-सनत जैन
मध्य प्रदेश के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु को करोड रुपए के गबन और घोटाले के आरोप में, पुलिस द्वारा फरारी के कई दिनों बाद उन्हें छत्तीसगढ़ के रायपुर से गिरफ्तार किया है। कुलगुरु को भोपाल लाया गया, न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। तथाकथित कुलगुरु ने छात्रों की फीस में बड़ा घोटाला किया। विश्वविद्यालय के बैंक खाते से रकम निकालकर अन्य खाते में ट्रांसफर करने फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपए का घोटाला किया है।
2017 से लेकर अभी तक करोड़ों रुपए के खरीदी और निर्माण घोटाले की अभी जांच नहीं हुई है। यदि इसकी जांच होगी तो यह घोटाला विश्वविद्यालयों के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने कुलपति को कुलगुरु का पद नाम दिया है। यदि ऐसे कुलगुरु होंगे, तो भगवान ही मालिक हैं. 2017 में जब उनकी पहली बार नियुक्ति हुई थी। तब इन्होंने कहा था कि मैं सेवा करने के लिए आया हूं। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा था,हमारा मकसद छात्र हित है, नाकि स्वहित है. इन आदर्शवादी कुलगुरु की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कि निकटता के कारण हुई थी। तत्कालीन राज्यपाल ओम कोहली ने 2017 में उनकी नियुक्ति की थी। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 2000 छात्र पढ़ते हैं।
इसके अलावा 375 इंजीनियरिंग कॉलेज और टेक्निकल कॉलेज विश्वविद्यालय से एफिलेटेड हैं। इसमें भी हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षारत हैं. सरकार और संघ का आशीर्वाद होने के कारण प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के घपले और घोटाले इस विश्वविद्यालय में होते रहे हैं। भ्रष्टाचार की जो गंगा इस विश्वविद्यालय से निकल रही थी। उसमें सरकार और संघ के लोग भी उपकृत हो रहे थे। डॉ. सुनील कुमार को नियम विरुद्ध कुलपति बनाया गया था। यह सरकारी सेवा में थे, तथा इन्हें पढाने का कोई अनुभव नहीं था। यह कुलपति बन ही नहीं सकते थे। भाजपा के शासन में जिसे संघ और सरकार का आशीर्वाद मिल जाए, उसे वह हर पद मिल जाता है। जिसके लिए वह सक्षम नहीं होता है। यही कुल गुरु डॉक्टर सुनील कुमार के साथ हुआ। 2017 में नियम विरुद्ध वह कुलपति पद पर नियुक्त कर दिए गए। भ्रष्टाचार की गंगा में बहते हुए उन्होंने करोड़ों रूपया कमाया। 2021 में तत्कालीन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें दूसरी बार राज्यपाल नियुक्त कर दिया
। दूसरी बार जब कुलपति बनाए गए थे। तब भी उनके ऊपर भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोप थे। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, भ्रष्टाचार की इस गंगोत्री में किस-किस ने स्नान किया है। यह पता लगाया जाना भी जरूरी है। अकेले डॉ सुनील कुमार ही इसके दोषी नहीं है। सही मायने में केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय ईडी को इस मामले की जांच करनी चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार को भी यह मामला ईडी को जांच के लिए सौंपना चाहिए। तब जाकर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 2017 से लेकर 2024 के बीच में हुए घपले घोटाले सामने आ सकेंगे। इसका पैसा किस-किस के पास गया है, यह भी उजागर हो सकेगा। भला हो उन छात्रों का, जिन्होंने कुलपति के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोला, संघ का ही एक अनुवांशिक संगठन कुलपति डॉक्टर सुनील कुमार के विरुद्ध आंदोलन रत हो गया। बड़े दबाव में जांच की कार्रवाई हुई। जिसमें अभी केवल एक मामला ही उजागर हुआ है। विश्वविद्यालय के खाते से अन्य खाते में फर्जी तौर पर रकम ट्रांसफर करके जो घोटाला किया गया, वह लगभग 20 करोड रुपए करीब का है। यह एक छोटा सा गबन मामला है।
विश्वविद्यालय की 2017 से लेकर अभी तक के वित्तीस मामलों की जांच कराई जाएगी, तो इसमें निर्माण कार्यों में और खरीदी में करोड़ों रुपए के घोटाले हर साल देखने को मिलेंगे। जिन कॉलेजों को विश्वविद्यालय द्वारा एफीलिएशन दिया गया है। उनसे भी प्रति कॉलेज लाखों रुपए की रिश्वत ली गई है। परीक्षा में भी भारी गड़बड़ी हुई हैं। प्रतिवर्ष इसमें भी करोड़ों रुपए की रिश्वत लिए जाने की चर्चाएं विश्वविद्यालय परिसर में हो रही हैं। विश्वविद्यालय की परीक्षाएं गोपनीय तरीके से होती हैं।
इसका खर्च भी गोपनीय रखा जाता है। इसमें भी बड़े-बड़े घपले हुए हैं। शिक्षा के मंदिर में कुल गुरु के रूप में डॉ सुनील कुमार को सरकार और संघ के सिपहसलारों का संरक्षण होने के कारण, अरबों रुपए का घोटाला राजीव गांधी प्रोधोगिकी-विश्वविद्यालय में पिछले 6 वर्षों में हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसी, विशेष रूप से ईड़ी से जांच कराई जाएगी, तो बड़े-बड़े घपले घोटाले सामने आते देर नहीं लगेगी। दिल्ली का शराब घोटाला भी कोई मायने नहीं रखता है। जितना बड़ा घोटाला राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हुआ है। इसमें बड़े-बड़े सफेदपोश शामिल हैं।





