अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

मानव सहित इस धरती के समस्त जैवमण्डल के लिए सबसे जरूरी क्या चीज है ?

Share

-निर्मल कुमार शर्मा

इतिहास में यह उल्लिखित है कि आज से 2347 वर्ष मतलब ईसापूर्व 326 वर्ष में जब विश्वविजय अभियान पर निकला इतिहास प्रसिद्ध अक्जेंडर या सिकंदर अपने अत्यंत छोटे से राज्य मकदूनिया से तमाम छोटे-बड़े राज्यों,साम्राज्यों के खेतों,गाँवों,कस्बों,नगरों और देशों को लूटते और जीतते हुए अंततः भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर के राज्यों में पहुंचा तो वहाँ एक जगह उसे बड़ी जोर से भूख लगी,उसने अपने सैनिकों को पड़ोस के गाँवों से जाकर भोजन लाने का आदेश दिया,उसके सैनिकों ने पड़ोसी गाँवों में जाकर कुछ थालियों में भोजन देने का आग्रह किया, तब तक उस गाँव की भी खड़ी फसलों को सिकंदर की सेना तबाह कर चुकी थी,गाँववालों ने अपने गाँव की सभी स्त्रियों से उनके पहने हुए सोने,चाँदी, हीरे,जवाहरातों से बने , सैनिक जब उन थालियों को लेकर सिकंदर के सामने पेश कर दिए,लेकिन जब सिकंदर उन थालियों के ऊपर ढके कपड़े को हटाया तो वह यह देखकर अवाक् रह गया कि उन थालियों में भोज्यपदार्थों की जगह उनमें सोने,चाँदी,हीरे, जवाहरातों से बने आभूषण भरे पड़े थे,चूँकि सिकंदर बहुत भूखा था,इसलिए वह अन्दर ही अन्दर तिलमिला गया और क्रोधित भी बहुत हुआ,लेकिन उन गाँववालों द्वारा दिए गये इस गूढ़ शिक्षा को हृदयंगम कर उनसे बहुत प्रभावित भी हुआ ! कि ‘मनुष्य सहित इस पृथ्वी के समस्त जैवमण्डल के सभी प्राणियों के लिए इस धरती के सबसे मूल्यवान चीजों से भी अत्यंत जरूरी भोजन है। ‘ लेकिन भोजन से भी जरूरी दो अन्य चीजें भी हैं,उनमें सर्वप्रथम प्राणवायु, जिसे ऑक्सीजन भी कहते हैं और दूसरी सबसे जरूरी चीज जल है !
इसलिए छतरपुर जिले के बक्सवाहा के समृद्ध जंगलों,जिनमें सैकड़ों तरह के औषधीय गुणों वाले पौधों के अतिरिक्त हजारों तरह के कीट,पतंगों,तितलियों,भौरों,भृगों,सरीसृपों,परिंदों और स्तनधारी जीवों का बसेरा है,वर्तमानदौर के सत्ता के फॉसिस्ट,मूर्ख,असहिष्णु,हृदयहीन,ममताविहीन,पर्यावरण के घोर शत्रु उक्तवर्णित सभी जीवों के घरों को उजाड़ने के लिए चंद करोड़ रूपये मूल्य के कथित हीरे के मोह से ग्रसित होकर उक्त सभी जीवों के बसेरे लाखों पेड़ों को काटने के अपनी पैशाचिक जिद्द ठाने हुए हैं। दुनियाभर के पर्यावरण वैज्ञानिक बार-बार यह चेतावनी देते आ रहे हैं कि अब इस धरती के पर्यावरण,पेड़ों,दरख्तों,जंगलों,और इसके भूगर्भ के साथ अब और कतई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए,पहले ही बहुत हो चुका है ! इससे क्रुद्ध और दुखी होकर प्रकृति बार-बार कभी सुनामी,कभी अतिवृष्टि,कभी अनावृष्टि,कभी अतिवृष्टि, कभी सूखा,कभी भयंकरतम् गर्मी,कभी भयंकर तूफान आदि के रुप में अपनी नाराजगी को बार-बार प्रगट कर रही है,लेकिन बहुत-बहुत अफसोस नेताओं+अफसरों +ठेकेदारों की दुष्ट त्रयी अभी भी प्रकृति की इस गंभीर चेतावनी को नजरंदाज करके पृथ्वी,इसके पर्यावरण, इसके जंगलों,पहाड़ों,समुद्रों,नदियों और भूगर्भ से अतिदोहन रूपी गुँडागर्दी करने से बाज नहीं आ रहा है ! अभी कोरोना ने पूरे विश्व में जो मौत का नंगा नाच और तांडव मचा रखा है और पता नहीं भविष्य में कब तक वह इस भयावहतम् दुःस्थिति को भविष्य में भी बरकरार रखेगा,इसके कारणों को भी कोई नहीं जानता,वैज्ञानिक भी इस मामले में चुप्पी साधे हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना भी मनुष्यजनित कुकृत्यों के फलस्वरूप ही पैदा हुआ है,वे इसे ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पैदा हुई समस्या बता रहे हैं,निश्चित रूप से उक्त दुष्ट त्रयी समस्त मानवता और समस्त जैवमण्डल के सर्वनाश करने पर उतारू हैं ! समस्त जैवमण्डल की भविष्य की सुरक्षा के लिए यह सब विध्वंसकारी क्रिया-कलाप रूकनी ही चाहिए। यह बात हमारे समझदार पूर्वजों ने आज से 2347 साल पूर्व सोने,चाँदी और हीरे आदि से सजी थाली सजाकर उसे भूख से व्याकुल विश्वविख्यात योद्धा सिंकदर को भेजकर इस दुनिया को फतह करने निकले विश्वविख्यात योद्धा सिंकदर तक को समझा दिया था,लेकिन अत्यंत खेद है कि इस बात को भारत के वर्तमानदौर के सत्ता के कर्णधारों को क्यों नहीं समझ में आ पा रही है ! यह बात बहुत ध्यान से समझी जानी चाहिए कि हीरे-जवाहरातों आदि के बगैर मानव प्रजाति खूब मजे में जी सकता है, लेकिन जल और ऑक्सीजन के बगैर कुछ मिनट भी नहीं जिया जा सकता ! इसलिए इस भयावहतम् काल में समस्त मानवता की भलाई इसी में अन्तर्निहित है कि हर हाल में हीरों के लोभ-लालच में बक्सवाहा जंगल के लाखों पेड़ों की बलि बिल्कुल और कतई नहीं ली जानी चाहिए।

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें