
निर्मल कुमार शर्मा ‘
इस धरती पर केवल अमेरिकी और अफ्रीकी महाद्वीप पर पाया जाने वाला बंदरों से मिलता-जुलता एक जीव लीमर भी अपने अस्तित्व के लिए अंतिम संघर्ष कर रहा है । लीमर शब्द लैटिन शब्द लेमर्स से आया है इसका मतलब ‘रात का भूत ‘ होता है ! कितने दु:ख की बात है कि लीमर की 111प्रजातियों में से 95 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं ! इन लीमरों में भी सबसे अधिक संकटग्रस्त ग्रेटर बैंबू लीमर प्रजाति है। समाचार पत्रों के अनुसार पूरी दुनिया में अब केवल 500 ग्रेटर बैंबू लीमर बचे हुए हैं ! सूचना यह है कि अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना में अभी भी काफी संख्या में लीमर हैं,जबकि अफ्रीका महाद्वीप के ठीक बगल में स्थित मेडागास्कर जो लीमर की विभिन्न प्रजातियों के लिए विश्व प्रसिद्ध कहा जाता था,वहां इनकी संख्या नाममात्र को ही बची है ! काले और सफेद रंग के इस खूबसूरत जीव की पूंछ काफी लंबी व धारीदार होती है,जबकि इनकी आंखें काफी बड़ी-बड़ी होतीं हैं।

अफ्रीका से सटे चारों तरफ से समुद्र से घिरे हुए एक बड़े से द्वीप मेडागास्कर के लिए लीमर का वही महत्व है जो चीन के लिए पांडा का महत्व है लेकिन मेडागास्कर में पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करने वाले इस जीव का अस्तित्व अब बेहद खतरे में है ! इसकी विलुप्ति इतनी तेजी से हो रही है कि वैज्ञानिकों के अनुसार यह भी डर है कि आज से 10-20 वर्ष बाद यह जीव सिर्फ किताबों का हिस्सा बन कर न रह जाए !

मेडागास्कर दुनिया का एक ऐसा द्वीप देश है,जो जैव विविधता में बहुत संपन्न हैं ! यहां मिलने वाले काले और सफेद रंग के लीमर नामक इस अद्भुत जीव की पूंछ धारीदार होती है,जबकि इसकी आंखें बहुत बड़ी-बड़ी होतीं हैं। जीव वैज्ञानिकों के अनुसार बंदर की तुलना में लीमर्स कम बुद्धिमान होते हैं,लेकिन उनकी सूंघने की शक्ति बहुत अधिक तीव्र होती है लेकिन उनकी दृष्टि अपेक्षाकृत बहुत कमजोर होती है। लीमर की कुछ प्रजातियां दिन के दौरान बहुत सक्रिय रहतीं हैं, लेकिन आमतौर पर उनकी आंखें रात के जीवन के लिए कहीं अधिक अनुकूलित हैं !
आकार,वजन और उम्र
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सबसे छोटी लीमर प्रजाति पिग्मी माउस लीमर है,जिसका सिर से पैर की अंगुली तक आकार मात्र 2.5 इंच या 6 सेंटीमीटर से भी कम होती है और इनका वजन मात्र 30 ग्राम होता है,हालांकि इसकी पूंछ इसके शरीर से दोगुनी लंबी मतलब 5 इंच होती है। सबसे बड़ी लीमर प्रजाति इंड्री है,जो वयस्क होने पर 2.5 फीट या लगभग 0.75 मीटर जितना लंबा हो सकता है और इसका वजन 8किलोग्राम तक हो सकता है !
लीमर की पूंछ इसके शरीर से लगभग दोगुनी होती है,जो अपने समूह के अन्य सदस्यों से संवाद कायम करने तथा पेड़ों की टहनियों पर शारीरिक संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोग में लाई जाती है, सुप्रसिद्ध रिंग-टेल्ड लीमर्स का औसत जीवनकाल 16-19 साल तक का होता है लेकिन अपवाद स्वरूप कुछ लीमर 25 या 30 साल तक की उम्र तक जीवित पाए गए हैं।
विनाश के कारण
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विनाश के कगार पर खड़े लीमर इसलिए तेजी से विलुप्त हो रहे हैं,क्योंकि मेडागास्कर के वर्षा वनों का कृषि की जमीन के लिए तेजी से विनाश किया जा रहा है,इसके अलावा अनियमित कृषि और जंगलों में बहुत अधिक खनन तथा इन्हें पालतू बनाने के लिए पकड़ना आदि मानवीय हस्तक्षेप के कार्यों ने इस भोले जीव के विलुप्त होने के कारण है,सबसे बड़े दु:ख की बात है कि मेडागास्कर के स्थानीय होटलों और रेस्तरांओं में विलुप्ति के कगार पर खड़े लीमरों की हत्या करके उनके मांस को भोजन के रूप पर्यटकों को अभी खिलाया भी जा रहा है ! और मूर्ख और क्रूर पर्यटक उसे खा भी रहे हैं !
अभी पिछले दिनों इंटरनेशनल यूनियन फोर कन्सर्वेशन ऑफ नेचर यानी आईयूसीएन या International Union for Conservation of Nature or IUCN नामक संस्था ने कहा है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि स्तनपाइयों और कशेरुकी प्रजातियों के किसी भी बड़े समूह की तुलना में लीमर के लिए यह खतरे का उच्चतम् प्रतिशत है। आईयूसीएन ने कहा कि लुप्तप्राय प्राइमेट्स को बचाने में मदद के लिए एक बड़ा एक्शन प्लान शुरू किया जा रहा है। लीमर इस दुनिया से मारिशस के डोडो पक्षी और न्यूजीलैंड के बाघ जैसे इस दुनिया से सदा के लिए विलुप्ति के कगार पर खड़े हैं ! इनकी कुल 111 प्रजातियों और उप-प्रजातियों में से 105 प्रजातियां भयावह खतरे में हैं ! 2012 से आईयूएसीएन लीमर की आबादी पर अपडेट जारी करती आई है। ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘ के रूप में पहचानी जाने वाली प्रजातियों में से एक नॉर्थ स्पोर्टिव लीमर या North Sporty Lemur है,जिनकी संख्या इस धरती पर केवल 50 रह गई है !
इस बेहद खूबसूरत स्तनपाई जीव को हर हाल में बचाया जाना चाहिए
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इस अद्भुत, अद्वितीय और बेहद खूबसूरत जीव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर और ईमानदार प्रयास करके हर हाल में बचाया जाना चाहिए,इसके मांस खाने पर कठोर प्रतिबंध लगनी चाहिए,आखिर हम मानव इस धरती के अन्य जीवों के जीवन में इतनी दखलंदाजी और ऐसा क्रूर व्यवहार क्यों करते हैं कि वे इस धरती से सदा के लिए विलुप्त होने को अभिशापित हो रहे हैं ? हम इस गंभीर विषय पर चिंतन क्यों नहीं करते कि मानव जीवन भी तभी संतुलित और स्वस्थ्य रहेगा, जब इस धरती के सभी जीव इस पर स्वस्थ्य और प्रसन्नचित्त रहेंगे,हम मानव प्रजाति को इस बात को ईमानदारी से सोचना ही होगा कि हमारी इस धरती पर विद्यमान जैवमंडल का स्वस्थ्य और संतुलित रहना बहुत जरूरी है !
-निर्मल कुमार शर्मा ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक, पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र,निष्पक्ष,बेखौफ,आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन,संपर्क-9910629632, ईमेल – nirmalkumarsharma3@gmail.com





