आज बॉलीवुड स्टार का नाम हॉरर और सस्पेंस का ब्रांड बन चुका है. उन्होंने साबित कर दिया कि एक अच्छी हॉरर फिल्म केवल अचानक आने वाली आवाजों या डरावने चेहरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे एक मजबूत स्क्रीनप्ले और दिल छू लेने वाली प्रेम कहानी का होना भी जरूरी है. हम विक्रम भट्ट की बात कर रहे हैं जो अपनी इसी अनूठी शैली के कारण आज भी फिल्म जगत के सबसे असरदार निर्देशकों में गिने जाते हैं.
भारतीय सिनेमा में जब भी सस्पेंस, रोमांच और रोंगटे खड़े कर देने वाले डर की बात होती है, तो विक्रम भट्ट का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. विक्रम भट्ट महज एक निर्देशक नहीं, बल्कि एक ऐसे कहानीकार हैं जो दर्शकों को पर्दे के पीछे की एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाने की महारत रखते हैं. उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे ‘प्यार’ और ‘भय’ जैसे दो विपरीत अहसासों को एक ही धागे में पिरोने का हुनर जानते हैं.
महान फिल्ममेकर थे दादा विजय भट्ट
27 जनवरी 1969 को मुंबई में जन्मे विक्रम भट्ट को सिनेमा विरासत में मिला. उनके दादा विजय भट्ट 50 और 60 के दशक के महान फिल्म निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने सिनेमाई इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी. वहीं उनके पिता, प्रवीण भट्ट, इंडस्ट्री के एक सम्मानित सिनेमैटोग्राफर रहे हैं. विक्रम ने अपने निर्देशन के सफर की शुरुआत साल 1992 में फिल्म ‘जानम’ से की थी. अपने करियर के शुरुआती दशक में उन्होंने ‘मदहोश’, ‘गुनहगार’ और ‘फरेब’ जैसी रोमांटिक और थ्रिलर फिल्मों पर ध्यान दिया. हालांकि ये फिल्में दर्शकों को पसंद आईं, लेकिन विक्रम भट्ट को अपनी असली पहचान मिलना अभी बाकी था.
हॉरर जॉनर से चलाया जादू
विक्रम भट्ट के करियर का निर्णायक मोड़ साल 2002 में आया, जब उन्होंने ‘राज’ के जरिए हॉरर जॉनर में कदम रखा. इस फिल्म की अपार सफलता ने न केवल उनके करियर की दिशा बदल दी, बल्कि बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों को देखने का नजरिया भी बदल दिया. उन्होंने महसूस किया कि भारतीय दर्शकों को एक ऐसी कहानी की तलाश है जहाँ डर के साथ-साथ गहरी संवेदनाएं और सुरीला संगीत भी हो.
ट्रेंडसेटर और हिट फिल्मों की कतार
विक्रम भट्ट ने हॉरर जॉनर में कई नए प्रयोग किए. वे भारत में ‘3D हॉरर’ और ‘क्रीचर फिल्म्स’ लाने वाले अग्रणी निर्देशकों में से एक हैं. उनकी हिट फिल्मों की फेहरिस्त काफी लंबी है: उनकी फिल्मों में सस्पेंस और रहस्य की परतें इतनी गहरी होती हैं कि दर्शक अंत तक कुर्सी से बंधे रहते हैं. उन्होंने तकनीक (VFX) और संगीत का ऐसा तालमेल बिठाया कि उनकी फिल्में सिर्फ डराती नहीं, बल्कि दर्शकों को एक भावनात्मक सफर पर भी ले जाती हैं.





