सोने की प्रतिकृति भी ऐतिहासिक जय स्तंभ की जगह नहीं ले सकती : अजय खरे
रीवा 3 फरवरी . समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि रीवा के इतिहास को सुनियोजित तरीके से मिटाया जा रहा है . इधर स्वतंत्रता संग्राम के पहचान चिन्हों को मिटाकर देश विरोधी काम किए जा रहे हैं . यह अत्यंत शर्मनाक चिंताजनक बात है कि शासन-प्रशासन में बैठे लोगों के द्वारा ऐसा किया जा रहा है , इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है . रीवा जिले में जितनी भी ऐतिहासिक इमारतें और प्रतीक चिन्ह हैं , उनकी भारी अनदेखी हो रही है
. शहीदों की स्मृति में बने प्रतीक चिन्हों का सही रखरखाव करने की जगह उनकी ऐतिहासिक पहचान खत्म की जा रही है . रीवा के ऐतिहासिक जयस्तंभ को मूल स्थान से हटाया जा रहा है और उसके बदले स्थानीय पद्मधर पार्क में उसकी प्रतिकृति तैयार की जा रही है .श्री खरे ने कहा कि जयस्तंभ को हटाने का कोई भी तर्क सही नहीं है . जय स्तंभ को हटाया जाना सरासर गलत है . होना तो यह चाहिए कि जय स्तंभ चौराहे पर यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए वहां ट्रैफिक पुलिस और ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था बनाई जाए , न कि जय स्तंभ को ही समस्या बताकर हटाने का षड्यंत्र रचा जाए . श्री खरे ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों एवं प्रतीक चिन्हों के मूल स्वरूप में किसी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए , न ही उनका स्थान बदला जाना चाहिए . यह भारी विडंबना है कि आजाद देश के रीवा शहर में पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 7 पर स्थित देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक जय स्तंभ को हटाने का दुष्चक्र पूरा होने जा रहा है . इसे हटाने से पहले जयस्तंभ की एक प्रतिकृति स्थानीय पद्मधर पार्क में निर्माणाधीन है . लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसा किया जा रहा है . श्री खरे ने बताया कि सन 1957 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शताब्दी समारोह के अवसर पर बीहर नदी के छोटी पुल के पास पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 7 पर जय स्तंभ स्थापित किया गया था .जय स्तंभ रीवा शहर की शान और ऐतिहासिक धरोहर है , जिसका इसी स्थान पर महत्व है .

श्री खरे ने कहा कि यदि पद्मधर पार्क में सोने का भी जयस्तंभ बना दिया जाए तो वह इस ऐतिहासिक जयस्तंभ की जगह नहीं ले सकता है . यह बहुत आपत्तिजनक बात है कि ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव एवं उनके संरक्षण करने के बजाय कथित विकास के नाम पर व्यवसायिक हितों को साधने के लिए जय स्तंभ को नष्ट किया जा रहा है . श्री खरे ने कहा कि करीब 64 साल पहले जब जय स्तंभ का निर्माण हुआ था तो वह राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाया गया था . यहां शुरू से भारी भरकम वाहनों का आवागमन हमेशा रहता था लेकिन इसके चलते कभी कोई व्यवधान और दिक्कत नहीं आई . बाईपास बनने के बाद राष्ट्रीय मार्ग की स्थिति बदल गई है . इस जय स्तंभ में एक छोटा सरोवर और फव्वारा भी है , जिसकी अनदेखी लंबे समय से होती आ रही है . वहीं शहर के दूसरे चौराहों में फव्वारे चल रहे हैं . कुछ साल पहले जय स्तंभ के सामने ही जेपी सीमेंट के द्वारा अपने प्रचार प्रसार के लिए एक नकली जय स्तंभ स्थापित कर दिया गया . जिसका विरोध होने के बावजूद उसे आज तक नहीं हटाया गया वहीं इधर मूल जयस्तंभ की पहचान को ही नष्ट किया जा रहा है . श्री खरे ने कहा कि सिरमौर चौराहा , कॉलेज चौराहा , अस्पताल चौराहा पर भारी भरकम आवागमन रहता है लेकिन वहां पर विशेष ध्यान दिया जाता है वहीं दूसरी ओर जयस्तंभ को बचाने की जगह उसे हटाने के दुष्चक्र को अंतिम रूप दिया जाने वाला है . श्री खरे ने बताया कि कॉलेज चौराहा और अस्पताल चौराहे की रोटरी काफी बड़ी है लेकिन वहां ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू होने के कारण यातायात व्यवस्था सुगम रहती है .वहीं जय स्तंभ को अनावश्यक रूप से हटाने के लिए वहां की रोटरी को निशाना बनाया जा रहा है . इस बात से शासन-प्रशासन का विरोधाभासी चरित्र स्पष्ट रूप से उजागर हो गया है .

श्री खरे ने कहा कि जय स्तंभ को हर हाल में वहीं रहना चाहिए और उसे भव्य बनाने के लिए आसपास की जमीन अधिग्रहित की जानी चाहिए . जय सतंभ के पास स्थित ऐतिहासिक गवर्नमेंट प्रेस को नष्ट करके समदड़िया बिल्डर्स के सुपुर्द किया जा चुका है . ऐसा लगता है कि समदड़िया बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए वहां से जय स्तंभ को हटाया जा रहा है . श्री खरे ने कहा कि ढेकहा से कमिश्नर बंगले तक तीसरा फ्लाईओवर बनने से पुराने नेशनल हाईवे पर बनी शहर की सड़कों का अस्तित्व संकट में है . इसके पहले भी इसी मार्ग पर दो फ्लाईओवर बनने के कारण नीचे की सड़कों को आधा कर दिए हैं . जिसके चलते आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है . रीवा में बने सभी फ्लाईओवर महज फिजूलखर्ची हैं और दिखावे बाजी है , जिसके चलते नीचे की सड़कें काफी सकरी हो गई हैं .
श्री खरे ने कहा कि दरअसल शासन प्रशासन में बैठे लोगों की देशभक्ति की भावनाएं मर चुकी है जिसके चलते जय स्तंभ को हटाने का अत्यंत गैर जिम्मेदाराना निर्णय लिया गया . जय स्तंभ के सवाल पर जहां सत्तारूढ़ दल चुप्पी मारे बैठा हैं वहीं विपक्षी पार्टी के लोग भी इसे अभी तक मुद्दा नहीं बना पाए हैं .जय स्तंभ का सवाल लोकसभा और राज्यसभा में नहीं उठाया गया , न ही विधानसभा में इसे उठाने की कोई तैयारी किसी पक्ष के द्वारा नहीं की गई है . श्री खरे ने कहा कि जय स्तंभ के हटने का मतलब रीवा की ऐतिहासिक पहचान मिटाना है जिसके लिए यहां के प्रशासन के अलावा , जनप्रतिनिधि , राजनेता और बुद्धिजीवी वर्ग , जागरूक नागरिक सभी जिम्मेदार होंगे , जिन्होंने समय रहते इसे रोकने की ईमानदार कोशिश नहीं की .






