अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

40 साल पहले जब पहली बार UN पहुंचे खामेनेई, इजरायली PM के वॉकआउट ने लिखी थी बर्बादी की इबारत!

Share

साल 1985 का वह ऐतिहासिक वीडियो आज के ईरान-इजरायल युद्ध की गहरी जड़ों को दर्शाता है, जब संयुक्त राष्ट्र में अयातुल्ला खामेनेई के प्रवेश करते ही इजरायली दल ने वॉकआउट किया था. 40 साल पहले जो संघर्ष कूटनीतिक बहिष्कार और हॉल छोड़ने तक सीमित था, वह आज मिसाइल हमलों और अरामको जैसी रिफाइनरियों पर प्रहार में बदल चुका है. इतिहास का यह थ्रोबैक वर्तमान बारूदी जंग की वैचारिक शुरुआत को बयां करता है.

सोशल मीडिया के गलियारों में आज एक 40 साल पुराना वीडियो आग की तरह फैल रहा है, जो चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि खाड़ी में आज जो बारूद बरस रहा है, उसकी चिंगारी दशकों पहले सुलग चुकी थी. यह साल 1985 का मंजर है जब न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की सुरक्षा चाक-चौबंद थी और ईरान के सुप्रीम कमांडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने तब ईरान के राष्‍ट्रपति के तौर पर पहली बार इस वैश्विक मंच पर कदम रखा था. जैसे ही काली पगड़ी और रूहानी लिबास में खामेनेई हॉल के भीतर दाखिल हुए कूटनीति के गलियारों में सन्नाटा पसर गया. ईरान के इस क्रांतिकारी नेता की मौजूदगी मात्र से इजरायली प्रधानमंत्री और उनका पूरा प्रतिनिधिमंडल तिलमिला गया और उठकर बाहर चला गया. यह महज एक वॉकआउट नहीं बल्कि दुनिया के नक्शे पर दो ऐसी ताकतों के बीच सीधी जंग का ऐलान था जो आज 2026 में मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हकीकत बन चुकी है.

1985 से 2026 तक क्‍या बदला?
1985 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम और आज के हालातों के बीच एक गहरा और डरावना संबंध है. इतिहास के पन्ने पलटें तो समझ आता है कि दुश्मनी का यह बीज कितना गहरा रोपा गया था.

· वैचारिक टकराव की शुरुआत: 1985 में खामेनेई का UN संबोधन केवल एक भाषण नहीं बल्कि पश्चिमी शक्तियों और इजरायल के खिलाफ ईरान की नई विदेश नीति का घोषणापत्र था.

बहिष्कार से प्रहार तक: तब इजरायल पीएम ने खामेनेई को सुनने से इनकार करते हुए हॉल छोड़ दिया था. आज स्थिति यह है कि दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य ठिकानों और तेल रिफाइनरियों (जैसे रास तनुरा) पर सीधे हमले कर रहे हैं.

ADVERTISEMENT

· नेतृत्व का निरंतरता: अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1985 में राष्ट्रपति के रूप में UN गए थे, आज ईरान के सर्वोच्च नेता हैं. उनके विचार और इजरायल के प्रति दृष्टिकोण आज भी वही हैं, बस अब उनके पास कूटनीति के साथ-साथ हाइपरसोनिक मारक क्षमता भी है.

· परिवर्तित युद्धक्षेत्र: 1985 में यह लड़ाई केवल बयानों और राजनयिक मंचों तक सीमित थी लेकिन आज यह खाड़ी के पर्यटन केंद्रों (दुबई, अबू धाबी) और ऊर्जा केंद्रों तक पहुंच चुकी है, जहां से रईस अपनी जान बचाने के लिए करोड़ों खर्च कर भाग रहे हैं.

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें