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फरियादी सरकारी आतंक से कब मुक्त होगा?

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*सुसंस्कृति परिहार

क्या आपने कभी सुना कि राजनैतिक दवाब के चलते कोई वीडियो कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका हो और पिटने वाला अधिकारी पहले विधायक को गिरफ्तार कराए और अब कोर्ट में अपना बयान बदले कि तमाम प्रत्यक्षदर्शी और वीडियो देखने वाले हक्का बक्का रह जाएं।जी हां यह सब मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के भवन निरीक्षक धर्मेन्द्र बायस और आकाश विजयवर्गीय विधायक के बीच चल रही अदालती कार्यवाही के बीच हुआ है।


बता दें, 26 जून 2019 को इंदौर नगर निगम के एक अधिकारी की बल्ले से पिटाई पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक आकाश विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आकाश विजयवर्गीय के साथ ही 10 अन्य लोगों पर भी FIR दर्ज हुई थी। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 353/294/323/506/147 व 148 के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। घटना के सम्बन्ध में बताया जाता है की इंदौर में एक जर्जर भवन को गिराने नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची थी।इस दौरान हुए विवाद में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय पर नगर निगम अधिकारी को बैट से पीटने के आरोप लगे थे। इस मामले में पीएम मोदी ने भी सख्त रुख अपनाया था और घटना की आलोचना भी की थी।
तब इंदौर जिला कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए विधायक आकाश विजयवर्गीय को जेल भेज दिया था। इसके बाद विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल एमपी एमएलए कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की। जिसके बाद भोपाल कोर्ट से विधायक की जमानत हुई थी। पूरा मामला तब का है, जब 15 महीनों की कांग्रेस सरकार मध्यप्रदेश में काबिज़ थी। पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। वीडियो के आधार पर पुलिस ने भी कड़ी कार्रवाई करते हुए विधायक को गिरफ्तार किया था।
आकाश विजयवर्गीय भारतीय जनता पार्टी महासचिव और दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं। वहीं इस पूरे मामले पर आकाश विजयवर्गीय को अफसोस नहीं था आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, हम इस तरह भ्रष्टाचार और गुंडई को खत्म करेंगे। आकाश ने उस समय यह भी कहा था कि ‘आवेदन, निवेदन और फिर दना दन’ के तहत हम अब कार्रवाई करेंगे।
बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय ने तब कहा था कि निगम के अधिकारी ने महिलाओं को घसीटकर घरों से बाहर निकाला था। महिला पुलिस को उनके साथ होना चाहिए था। जब मैं वहां पहुंचा तो लोग गुस्से में थे और अधिकारी को भगा रहे थे। मैं अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने जा रहा हूं।

आकाश विजयवर्गीय का मारपीट करते हुए एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में वह निगम अधिकारी से साथ मारपीट कर रहे हैं जो यहां पर इंदौर के निगम अधिकारियों की टीम जर्जर मकानों को तोड़ने के लिए आई थी। लेकिन आकाश विजयवर्गीय उन पर ही बरस पड़े। आकाश क्रिकेट बैट लेकर अधिकारियों पर हमला करने पहुंच गए और उनके साथ बदसलूकी करने लगे। इतना ही नहीं समर्थकों ने भी निगम अधिकारियों के साथ मारपीट की जिन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। वह 2018 में पहली बार इंदौर-तीन से विधायक बने हैं।इंदौर नगर निगम के 46 साल के भवन निरीक्षक धीरेंद्र बायस ने शहर के एमजी रोड पुलिस थाने में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।उस दौरान इस पिटाई के वीडियो सोशल मीडिया सहित कई चैनलों ने भी दिखाए।

और गत 19फरवरी को इंदौर कोर्ट में इस बल्ला कांड मामले को लेकर पहले मुकदमा लिखाने और आकाश को न्यायिक हिरासत में भिजवाने वाले अधिकारी अपनी गवाही से मुकर गये हैं। उन्होने कहा है कि उन्हें नहीं पता किसने पीटा है। उन्होने देखा ही नहीं कि आकाश ने पीटा या किसी और ने।आकाश विजयवर्गीय बल्ला कांड में लगता है वीडियो, निरीक्षक महोदय ने राजनीतिक दबाव में कोर्ट में पेश नहीं किया ।पूछने पर उनने यह भी कह दिया वीडियो ओरिजनल ही है उसकी कोई ऑथेंटिसिटी नहीं ।

इस बदलते व्यवहार को इस तरह भी देखने की ज़रूरत है जब यह घटना घटी तब राज्य में कमलनाथ की सरकार सत्ता में थी आकाश विपक्षी पार्टी भाजपा में थे।आतंक था , गुंडागर्दी थी तब पुलिस ने शिकायत पर उन्हें दबोच लिया।तब निरीक्षक धर्मेन्द्र बायस ने भी सोचा नहीं होगा कि एक साल बाद ये सरकार इस बुरी हालत में पहुंच जाएगी।क्योंकि ऐसा कभी नहीं हुआ था और सारी स्थितियां बदल गई । भाजपा के काबिज होते ही समझ सकते हैं धर्मेन्द्र कितने दबाव में रहे होंगे कि अदालत में उन्हें इस तरह के बयान देने मज़बूर होना पड़ा।यह एक बड़ी विडंबना है और अदालतों के सामने चुनौती भी। निष्पक्ष न्याय ना मिल पाना और आपराधिक तत्वों का इस तरह सुरक्षित निकल जाना दुर्भाग्य पूर्ण ही होगा।क्या अदालत को मामले को स्वत: संज्ञान में नहीं लेना चाहिए।जब तमाम स्त्रोत इस रहस्य को उजागर कर रहे हों। धर्मेन्द्र ने तो एक शासकीय अधिकारी की तरह बदली सरकार के साथ सुर बदल लिया वह भी ग़लत है उन्हें भी अदालत का समय बर्बाद करने का दोषी तो ठहराया जा सकता है। ज़रुरी यह है अदालत सरकार के इस भयावह आतंक का खुलासा करे ताकि बेवजह अधिकारी इस आतंक से बच सके।यह इस बात का भी अहसास कराती कि प्रदेश में अधिकारी नेताओं के कितने दबाव में है फिर विपक्ष और आलोचना करने वाले और उंगली उठाने वालों का क्या हाल होगा?

Ramswaroop Mantri

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