीरिक संबंध दोनों के जीवन का सुखकारी समय होता है. किंतु कई बार महिलाओं में प्रसव, मासिक धर्म व गर्भपात के समय भी संक्रमण होने का डर होता है._   

    ट्राइकोमोनियासिस का इलाज मैट्रोनीडाजोल नामक दवा से होता है जो खाई जाती है और जैल के रूप में लगाई भी जाती है।
अशिक्षा, गरीबी, शर्म के कारणों से अकसर महिलाएं प्राइवेट पार्ट्स के रोगों का उपचार कराने में आनाकानी करती हैं.  

 *प्राइवेट पार्ट्स के संक्रमण से एड्स जैसा खतरनाक रोग भी हो सकता है.*कौपर टी लगवाने से भी प्राइवेट पार्ट्स में रोग के पनपने की आशंका रहती है. 
 *‘क्लामाइडिया’ रोग ट्राइकोमेटिस नामक जीवाणु से हो जाता है. यह रोग ‘मुख मैथुन’ और ‘गुदामैथुन’ से जल्दी फैलता है.* कई बार इस बीमारी से संक्रमण गर्भाशय से होते हुए फेलोपियन ट्यूब तक फैल जाता है. इस में जलन होती है. महिलाओं में *बवासीर, भगन्दर जैसे गुदा रोगों के लिए भी अप्राकृतिक सेक्स जिम्मेदार* बनता है। 

  समय पर उपचार नहीं होने पर *एचआईवी होने का खतरा कई गुना अधिक* बढ़ जाता है.
*गोनोरिया :* यह रोग महिलाओं में सूजाक, नीसेरिया नामक जीवाणु से होता है. यह महिला के प्रजनन मार्ग के गीले क्षेत्र में आसानी से बढ़ी तेजी से बढ़ता है.  

 _इस के जीवाणु मुंह, गले, आंख में भी फैल जाते हैं. इस बीमारी में यौनस्राव में बदलाव होता है. पीले रंग का बदबूदार स्राव निकलता है. कई बार योनि से खून भी निकलता है._
गर्भवती महिला के लिए यह बहुत घातक रोग होता है. प्रसव के दौरान बच्चा जन्मनली से गुजरता है, ऐसे में मां के इस बीमारी से ग्रस्त होने पर बच्चा अंधा भी हो सकता है.
*हर्पीज :*   यह रोग ‘हर्पीज सिंपलैक्स’ से ग्रसित व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से होता है. इस में 2 प्रकार के वायरस होते हैं. 

   कई बार इस रोग से ग्रसित महिलापुरुष को मालूम ही नहीं पड़ता  कि उन्हें यह रोग है भी. यौन अंगों व गुदाक्षेत्र में खुजली, पानी भरे छोटेछोटे दाने, सिरदर्द, पीठदर्द, बारबार फ्लू होना आदि इस के लक्षण होते हैं.
*सैप्सिस :*    यह रोग ‘टे्रपोनेमा पल्लिडम’ नामक जीवाणु से पैदा होता है. योनिमुख, योनि, गुदाद्वार में बिना खुजली के खरोंचें हो जाती हैं. महिलाओं को तो पता ही नहीं चलता है.    _पुरुषों में भी पेशाब करते वक्त जलन, खुजली, लिंग पर घाव, आदि समस्याएं हो जाती हैं._
*हनीमून सिस्टाइटिस :*नवविवाहिताओं में यूटीआई अति सामान्य है, इस को हनीमून सिस्टाइटिस भी कहते हैं.   महिलाओं में मूत्र छिद्र योनिद्वार और मलद्वार के पास स्थित होता है. यहां से जीवाणु आसानी से मूत्र मार्ग में पहुंच कर संक्रमण कर सकते हैं.  

  _करीब 75 प्रतिशत महिलाओं में यूटीआई आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है. इस के अतिरिक्त अनेक अन्य प्रजाति के जीवाणु भी यूटीआई उत्पन्न कर सकते हैं._    *सबसे खतरनाक है UTI :*     मूत्रमार्ग का संक्रमण जिस को यूरीनरी ट्रैक्क इन्फैक्शन या यूटीआई कहते हैं, महिलाओं में मूत्र मार्ग की विशिष्ट संरचना के कारण अति सामान्य समस्या है. करीब 40 प्रतिशत महिलाएं इस से जीवन में कभी न कभी ग्रसित हो जाती हैं.   

  मूत्रद्वार में होने वाली जलन, खुजली अनेक कारणों से हो सकती है लेकिन *लगभग 80 स्त्रियों प्रतिशत में यह विकृत वीर्य वाले पुरुष से यौन संसर्ग के कारण* होती है.    अकसर संक्रमण होने पर यौन संबंध बनाने के करीब 24 घंटे बाद लक्षण शुरू हो जाते हैं. विवाह के तुरंत बाद अज्ञानता, हड़बड़ी इत्यादि कारणों से यूटीआई होने की संभावना ज्यादा रहती है.
अगर बात लक्षणों की करें तो यूटीआई होने पर बारबार पेशाब आता है, पर पेशाब कुछ बूंद ही होता है. मूत्र त्याग के समय जलन और कभीकभी दर्द होता है, मूत्र से दुर्गंध आती है, मूत्र का रंग धुंधला हो सकता है.  

 _कभीकभी खून मिलने के कारण पेशाब का रंग गुलाबी, लाल, भूरा हो सकता है._
यदि संक्रमण होने पर यौन संबंध बनाए जाते हैं तो जलन बढ़ सकती है. यदि उपचार नहीं किया जाता तो पीठ के निचले हिस्से में पीठदर्द हो सकता है, ज्वर हो सकता है.     कुछ स्थितियों में संक्रमण मूत्राशय से ऊपर गुर्दों में पहुंच कर इन में संक्रमण कर सकता है.बहरहाल, आप पूरी तरह से स्वस्थ तभी रह सकती हैं जब आप केवल *स्वस्थ पार्टनर के संग सेक्स करें या उसे कंडोम पहनाकर सैक्स* करें। आप अपने प्राइवेट पार्ट्स साफ व सुरक्षित रखें.    

    _इस के लिए जरूरी है कि आप अपने प्राइवेट पार्ट्स के बारे में जागरूक हों. उन में कोई भी तकलीफ हो तो तुरंत डाक्टर से सलाह लें._

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें