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वीरभद्रन रामनाथन…. फ्रिज की फैक्ट्री से ज्योलॉजी के नोबेल तक का सफर

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भारत मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन ज्योलॉजी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. भारत की मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े रामनाथन को वैज्ञानिक ने वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन किया है. उनको वर्ष 2026 के क्रैफोर्ड पुरस्कार (Crafoord Prize in Geosciences) के लिए चुना गया है. ये पुरस्कार ‘रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज’ द्वारा दिया जाता है. इस सम्मान को ‘भू-विज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है. यह पुरस्कार रामनाथन के उन दशकों के शोध को मान्यता देता है. ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रति हमारी समझ को पूरी तरह बदल दिया.भारतीय मूल के वीरभद्रन रामनाथन को भूविज्ञान में क्राफ़ोर्ड पुरस्कार मिला है. उनके ग्लोबल वार्मिंग पर रिसर्च, भारतीय मानसून और हिमालय के ग्लेशियरों पर अहम खोज के लिए उनको यह पुरस्कार दिया गया है. ये पुरस्कार उनको मई 2026 में दिया जाएगा.

82 वर्षीय रामनाथन की सबसे ऐतिहासिक खोज वर्ष 1975 में हुई थी, जब वे अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA में काम कर रहे थे. उन्होंने दुनिया को बताया कि केवल कार्बन डाइऑक्साइड ही धरती को गर्म नहीं कर रही है, बल्कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जो उस समय एरोसोल और फ्रिज में धड़ल्ले से इस्तेमाल होते थे. CO2 की तुलना में वातावरण में गर्मी रोकने में 10,000 गुना अधिक प्रभावी हैं.

बदलते पर्यावरण ने चौंका दिया था

रॉयल स्वीडिश एकेडमी से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘1975 तक हमें लगता था कि ग्लोबल वार्मिंग मुख्य रूप से CO2 के कारण है. मैं पर्यावरण को बदलने की तकनीक और इंसानों की क्षमता को देखकर स्तब्ध रह गया था.’

मदुरै में जन्मे और चेन्नई में पले-बढ़े रामनाथन का शुरुआती सफर काफी फिल्मी है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद की एक फ्रिज फैक्ट्री में इंजीनियर के तौर पर की थी. यहां उन्होंने पहली बार क्लोरो-फ्लोरो कार्बन(सीएफसी) गैसों को हैंडल किया था. बाद में उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से डिग्री हासिल की.

भारतीय मानसून और हिमालय के ग्लेशियरों पर शोध

उनकी भारतीय जड़ों ने उनके काम को इंडियन ओशन एक्सपेरिमेंट (INDOEX) की ओर प्रेरित किया. इस अध्ययन के जरिए उन्होंने दक्षिण एशिया के ऊपर ‘वायुमंडलीय ब्राउन क्लाउड्स’ (Atmospheric Brown Clouds) की पहचान की. रामनाथन ने साबित किया कि वायु प्रदूषण के कारण ही भारतीय मानसून कमजोर हो रहा है और हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं.

7.5 करोड़ रुपये का पुरस्कार

क्रैफोर्ड पुरस्कार के तहत उन्हें 8 मिलियन स्वीडिश क्रोनोर (लगभग 9 लाख डॉलर या 7.5 करोड़ रुपये) की नकद राशि और एक स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा. यह पुरस्कार मई 2026 में स्टॉकहोम और लुंड में आयोजित ‘क्रैफोर्ड डेज़’ के दौरान दिया जाएगा. वर्तमान में वे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो में प्रतिष्ठित प्रोफेसर एमेरिटस हैं और उन्होंने जलवायु नैतिकता पर वेटिकन और दुनिया के कई बड़े नेताओं को सलाह दी है.

Ramswaroop Mantri

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