मीना राजपूत
_बाप की प्रॉपर्टी पर बेटे का जन्म सिद्ध अधिकार. हर स्वतन्त्रता भले वो कपड़े पहनने की हो ,बाहर रात दिन घूमने की हो. चोरी बलात्कार डकैती ,भ्रष्टाचार हर चीज की खुली छूट है।_
ये कहकर की आदमी है. बस हर गुनाह देर सवेर माफ कर दिया जाता है।
पुरुष घर मे पति बनकर मालिक का हक पाता है। लम्बी उम्र के उपवास रखवाता है स्त्री से। गांव में तो परम्परा है कि पति के पैर छुए स्त्री और पति के बाद खाए।
अक्सर पत्नियां सब्जी भी बनाती है तो ये कहकर की मर्द के लिए बनाई है वरना तो हम चटनी से खा लेते।अपने मान सम्मान के लिए ओरतों पर हजार लाख पाबन्दी पुरुष लगाए रखता है.
_सर पे पल्लू ,गले मे मेरे नाम का मंगलसुत्र ,मांग में मेरा सिंदूर और हजारो तरह की बेढंगी मनमानी करवाता रहता है पुरुष !_
हर जगह ऊंच पद पर आसीन भले प्रधानमंत्री हो देश का !हर बड़ा पड़ पर सांप की तरह कुंडली मानकर आसीन रहता है।
फिर भी ये कहता है कि मैं दुखी हूं ,मैं असंतुष्ठ हु ,मुझे घर से बाहर भी औरत चाहिए. मैं तनाव की गोली खा रहा हूँ ,मैं या तो खुद मर रहा हूँ या दूसरे को मार रहा हूँ। यह देख कर भी स्त्री भीतर से रोती है. रखैल बन जाती उसकी : किसी स्त्री की सौतन.
_मैं जब भी ये शब्द सुनती हु तो आश्चर्य में पड़ जाती हूं कि पुरुष अब भी खुश क्यों नही है ?_
बहुत सोचने के बाद ख्याल में आया कि जो दूसरों का अधिकार छीन लेता है ,जो दूसरों के नैतिक ,व्यक्तिगत अधिकारों का हनन करता हो ,वैसा व्यक्ति को खुश रहने का अधिकार हो ही नही सकता।
_औरत दुखी है क्योंकि पुरुष ने सारे अधिकता स्वतन्त्रता के स्त्री से ले रखे है।_
पर मर्द क्यों दुखी है? क्योंकि जो दूसरों के अधिकार लेता है जो दूसरों का मालिक बनता है ,जो कब्जे की भावना से रहता है ,वो कभी मुक्त नही हो सकता।
जो जैसा करेगा वैसा भरना भी पड़ेगा। बाहर से भले कितना खुश दिखता हो पर भीतर रुग्णता भरी पड़ी है पुरुष के।
इसलिए युद्व पर युद्ध किये चला जाता है। जितना विनाश धरती पर पुरुष ने किया है युद्ध के द्वारा ,इतना किसी ओर जीव ने नही किया धरती पर।
जिसके हाथ मे प्रोपेटी है बाप की,वो चोरी जैसे काम जो अंजाम क्यों देता है? कोई स्त्री चोरी कर ले तो समझ आता है ,पर सारे चोर पुरुष क्यों?
मर्डर करने में भी पुरुष आगे है ,पर क्यों? जो चाहे उसे बचपन से आराम से मिल जाता है। फिर भी घोर अपराध क्यों? बलात्कार जैसे दुष्कृत्य क्यों?
_जबकि समाज में वो एकाधिक स्त्री को रख लेता है. घर मे भी. जबकि औरत को ये अधिकार नही दिए है भारत ने._
हर लड़के की गर्ल फ्रेंड होती है और घर वाले आराम से स्वीकार भी कर लेते है जबकि लड़की का पता चल जाए घर वालो जो तो जिंदा जला देते है. पढ़ाई छुड़वा देते है. हजार तरह की मानसिक प्रताड़ना मिलती है लड़की को।
जबकि लड़का आराम से सम्बन्ध बनाए चला जाता है। रंडीबाजी भी पुरुष की वजह से चलती है समाज मे।फिर भी बलात्कार क्यों करता है पुरुष ?
विवाहित पुरुषो के कथन होते है कि हम पत्नी से ही नही और से भी सेक्स करना चाहते है. मुझे समझ नही आता कि फिर स्त्री जो ब्याह कर क्यों लाए थे घर मे. जब मन ही न मिला था तो तन क्यों मिलाया?
50 साल का पुरुष भी सपने देखता है कि मुझे गर्ल फ्रेंड चाहिए जबकि स्त्री को घर पे किचन और बच्चे संभालने में सारी उम्र निकल जाती है। और तब भी कभी नही कहती स्त्री कि उसे दूसरा पुरुष चाहिए।
_आखिर मर्दों की परेशानी क्या है ? क्यों इतने आक्रोश में और हिंसा में रहता आया है पुरूष? पुरुष प्रधान समाज मे भी पुरुष ही खुश नही है। ये बात हजम नही होती।_
[चेतना विकास मिशन)





