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*मोदी के विकास और घुसपैठ की राजनीति कितनी होगी*

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पूर्णिया। “सीमांचल और पूर्वी भारत में घुसपैठियों के कारण डेमोग्राफी कितना बड़ा संकट खड़ा हो चुका है, बिहार, बंगाल असम कई राज्‍यों के लोग अपनी बहनों बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इसलिए भी मैंने डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की है, लेकिन वोट बैंक का स्वार्थ देखिए कांग्रेस, राजद और उसके ईको सिस्‍टम के लोग घुसपैठियों की वकालत करने में जुटे और बचाने में लगे हैं।”

“देश के विकास के लिए बिहार का विकास जरूरी है। बिहार के विकास के लिए पूर्णिया और सीमांचल का विकास जरूरी है।”

15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे गरीब एवं पिछड़े इलाके सीमांचल से विकास और घुसपैठ जैसे दो मुख्य मुद्दे पर बोल रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार यानी 15 सितंबर को बिहार रैली के दौरान पूर्णिया में 40 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू करने के साथ ही कई योजनाओं का शिलान्यास एवं उद्घाटन किया है। 

भीड़ जुटाने के लिए कंडक्टर और खलासी बनाए जा रहे शिक्षक

राजद सांसद एवं पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर एक सरकारी पत्र को पोस्ट किया है। इसके माध्यम से उन्होंने कहा कि शिक्षक जनगणना, मतगणना और रैलियों में भीड़ जुटाने का काम करेंगे। अब बस में खलासी भी बन रहे हैं। ऐसे में वे पढ़ाएंगे कब? सरकार शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवा रही है। बिहार के स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है। उपलब्ध शिक्षकों को भी चुनावी काम, सर्वे और रैलियों में लगाया जा रहा है।

पत्र के मुताबिक अंचल कार्यालय बनमनखी ने शिक्षा पदाधिकारी को एक पत्र जारी किया है। इसमें जीविका दीदियों को रैली स्थल तक ले जाने के लिए 200 बसों की व्यवस्था की जानी थी। जिसमें शिक्षक को सुरक्षा और समन्वय के लिए तैनात करने की योजना थी।

गौरतलब है कि बिहार में एक करोड़ 40 लाख महिलाएं जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में चुनाव में जीविका से जुड़ी महिलाओं को लुभाने की कोशिश की जा रही है। कई रैलियां में देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री की रैली में जीविका को सरकार के माध्यम से बुलाया जा रहा है। 

शिक्षक नेता राजू सिंह कहते हैं कि, “शिक्षकों को शिक्षक के अलावा कई गैर काम मिला हुआ है। अब भीड़ जुटाने के लिए बसों से लोगों को ले जाने का काम भी शिक्षकों को सौंपा गया है। ये शिक्षकों के सम्मान के साथ मजाक है। “शिक्षकों का इस्तेमाल भीड़ जुटाने के लिए करना सार्वजनिक तौर पर शिक्षकों का मजाक है।” 

हिंदू मुस्लिम राजनीति के जरिए राजनीति

“10 एकड़ में विशाल टेंट और 5 वाटरप्रूफ हैंगर, सभा स्थल के समीप तीन हेलीपैड, आम सभा के मुख्य मंच पर 70 कुर्सियां, दो सहायक मंच…पीएम मोदी चुनावी साल में 7वीं यात्रा में काफी अच्छी व्यवस्था थी। सीमांचल में पीएम मोदी की सियासी मौजूदगी गजब की दिखी। सीमांचल में पीएम मोदी को सुनने पहुंची भीड़ को देखकर दंग रह जाइएगा।” स्थानीय पत्रकार तेजस्वी बताते हैं। वहीं नाम ना बताने की शर्त पर एक स्थानीय कर्मचारी ने कहा कि भीड़ जुटाने के लिए कथित तौर पर 7 जिला का प्रशासन लगा हुआ है। सहरसा और सुपौल जिले से भी सहरसा तक से बसों में भर भर कर औरतों को ले जाया गया है।

सीमांचल! इस इलाके में बिहार के चार जिले अररिया, कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया आते हैं। पश्चिम बंगाल से लेकर नेपाल तक की सीमा यहां से जुड़ती है। इन जिलों में बांग्लादेश से आए मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है। यहां हिंदू बनाम मुस्लिम की राजनीति काफी दशकों से होती रही है। भाजपा लंबे वक्त से सीमांचल के इलाके में घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। 

शेरशाहबादी मुसलमान अति पिछड़ा वर्ग में आते हैं। ये सीमांचल के अलावा कोसी इलाके में भी रहते हैं। यह खुद को शेरशाह सूरी के वंशज मानते हैं। इलाके के भाजपा नेता शेरशाहबादी मुसलमानों को बांग्लादेशी बताते हैं। इसी समुदाय से रहने वाले जैबार मियां बताते हैं कि, “शेरशाहबादी मुसलमानों को ईबीसी आरक्षण भी मिला है। हम लोगों के दादा-परदादा यहीं रहते रहते गुज़र गए…अभी हम लोग कैसे घुसपैठी बन गए?”

