इंदौर
आरटीओ को एजेंटों के चंगुल से बचाने के लिए बनाया गया वाहन पोर्टल भी अब उन्हीं के इशारों पर काम कर रहा है। जिन ऑपरेटरों के पास दो से ज्यादा गाड़ियां हैं, वे पोर्टल पर बल्क में सभी गाड़ियों का टैक्स एकसाथ भर देते थे, लेकिन अब बल्क का ऑप्शन ही नहीं खुलता। इसके कारण एक-एक गाड़ी का टैक्स अलग से भरना पड़ता है, जिसके लिए एजेंट को 135 से 150 रुपए की फीस चुकाना होती है। प्रदेश में 52 हजार 900 बसें दर्ज हैं। बल्क ऑप्शन बंद होने से हर महीने बस ऑपरेटर्स एजेंटों को 70 से 80 लाख रुपए फीस चुकाने को विवश हैं।
इससे विभाग को भी हर बार 31 रुपए का ट्रांजेक्शन शुल्क मिल रहा है। यदि 10 गाड़ियों का एक साथ टैक्स भरें तब भी सिर्फ 31 रुपए ही मिलेंगे। भास्कर ने स्टिंग ऑपरेशन में ऑपरेटर बनकर बस का टैक्स भरा तो एजेंट ने साफ कहा कि बल्क टैक्स जमा करने का विकल्प सिर्फ हमारे लिए खुला है। दरअसल, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने मार्च 2023 से सेंट्रलाइज पोर्टल ‘वाहन’ लाॅन्च किया था। शुरुआत में तो ऑनलाइन बल्क टैक्स का विकल्प खुला रखा गया, लेकिन कुछ दिन बाद इसे बंद कर दिया गया। टैक्स भरने के दौरान बार-बार सर्वर डाउन होने से ऑपरेटरों की परेशानी और बढ़ने लगी।
इंदौर में 6387 बसें, एजेंटी 9.5 लाख
परिवहन विभाग की जानकारी के मुताबिक इंदौर में 6387 बसें रजिस्टर्ड हैं। इन बस ऑपरेटरों को एजेंटों को इन बसों के टैक्स के अलावा 9.5 लाख रु. फीस देना पड़ रही है। बल्क टैक्स भरने का विकल्प मिले तो पूरे प्रदेश की बसों के ऑपरेटर्स को फायदा मिलेगा।
एजेंट ने कबूला, आप टैक्स भरोगे तो पैसा फंस जाएगा
बस ऑपरेटर्स की समस्या की पड़ताल के लिए भास्कर प्रतिनिधि बस ऑपरेटर बनकर आरटीओ ऑफिस पहुंचे। यहां बाहर ही एजेंट मिल गए। जब उनसे पूछा कि बस का टैक्स भरना है तो वे दूसरे एजेंट के पास ले गए। एजेंट ने 50 सीटर बस के टैक्स की रकम 10350 रुपए वसूली। रसीद 10200 रुपए की ही दी। बाकी के 150 रुपए एजेंट फीस थी, जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई।
- रिपोर्टर : यह टैक्स हम ऑनलाइन भी तो भर सकते हैं?
- एजेंट : नहीं, भर सकते, सर्वर ही नहीं चलेगा।
- रिपोर्टर : तो आप कैसे भर लेते हैं?
- एजेंट : हमारा तो काम ही है।
- रिपोर्टर : आप लोगों को अलग सर्वर दिया है क्या आरटीओ वालों ने?
- एजेंट : (कोई जवाब नहीं दिया)
- रिपोर्टर : वाहन पोर्टल से भी तो टैक्स भर सकते हैं?
- एजेंट : आप ट्राय कर लेना, सारे पैसे पानी में चले जाएंगे। न टैक्स भराएगा और न रिफंड होगा।
बस ऑपरेटर्स बोले : हर महीने 9 और 10 तरीख को सर्वर धोखा दे जाता है, इस कारण 5 से 7% पेनल्टी लगती है
एसके ट्रेवल्स के साजिद खान ने बताया, हर महीने 10 तारीख से पहले टैक्स भरना जरूरी है। 9 और 10 तारीख को पोर्टल पर लोड बढ़ जाता है और सर्वर बैठ जाता है। इसके बाद 5-7 प्रतिशत की पेनल्टी लगती है। शुरुआती दिनों में भी कई बार साइट डाउन रहती है।
अजंता ट्रैवल्स के विनोद चौहान ने बताया, पहले एक-एक गाड़ी का अलग से टैक्स भरना पड़ता था। पोर्टल आने के बाद हमें लगा था समस्या का समाधान हो जाएगा लेकिन निराशा हुई। सर्वर की सबसे ज्यादा समस्या आती है, जिससे सभी बस ऑपरेटर्स परेशान हैं।
इंदू ट्रेवल्स के सुनील दुबे ने बताया, बल्क में टैक्स भरने का विकल्प बंद होने से हर बार ओटीपी लेकर एक-एक गाड़ी का टैक्स भरना पड़ता है। इससे विभाग को हर ट्रांजेक्शन में 31 रुपए मिलते हैं। पहले एकसाथ दस बसों का टैक्स भरने पर भी 31 रुपए ही मिलते थे।
इस व्यवस्था को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा
मेरी जानकारी में यह बात नहीं आई थी। इसे हम तुरंत ही दिखवाते हैं और व्यवस्था को फिर से शुरू करवाते हैं ताकि बस ऑपरेटर्स को परेशानी नहीं आए।
-संजीव कुमार झा, ट्रांसपोर्ट कमिश्नर





