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*ध्यान : बुद्ध, दयानंद, श्रद्धानंद, ओशो क्यों मारे गए अगर ध्यान में शक्ति है?*

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     डॉ. विकास मानव

शीर्षक वाले प्रश्न के साथ यह भी पूछा गया : जेहादियों द्वारा जब मकान और संपत्ति जलाई जा रही हों , हत्याएं की जा रही हों,तब हमें क्या ध्यान करना चाहिए? हिन्दू-मुस्लिम भाई भाई का प्रचार?

   ~>ऐसे प्रश्न ही प्रश्नकर्ताओं की मूर्खता स्पष्ट करते हैं. भारत के इतिहास से ऐसे वेवकूफों ने कुछ सीखा हो ऐसा मुझे नहीं लगता।

     महमूद गजनबी ने जब सोमनाथ के मंदिर पर आक्रमण किया, तो सोमनाथ उस समय का भारत का सबसे बड़ा और धनी मंदिर था।

     उस मंदिर में पूजा करने वाले १२०० हिन्दू पुजारियों का ख़याल था कि हम तो रातदिन “ध्यान” ,भक्ति ,पूजापाठ, में लगे रहते हैं।  इसलिए भगवान हमारी रक्षा करेगा।

    उन्होंने रक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं किया, उल्टे जो क्षत्रिय अपनी रक्षा कर सकते थे, उन्हें भी मना कर दिया।

  परिणाम क्या हुआ? 

    महमूद गजनी ने उन हज़ारों निहत्थे हिन्दू पुरोहितो की निर्मम हत्या की. मूर्तियों ओर मंदिर को तोड़ा. अकूत धन संपत्ति, हीरे ,जवाहरात, सोना -चाँदी लूट कर ले गया।

  उन पंडितो का ध्यान, भक्ति, पूजा पाठ रक्षा न कर सका।

    आज सैकड़ों साल बाद भी वही मूर्खता जारी है.  आप ने अपने महापुरूषों के जीवन से भी कुछ सीखा हो ऐसा लगता नही है। 

     यदि “ध्यान” में इतनी शक्ति होती कि वो दुष्टों का ह्रदय परिवर्तन कर सके तो रामचंद्र जी को हमेशा अपने साथ धनुष बाण रखने की जरूरत क्यों होती?

     ध्यान की शक्ति से ही वो राक्षस और रावण का हदय परिवर्तन कर देते उन्हें सुर-असुर भाई -भाई समझा देते और झगड़ा ख़त्म हो जाता लेकिन राम भी किसी को समझा न पाए और राम रावण युद्ध का फैसला भी अस्र शस्त्र से ही हुआ।

   ध्यान में यदि इतनी शक्ति होती कि वो दूसरो के मन को परिवतिर्त कर सके तो पूर्णावतार श्रीकृष्ण को कंस और जरासंघ का वध करने की जरूरत क्यों पड़ती? ध्यान से ही उन्हें बदल देते।

     ध्यान में यदि दूसरे के मन को बदलने की शक्ति होती तो महभारत का युद्ध ही नहीं होता, कृष्ण अपनी ध्यान की शक्ति से दुर्योधन को बदल देते और युद्ध टल जाता। 

   उल्टे कृष्ण ने अर्जुन को जो कि ध्यान में जाना चाहता था रोका और उसे युद्ध में लगाया।

    महाभारत का युद्ध इतिहास का सबसे बड़ा युद्ध है जिसमें करोड़ों लोगों का नरसंहार हुआ.

    पिछले 1300 सालों में भारत मे कितने महर्षि संत हुए ,गोरखनाथ से लेकर रैदास और कबीर तक; गुरुनानक  देव जी से लेकर गुरु गोविंदसिंह तक. इन सबकी ध्यान की शक्ति भी मुस्लिम आक्रान्ताओं और अंग्रेज़ों को न रोक सकी.

     इस दौरान करोड़ों हिन्दुओं का नरसंहार हुआ और ज़बरदस्ती तलवार की नोक पर उनका धर्म परिवर्त्तन करवाया गया।

   मार- मार कर उन्हें मुसलमान बनाया गया। उन संतों की शिक्षा आक्रान्ताओं को बदल न सकी।  श्री गुरुनानक देव जी ने तो अपना धर्म दर्शन ही इस प्रकार दिया कि मुस्लमान उसे आसानी से समझ सकें, आत्मसात कर सकें. लेकिन उसी गुरु परंपरा में श्री गुरुगोविंद सिह जी को हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए, मुसलमानों के खिलाफ़ तलवार उठानी पड़ी। निहत्थे सिक्खों को शस्त्र उठाने पड़े।

   ध्यान से स्वयं की ही चेतना का रूपांतरण होता है. ध्यान से असीम यौनशक्ति मिलती है, लेकिन पदार्थ (भौतिक शरीर ) की रक्षा हमें ख़ुद करनी होगी उसके लिए विज्ञान और टेक्नॉलॉजी का सहारा लेना होगा। देश की 85% से अधिक समस्याओं का समाधान तभी होगा. 

    ध्यान को चेतना विकास के लिए, समाज की समस्याओं के समाधान नहीं लेना है तो अपरिमित यौनशक्ति के लिए लो. इसके लिए तो सभी पागल हैं न? पुरुष 10-15 मिनट में झड़ रहा है, करोड़ो में से कोई एक स्त्री आर्गेज्म पा रही है. मैं एक रात में एक-एक घंटे वाला सात राउंड दे सकता हूँ. मतलब 14-15 हॉटेस्ट फीमेल्स को बेसुध कर सकता हूँ. तुम से एक नहीं संभलती. तो मर्द बनने के लिए ही सही ध्यानिष्ठ बनो.

   रही देश की बात, तो : भगवान श्रीकृष्ण ने

पांडवों के लिए कृष्ण से 5 गाँव मांगे थे. हम देशहित में 5 कानून मांग रहे हैं– समान शिक्षा, समान नागरिक संहिता, धर्मातंरण नियंत्रण, घुसपैठ नियंत्रण, जनसंख्या नियंत्रण.

Ramswaroop Mantri

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