हिमांशु कुमार
आदिवासी युवा तिलका मांझी ने 1784 में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था
1857 से सत्तर साल पहले
उसके बाद दो भाई सिधू – कानू फिर बिरसा मुंडा, और बस्तर का गुंडा धुर
राजस्थान के मानगढ़ में अंग्रेजों ने आदिवासियों पर गोली बरसा कर ढाई हजार आदिवासियों की हत्या कर दी थी
लेकिन भारत के मुख्य धारा के चिंतन और विमर्श से यह आदिवासी नायक और आदिवासियों का संघर्ष गायब हैं
आज़ादी के बाद से अगर किसी भारतीय समुदाय ने सबसे ज़्यादा दमन झेला है तो वह आदिवासी हैं
आज भी भारत के सबसे ज्यादा अर्धसैनिक बल कहां पर है?

वे आदिवासियों के गांवों में है
क्या यह सैनिक वहां पर आदिवासियों को सुरक्षा देने गए हैं
नहीं बल्कि यह उनकी जमीन और जंगल छीनने गए हैं
अगर आप किसी इलाके को अपने सैनिकों से भर देते हैं ताकि आप उनके इलाके पर कब्जा कर सके तो उसे युद्ध कहा जाता है
भारत आदिवासियों से एक युद्ध में व्यस्त है
इसे भारत का छिपा हुआ युद्ध कहा जाता है
लेकिन चूंकि हमने जो विकास का तरीका अपनाया है
उसमें दूसरे के संसाधन छीने बिना हमारा विकास हो ही नहीं सकता
इसलिए हम इस पूरे दमन और अपनी जनता के खिलाफ होने वाले युद्ध के बारे में सवाल नहीं उठाते
ना ही उसका विरोध करते हैं
हम अंग्रेजों को कोसते हैं लेकिन हमें अंग्रेजों जैसा अपना व्यवहार दिखाई नहीं देता
अंग्रेज दुनिया के दूसरे देशों को उपनिवेश बनाते थे
हम शहरी लोगों ने गांवों को अपना उपनिवेश बना दिया है
जैसे अंग्रेज दूसरे देशों को लूट कर अपनी ऐश आराम वाली जिंदगी बसर करते थे
हम भारत के शहरी लोग गांवों को लूट कर उसी तरह अपनी अय्याशी को बरकरार रखना चाहते हैं
हम कला साहित्य न्याय लोकतंत्र और संविधान सबकी बात कर लेंगे
लेकिन कोई अगर हमसे सीधी सच्ची बात कहे कि क्या दूसरों की जमीन छीन कर आप का विकास करना उचित है
तो हम दाएं बाएं देखने लगते हैं
आपकी सारी यूनिवर्सिटी या सारे आईआईटी आईआईएम
इनमें से कोई भी इस देश के आदिवासियों और गांव वालों की सेवा के लिए नहीं बने हैं
यह सब पूजी पतियों की सेवा के लिए बने हैं
आपकी पूरी शिक्षा बैंकिंग ट्रांसपोर्ट इंश्योरेंस सब पूजी पतियों के लिए बने हैं इनमें कोई भी आदिवासियों और गरीबों के लिए नहीं है
और जो पार्टी इस लूट को बरकरार रखने और बढ़ाने का विकास के नाम पर वादा करती है आप खुश होकर उसको चुनते हैं
गांव का सामान छीने बिना शहर का विकास हो ही नहीं सकता
हमारी आधुनिक सभ्यता झूठी ढोंगी और दिखावटी है
सब बातें बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन हमारी हिम्मत ही नहीं है कि हम न्याय और सत्य के पक्ष में खड़े हो सके





