अग्नि आलोक
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हम सब सिर्फ एक नहीं एक जैसे ही हैं?

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शशिकांत गुप्ते

आज सीतारामजी दुविधापूर्ण मानसिकता में हैं। मिलते कहने लगे मानाकी वर्तमान सामाजिक,धार्मिक,आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक क्षेत्र पर व्यंग्य लिखने के लिए भरपूर मुद्दे हैं,लेकिन यह कोई गर्व की बात नहीं है, बल्कि शर्म की बात है।
जो भी हो अपने को अपनी व्यंग्य की विधा को अनवरत रखना है।
दिल्ली दिल है हिदुस्थान का यह सुवाक्य पढ़ने पर मन में अभिमान जागता है सुनने में सिर्फ कर्ण प्रिय ही नहीं लगता गर्व का अनुभव होता है।
दुर्भाग्य से जब दिल्ली की नगर निगम के सभागृह में जनता के द्वारा अमूल्य मत प्राप्त जनप्रतिधिनियों आपस में हाथों और पावों का आक्रमक उपयोग के साथ वैमनस्यता को प्रदर्शित करने के लिए,गलबहियां करते हुए दृश्य देखने साथ ही स्त्री प्रतिनिधियों द्वारा निश्चित ही किसी पार्लर के कक्ष में महंगी कीमत अदा कर की गई केश सज्जा को पारस्पारिक रूप से शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए विकृत करने वाले दृश्य देखकर लगता है, हिदुस्थान के शरीर से दिल नामक अवयव गायब हो गया है।
शायर हैदर अली आतिश के इस शेर का स्मरण होता है।
बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का
जो चीरा तो इक क़तरा-ए-ख़ूँ न निकला

बहरहाल एक ओर वे लोग हैं,भ्रष्ट्राचार को जड़मूल से समाप्त करने के लिए किए गए आंदोलन के गर्भ से निकल कर झाड़ू हाथ में थामें हुए हैं।
दूसरी ओर वे हैं जो party with different का नारा बुलंद करते हुए,संस्कार और संस्कृति का प्रशिक्षण देने वाले विश्वविद्यालय में प्रशिक्षित हैं।
बचपन से पढ़ाया जाता है। माता पिता को सेवा करनी चाहिए,सदा सच बोलना चाहिए। दुर्भाग्य से देश में वृद्धाश्रम की खबरें मन को व्यथित कर देती है।
ठीक इसी तरह चाहे झाड़ू हाथ में थाम लेने से वोट मिल सकतें हैं, लेकिन आचरण को शुद्ध रखने के लिए झाड़ू की नहीं शुद्ध सोच की आवश्यकता होती है।
विज्ञापनों में कर पार्टी विद डिफरेंट का स्लोगन प्रसारित करने से स्वयं की अलग पहचान नहीं बन सकती है?
शक्ति वर्धक पेय का विज्ञापन देखने वालों का प्रतिशत और मुफ्त अनाज प्राप्त करने वालों की संख्या के साथ कुपोषण से पीड़ित लोगों की संख्या का सांख्यिकी के आधार पर विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर
वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी?
सीतारामजी ने कहा नगर निगम सभागृह में जितने भी जन प्रतिनिधि हताहत हुए होंगे उनका इलाज़ निश्चित ही दिल्ली में स्थापित किए मौहल्ला क्लीनिक में ही होगा?
संभवतः इलाज़ भी मुफ्त में ही होगा?
इनदिनों रेवड़ी संकृति भी तो बहुत फल फूल रही है?
मौहला क्लीनिक की सफलता भी विज्ञापन ही है? मौहल्ला क्लीनिक में कार्यरत कर्मियो को वेतन मिलता है या नहीं यह खोज का विषय है?

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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