सोहित मिश्रा-
महाराष्ट्र में कई टीवी चैनलों के मालिकों और संपादकों को कुछ हफ्ते पहले करोड़ों रुपये दिए गए हैं ताकि आने वाले कुछ दिनों तक सरकार के पक्ष में हर रोज़ कुछ मिनटों के लिए वो खबर चलाएं..
करोड़ों रुपये मिलने की एक बड़ी शर्त यह है कि इन सकारात्मक खबरों को चलाने के समय Advertorial शब्द का इस्तेमाल नहीं करना है और इसे एक सामान्य खबर के अनुसार चलाना है..

ऐसी खबरों पर अब आप नज़र रखिए.. सुबह सुबह कुछ चैनल तो तीन चार दिन पुरानी खबर चलाकर दिखा रहे हैं कैसे महाराष्ट्र में सब चंगा सी है! अगर वाकई सब अच्छा है तो पैसे देकर क्यों खबरें चलाई जा रही हैं?
अनुराग चतुर्वेदी–
रोज़ का एक करोड़ रुपया दिया जाएगा और सारी सामग्री भी सरकारी विभाग ख़ुद बना कर देगी. यह चैनलों को रिश्वत है देवा भाऊ फणनवीस सरकार की! काश सच में लोकपाल होता तो जाँच करता!
आप ही सोचिए हमें सही ख़बरें कैसे मिलेगी जब चैनल रोज़ वसूली करेगा.





