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कहां जन्मे हनुमान….तिरुपति के पहाड़ या हंपी के आंजनेय पर्वत पर…

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हंपी/ तिरुमाला

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का काम चल रहा है तो दूसरी तरफ भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर विवाद पीक पर है। हनुमान जी का जन्म कहां हुआ? इस सवाल के जवाब को लेकर दक्षिण के दो राज्य कर्नाटक और आंध्रप्रदेश आमने-सामने हैं।

कर्नाटक का दावा है कि हंपी से करीब 25 किमी दूर स्थित अनेगुंडी गांव ही किष्किंधा नगरी है और यहीं पवनपुत्र जन्मे। उधर, आंध्रप्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम यानी TTD कह रहा है कि तिरुमाला की 7 पहाड़ियों में से एक पर हनुमान जी का जन्म हुआ।

TTD ने तिरुमाला में स्थित आंजनेय पहाड़ी पर मंदिर में आने वाले भक्तों को फैसिलिटी देने के लिए भूमिपूजन भी कर दिया था, लेकिन कर्नाटक स्थित श्री हनुमान जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गोविंदानंद सरस्वती ने कोर्ट में इस निर्माण कार्य को चुनौती दी और कोर्ट ने स्टे लगा दिया।

2020 में TTD ने 7 सदस्यों की बाकायदा कमेटी गठित की थी, जिसने यह साबित करने की कोशिश की है कि हनुमान जी का जन्म स्थान तिरुमाला ही है। कमेटी ने जो रिपोर्ट तैयार की है, वह तेलुगू भाषा में तो आ चुकी है, अब 21 अप्रैल को हिंदी वर्जन भी लॉन्च होने वाला है।

सच्चाई की खोज में टीम कर्नाटक और आंध्रप्रदेश दोनों ही जगह पहुंची। हमने 3 हजार किमी से ज्यादा की यात्रा की। दोनों जगहों के एक्सपर्ट्स से बात की। नेचुरल एविडेंसेस देखे।

इन दोनों जगहों के एक्सपर्ट्स के अलावा राम जी के वनगमन स्थलों को एक सूत्र में पिरोने वाले शोधकर्ता डॉ. राम अवतार से भी बात की और इसके बाद यह रिपोर्ट लिखी है। आज हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर पढ़िए ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

पहले चलिए हंपी…जहां किष्किंधा है…

रामानंद संप्रदाय से महंत विद्यादास यहां बीते 25 सालों से पूजन का जिम्मा संभाल रहे हैं। हनुमान जी के जन्म स्थान के बारे में पूछने पर उन्होंने कई प्रमाण दिए…

तथ्यों को और ज्यादा टटोलने के लिए हम इतिहासकार, आर्कियोलॉजिस्ट और 20 सालों से भी ज्यादा समय से हंपी और किष्किंधा में रिसर्च कर रहे डॉ. शरणबसप्पा कोलकर के पास पहुंचे।

वे कन्नड़ में बातचीत करते हैं, इसलिए हम अपने साथ एक बाइलिंगुअल को भी ले गए। डॉ. कोलकर के मुताबिक हनुमान जी की जन्मभूमि कर्नाटक में हंपी के पास स्थित किष्किंधा ही है।

अब चलिए तिरुपति…

कर्नाटक से सभी तथ्य जुटाने के बाद हम आंध्रप्रदेश के तिरुपति बालाजी पहुंचे। हनुमान जन्म स्थान को लेकर टीटीडी ने जिन 7 सदस्यों की कमेटी गठित की है, उन्हीं में से एक और तिरुपति में स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ में प्रोफेसर सदाशिव मूर्ति से हमने डिटेल में बात की।

श्री वेंकटेश्वर उच्च धर्मशास्त्रीय संस्थान के अधिकारी और हनुमान जन्म स्थान को लेकर टीटीडी द्वारा बनाई गई कमेटी के मेंबर डॉ. अकेला विभीषण शर्मा से हमने मुलाकात की। कई प्रमाण उन्होंने भी दिए।

वनगमन स्थलों को एक सूत्र में पिरोने वाले शोधकर्ता डॉ. राम अवतार कहते हैं- मैं हंपी को ही हनुमान जन्म स्थान मानता हूं। वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में अध्याय नंबर 12 में मतंग वन की चर्चा है और वो सिर्फ किष्किंधा में है, तिरुमाला में नहीं है। ऐसा उल्लेख है कि मतंग वन में वो खेले-कूदे।

निष्कर्ष : दोनों ही राज्यों के अपने-अपने दावे हैं, विश्वास है और प्रमाण हैं। हालांकि नेचुरल एविडेंसेज ये बताते हैं कि हंपी के पास स्थित किष्किंधा ही अंजनी पुत्र हनुमान की जन्मस्थली है। लेकिन इस बारे में कोई एक निर्णय लेना मुश्किल है। अंजनाद्रि पर्वत पर टीटीडी के निमार्णकार्य का मामला हाईकोर्ट में है। निर्णय आना बाकि है।

राम मंदिर जैसा असर दक्षिण में हनुमान मंदिर से होगा

गंगावती में रहने वाले RSS नेता संतोष कहते हैं कि हनुमान जन्म स्थली के डेवलपमेंट के लिए 120 करोड़ रुपए सेंक्शन किए जा चुके हैं। जमीन अधिगृहण का काम भी शुरू हो गया है। इसका बड़ा पॉलिटिकल इम्पैक्ट होना भी तय है।

जैसे अयोध्या हिंदुओं की श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है, वैसे ही किष्किंधा भी बनेगा। दक्षिण भारत के साथ ही पूरे भारत में इसका असर दिखेगा। आने वाले सालों में हजारों-लाखों की संख्या में यहां हिंदू दर्शन के लिए पहुंचेंगे।

इन जगहों पर भी हनुमान जन्म का दावा

गुजरात स्थित डांग जिले को लेकर मान्यता है कि यहां अंजनी पर्वत की गुफा में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था।

झारखंड स्थित गुमला से 20 किमी दूर आंजन गांव है। माना जाता है कि यहीं पहाड़ की चोटी स्थित गुफा में हनुमान का जन्म हुआ था।

हरियाणा स्थित कैथल में भी वानर राज हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है।

महाराष्ट्र के नासिक से 28 किमी की दूरी पर स्थित अंजनेरी मंदिर को भी हनुमान जी का जन्म स्थान माना जाता है।

कर्नाटक के शिवमोगा के एक मठ प्रमुख ने दावा किया है कि हनुमान का जन्म उत्तर कन्नड़ जिले के गोकर्ण में हुआ था।

(प्रोफेसर मूर्ति के मुताबिक इन जगहों के वाल्मीकि रामायण, शास्त्रों, पुराणों में कहीं कोई सबूत नहीं मिलते)

Ramswaroop Mantri

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