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क्या सोच रहे कश्मीरी? मन टोटलने कश्‍मीर के दौरे पर जाएंगे करीब 70 केंद्रीय मंत्री

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नई दिल्‍ली
जम्‍मू और कश्‍मीर को लेकर किस तरह आगे बढ़ा जाए, इस दिशा में केंद्र सरकार ने अहम पहल की है। केंद्रीय मंत्र‍ियों की अलग-अलग टीमें वहां के दौरे पर जाएंगी। ये टीमें जनता से बात करेंगी, अपनी सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की जानकारी देंगी और उनका मन भांपने की कोशिश करेंगी। अफगानिस्‍तान में तालिबान के कब्‍जे के बाद, पाकिस्‍तानी आतंकी संगठनों को मजबूती मिलने की आशंकाओं के बीच यह दौरा बेहद महत्‍वपूर्ण है। तालिबान के एक नेता ने एक दिन पहले ही कहा है कि वह ‘कश्‍मीर के मुसलमानों की आवाज’ उठाएगा।’ रिपोर्ट्स के अनुसार, 9 हफ्तों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में करीब 70 मंत्री हिस्‍सा लेंगे।

मोदी जाएंगे या नहीं, अभी तय नहीं
संविधान के अनुच्‍छेद 370 में बदलाव के बाद केंद्र सरकार की वहां की जनता से सीधे मिलने की यह दूसरी कवायद होगी। पिछले साल 18-24 जनवरी के बीच 36 केंद्रीय मंत्रियों ने जम्‍मू और कश्‍मीर का दौरा किया था। खबर है कि 10 सितंबर से केंद्रीय मंत्रियों के दौरे शुरू होंगे। जनता से मुलाकात के अलावा मंत्री प्रशासन और पंचायती राज संस्‍थाओं के लोगों से भी मिलेंगे। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में कुल 78 मंत्री हैं और उनमें से 70 के इस कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने की बात सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जम्‍मू और कश्‍मीर के दौरे पर जाएंगे या नहीं, अभी इसपर कुछ तय नहीं हुआ है।

क्‍या है मोदी सरकार का प्‍लान?
हर हफ्ते 8 मंत्री जम्‍मू और कश्‍मीर जाएंगे। चार जम्‍मू में और चार कश्‍मीर में। वरिष्‍ठ केंद्रीय मंत्री भी इसका हिस्‍सा होंगे। जिस मंत्री के पास जो भी मंत्रालय है, वह अपने मंत्रालय से जुड़ी बातों को नोट करेगा और वापस लौटकर गृह मंत्रालय (MHA) और PMO को रिपोर्ट सौंपेगा। PMO में केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह‍ इस पूरी कवायद को लेकर MHA से को-ऑर्डिनेट कर रहे हैं।

2020 में जो केंद्रीय मंत्री जम्मू और कश्‍मीर के दौरे पर गए थे, उन्‍होंने भी वापस लौटकर रिपोर्ट्स सौंपी थीं। अब सितंबर में हो रही यह कवायद पहले जुलाई और अगस्‍त के महीनों में होनी थी, मगर संसद के मॉनसून सत्र और फिर स्‍वतंत्रता दिवस समारोह के चलते टाल दिया गया।

तालिबान के खतरे को देखते हुए दौरा अहम
भारत के लिए जम्‍मू और कश्‍मीर में अस्थिरता का खतरा पाकिस्‍तान के साथ-साथ अब अफगानिस्‍तान से भी खासा बढ़ गया है। तालिबान ने एक दिन पहले ही कहा है कि वह कश्‍मीर में मुसलमानों की आवाज उठाएगा। अब तक तालिबान इस मसले पर दखलअंदाजी की बात से बचता आया था। कई विशेषज्ञों ने खतरा जताया है कि तालिबान के साथ मिलकर पाकिस्‍तानी आतंकी कश्‍मीर में तबाही मचा सकते हैं। ऐसे वक्‍त में केंद्रीय मंत्रियों का जम्‍मू और कश्‍मीर जाना सरकार को स्‍थानीय माहौल से फर्स्‍ट-हैंड रूबरू कराएगा। तालिबान को लेकर कश्‍मीरियों की क्‍या सोच है और उससे सुरक्षा को लेकर क्‍या चिंताएं खड़ी हो सकती हैं, मंत्री इसपर अपनी रिपोर्ट्स में इनपुट्स जरूर देंगे।

कई सांसद, लोकसभा स्‍पीकर कर चुके हैं दौरा
लोकसभा स्‍पीकर ओम बिरला शुक्रवार को ही जम्‍मू और कश्‍मीर का दौरा खत्‍म कर लौटे हैं। पिछले कुछ महीनों में कई केंद्रीय मंत्रियों ने लेह का दौरा किया है। इसके अलावा संसद की 13 स्‍टैंडिंग समितियां भी जम्‍मू और कश्‍मीर और लद्दाख का दौरा कर आई हैं। इन समिति यों में 300 से ज्‍यादा सांसद हैं। करीब छह समितियों का दौरा अगले कुछ दिनों में प्रस्‍तावित है।

कश्‍मीर में बहाल हो गई है मोबाइल फोन, ब्रॉडबैंड सेवा
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की बुधवार को मौत के बाद कश्‍मीर में मोबाइल फोन पर वॉयस कॉलिंग सेवाएं और फिक्स्ड लाइन कनेक्शन पर ब्रॉडबैंड सुविधा बंद कर दी गई थी। शुक्रवार देर शाम दोनों सेवाएं बहाल कर दी गईं। अधिकारियों के मुताबिक, रविवार दोपहर को मोबाइल फोन पर इंटरनेट की सुविधा भी शुरू कर दी जाएगी। गिलानी घाटी के सबसे वरिष्ठ अलगाववादी नेता थे जो अपने पाकिस्‍तान प्रेम के लिए जाने जाते थे।

Ramswaroop Mantri

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