भोपाल। प्रदेश में सरकारी अमले द्वारा एक दशक पहले कई तरह से लगाई गई खजाने की चपत के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसकी वजह से इस तरह काम करने वाले अफसर व कर्मचारी अब भी इस तरह के काम करने में पीछे नहीं रहते हैं। यह मामला करीब 39 करोड़ के नुकसान से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के सरकारी विभागों में 3 हजार 232 मामलों में सरकारी खजाने को यह चपत लगाई गई है। खास बात यह है कि इसकी जानकारी सरकार को दी जाने के बाद भी 66 फीसदी मामलों में तो कोई कार्रवाई ही नहीं की गई है।
खास बात यह है कि इनमें से 545 मामलों में 22 लाख 73 हजार रुपए की ही वसूली की गई है। यह खुलासा हुआ है महानियंत्रक लेखा परीक्षक की विधानसभा में पेश रिपोर्ट से। इसमें बताया गया है कि 31 मार्च 2019 तक के सरकारी महकमों के लेखों की जांच में पाया गया है कि इस अवधि में 3 हजार 232 मामलों में खजाने को 38 करोड़ 67 लाख रुपए से अधिक की हानि हुई है। इसमें भी सबसे अधिक हानि वानिकी तथा वन्य जीवन से जुड़े 2 हजार 16 करोड़ 41 लाख रुपए की और कोषालय एवं लेखा के 11 मामलों में 8 करोड़ 30 लाख रुपए का नुकसान होना बताया गया है।
इसकी वूसली संबंधितों से की जानी थी, लेकिन कैग की जांच में खुलासा हुआ है कि इनमें से 1हजार 175 मामलों में 25 और उससे अधिक सालों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इस वजह से आज भी 3 करोड़ 25 लाख रुपए की वसूली अटकी हुई है। इसमें बताया गया है कि 15 से 25 वर्ष पुराने 274 मामलों में एक करोड़ 91 लाख रुपए की , 15 से 20 वर्ष पुराने 389 और 10 से 15 वर्ष पुराने 291 मामलों में 10 करोड़ 25 लाख रुपए की वसूली नहीं की गई है। इसी तरह से 10 वर्ष की अवधि के 1हजार 106 मामलों में 23 करोड़ 28 लाख रुपए की वसूली ही नहीं की गई है।
पुलिस में गबन के यह हैं मामले
सरकारी महकमों में पुलिस विभाग में हानि के 308 मामलों में 285 लाख 33 हजार रुपए का नुकसान होना पाया गया है, जबकि कोषालय और लेखा प्रशासन में 111 मामलों में 830 लाख 43 हजार रुपए का नुकसान होना बताया गया है। इसी तरह से शिक्षा के 104 मामलों में 712 लाख 64 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दो दर्जन सरकारी महकमों में सरकारी खजाने को नुकसान होना सामने आया है। इन विभागों में लोक निर्माण, नर्मदा घाटी, स्थानीय निकाय, पंचायत, ग्राम रोजगार, खनिज, वानिकी, ग्राम विकास, पशुपालन, कृषी, सामाजिक कल्याण, श्रम, स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन, निर्वाचन, वाणिज्य कर, कोषालय एवं लेखा, पुलिस, खेल, चिकित्सा शिक्षा, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं जल आपूर्ति जैसे विभाग शामिल हैं।
22 लाख 73 हजार की वसूली हुई
रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें चोरी के मामलों में सरकार को 6 करोड़ 12 लाख रुपए की चपत लगी थी। यह चपत 161 मामलों में लगी है। इसी तरह से दुर्विन्योग और सामग्री की हानि के 3 हजार 71 मामलों में 32 करोड़ 57 लाख रुपए की हानि हुई है। यही नहीं 3 हजार 160 मामलों में 37 करोड़ 59 लाख रुपए वसूली और राइट आॅफ करने की कार्यवाही तक नहीं की गई है। इसी तरह से 70 मामले न्यायालयों में लंबित हैं। वर्ष 1819 में 46 प्रकरणों में 23 लाख 75 हजार रुपए की हानि को राइट आॅफ कर दिया गया। इस अवधि में सिर्फ 545 मामलों में 22लाख 73 हजार की ही वसूली की गई।
खजाने को करोड़ों की चपत लगाने वालों पर ढाई दशक बाद भी कार्रवाई का इंतजार