किशनगंज के रहने वाले सत्यम यादव पटना में ही रिसर्च कर रहे हैं। वह कहते हैं कि,”11 साल से भाजपा क्या कर रही है? जब आप सत्ता में हैं, तो घुसपैठिए कहां से आ गये? सीमांचल के जरिए भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद बिहार में उस स्तर का धार्मिक ध्रुवीकरण नहीं होता है,ना होगा।”

वहीं अररिया के रहने वाले मनीष कुमार बताते हैं कि, “बहुत लोग बाहर से आकर सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं। फिर बोलते हैं कि हम यहां के निवासी हैं। एनआरसी और सीएए कानून से ही इस अपराध पर अंकुश लग सकता है।”

वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर कुमार मिश्रा लिखते हैं कि,”घुसपैठिए बिहार के लिए ख़तरा हैं। बिहार में घुसपैठ की समस्या से जब प्रधानमंत्री जी चिंतित हैं! .. तो सोचिए हम बिहारियों की हालत क्या होगी ? मैं बिहारी हूं और मुझे यह अधिकार है कि मैं प्रधानमंत्री जी से सवाल करूं कि बिहार में डेमोग्राफिक बदलाव के लिए जिम्मेदार कौन है? अगर बिहार में घुसपैठिए आ गए हैं तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है ? सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? थोड़ी बहुत जिम्मेदारी अगर राज्य सरकार की बनती है तो उसमें भी तो बीजेपी की साझेदारी है!”

सीमांचल.. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश का गरीब इलाका, जहां भारतीय जनता पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड असमान रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में, भाजपा ने इस क्षेत्र की 11 सीटों पर चुनाव लड़कर आठ सीटें जीती थीं। इनमें अररिया और कटिहार से तीन-तीन सीटें, जबकि पूर्णिया से दो सीटें भाजपा के खाते में गईं। किशनगंज जिले से भाजपा का कोई भी उम्मीदवार विजयी नहीं हुआ।

बिहार में अब फिर झूठ नहीं चलेगा।

एक तरफ पूर्णिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार को करोड़ों का चुनावी उपहार दे रहे थे, उसी वक्त राजधानी पटना में दरोगा भर्ती के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को बेरहमी से पीटा जा रहा था।

जब-जब छात्र अपने अधिकारों की बात करते हैं तो उन्हें पुलिस के द्वारा लाठियों से पीटकर खदेड़ा जाता है !! ये तस्वीरें बिहार में आम सी हो गई हैं !

पूर्णिया से पहले दरभंगा में एयरपोर्ट की शुरुआत की गई थी। दरभंगा के रहने वाले सुभाष कुमार बताते हैं कि,”कोई ये नहीं बतायेगा कि दरभंगा एयरपोर्ट कितने उड़ानों को लेकर शुरू हुई थी और आज कितनी उड़ानें चल रही हैं। दरभंगा से आए दिन उड़ानें कैंसिल होती रहती है। 100-100 किमी से आए लोगों को वापस जाना पड़ता है।”

विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बताते हैं कि,”आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी, आज पूर्णिया में जुमलों की बारिश करने से पूर्व कृपया अपने सभा स्थल से 2-3 किलोमीटर के दायरे में अवस्थित जर्जर ग्रामीण सड़क, शिक्षक विहीन स्कूल, बदहाल स्वास्थ्य केंद्र तथा महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व पलायन से परेशान महिलाओं व युवाओं की जनसमस्या आपको जाननी चाहिए। पूर्णिया के मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति कल आपने अवश्य ही देखी होगी।”

“प्रधानमंत्री जी, आप 11 वर्षों की अपनी केंद्र तथा 20 सालों की NDA सरकार की विफलताएं देख जोर-जोर से जंगलराज-जंगलराज कहिए ताकि आपकी असफलताएं और जनहित के मुद्दे इस काल्पनिक शोर में दब जाएं। लेकिन बिहार और बिहारवासी आपके बनावटीपन से अब अच्छे से अवगत हो चुके हैं इसलिए बिहार में अब फिर झूठ नहीं चलेगा।” आगे वह बताते हैं

Ramswaroop Mantri

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