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विश्वगुरु की ध्यान भंगिमाएं अकारण नहीं 

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                             –सुसंस्कृति परिहार 

एक प्रधानमंत्री ऐसा भी जो भगवा लपेटकर मुंड त्रिपुंड लगाकर ,माला जाप करके आम चुनाव के दरम्यान विवेकानंद स्मारक पर बैठकर चुनाव में, अपनी हिंदूवादी छवि के सहारे वाराणसी और अंतिम चरण के कल होने जा रहे मतदान को प्रभावित कर रहा है। उसने आठ दस कैमरे लगा रखे हैं। गोदी मीडिया चिल्ला चिल्ला कर मोदीका यशगान कर रहा है।चुनाव आयोग हमेशा की तरह मौन है। अब तक सुको के संज्ञान में भी मामला नहीं आया है ।ये सब क्या हो रहा है?क्या संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन पर चुनाव लड़ते पीएम पर कार्रवाई नहीं होगी।वे अन्य प्रत्याशियों से अलग हैं। वे जानबूझकर ऐसा समय चुनते हैं जो आचार-संहिता का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन है। उन्हें किसी का डर नहीं है।

कहा जाता है कि विश्व गुरु ने अपने दस साल के कार्यकाल में एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। केदारनाथ बाबा के पास गुफा में बैठने वाला और अभी 45 घंटे ध्यान लगाने वाला क्या ऑन ड्यूटी काम कर रहा है। चुनाव आयोग ने आज ही यह सफाई दी कि 15 दिन से जो एक करोड़ वोट बढ़ने का आरोप था वह सरासर झूठा है। उन्होंने इसकी खातिर कागजी एंट्री का सहारा लिया।अरे भई वो सब भी मेनेज हो जाता है।जब सरकारें मैनेज हो जाती हैं तो ईवीएम किस खेत की मूली हैं।

लेकिन अभी जो विवेकानन्द शिला पर पीएम का जो ध्यान का प्रचार चहूंओर जो चल रहा है वह भी क्या नहीं नज़र आ रहा है। नौटंकीबाजी के एक से एक सुपर अंदाज़ चुनाव आयोग देखकर मौन है तब कैसे कह दें कि परिणाम निष्पक्ष आएंगे। दुखद स्थिति तो यह है कि सरकारी खजाने से ये सब तमाशा होता है पूरी सरकारी मशीनरी ज़र ख़रीद ग़ुलाम की तरह काम करती है पर किसी को नज़र नहीं आता।याद करिए उन लम्हों को जब प्रधानमंत्री इंदिरा जी की चुनावी सभा का पंडाल लगाने गए अधिकारियों की शिकायत होने पर उन्हें अदालत से पराजय का सामना करना पड़ा था।राजनाराण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनावी कदाचार मामले में जीत हासिल की, जिसके कारण उन्हें अयोग्य ठहराया गया।क्या आज ऐसा कहीं संभव होना दिखता है।

इधर तो आचार-संहिता का उल्लंघन राजनैतिक खेल बन गया है। प्रधानमंत्री उस ज़द में अब आते ही नहीं। चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर पीएम पूरी तरह हावी है। इसलिए इस कथित ध्यानी नौटंकी की परवाह नहीं कर रहा । चुनाव मज़ाक बना हुआ है। प्रधानमंत्री पद का खुलकर दुरुपयोग हो रहा है।सुको को संज्ञान लेकर यह नौटंकी बंद करवानी चाहिए क्योंकि एक तो संवैधानिक दृष्टिकोण से यह कृत्य असंवैधानिक है ,दूसरे देश भर में आचार संहिता लगी हुई है।

यह ध्यान एक साज़िश के तहत किया अपराध है इस पर तुरंत कार्रवाई अपेक्षित है।वैसे भी संविधान को जर्जर करने का उपक्रम दस साल से चल रहा है। 

ज्ञात हुआ तमिलनाडु कांग्रेस ने मद्रास हाईकोर्ट में पीएम द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन करने के विरुद्ध याचिका दाखिल कर दी है।याद आता है 2014 का वह मोदी का प्रथम संसदीय चुनाव था वे मतदाताओं की लाईन में खड़े हाथ में कमल का फूल लिए हिलाकर मतदाताओं को रिझा रहे थे तब चुनाव अधिकारी ने यह कहकर कि वे 100 गज की दूरी पर थे इसलिए आरोप नहीं बनता जबकि वे बराबर मतदान केन्द्र के अंदर थे। चुनाव में घिनौने खेल के अलावा झूठ फरेब का उनका इतिहास है आज तो नये नवेले झूठ गढ़ने में  वे माहिर हो चुके हैं। इस सब के बावजूद उन्हें ध्यान करने की ज़रूरत क्यों पड़ी इसमें उनके बनारस में पराजय के संकेत छुपे हुए हैं। उनकी मुखमद्रा बता रही हैं वे ध्यान नहीं गहरे सोच में है।जाप कर रहे हैं। फोटो के साथ उनके जाप की ध्वनि भी साफ़ सुनाई देती तो कुछ और बात होती ।

Ramswaroop Mantri

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