रामकिशोर मेहता
( 1 )( दीपावली की शुभकामनाएं )
नेह दीप बन जलो।
रीत प्रीत बन चलो।
है रात अंधकार की
द्वेष की विकार की
पर्व हो प्रकाश के
दीप माल बन चलो।
राजमार्ग पर जलो
पथ प्रशस्त कर चलो।
जो हो कुटी गरीब की
तो रात रात भर जलो।.
लक्ष्मी झौपड़ी में रात भर की बला है।
( 2 )
( दीपावली )झौपड़ी को पता है
कि उसको अपने ही दीपक से खतरा है।
दीपक लक्ष्मी के चरणों में जला है।
लक्ष्मी झौपड़ी में रात भर की बला है।
लगाने भोग मोदकों के
लम्बोंदर का वाहन उतरा है।
अंधेरे में वह दृष्टि की साम्राज्ञी है।
आँख जिसकी मूषक पर लगी है।
खेल में चूहे बिल्ली के दीपक का तेल बिखरा है।
बाती झुक कर धरती को चूमती है।
झौपड़ी अब आग की संपदा है।
यह एक की नहीं हर झौपड़ी की कथा है।
यदा कदा ही अन्यथा है।
- दीपावली की शुभकामनाओं के साथ,रामकिशोर मेहता, संपर्क - 919408230881,
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क - 910629632




