सीमांत गांधी खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान उर्फ़ बादशाह खान के नाम पर फ़रीदाबाद में चल रहे एक सत्तर साल पुराने अस्पताल का नाम सरकार ने बदलकर भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया है . वह महान महान स्वतंत्रता सेनानी थे. 1987 में उन्हें भारत रत्न से नवाज़ गया था.
फरीदाबाद के न्यू इंडस्ट्रियल टाउन में सीमांत गांधी बादशाह खान के नाम पर इस अस्पताल को वहां के लोगों ने खुद के पैसे और मेहनत से बनाया था . इसका उद्घाटन 5 जून 1951 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था।

अस्पताल का नाम बादशाह खान अस्पताल था। ‘था’ शब्द का इस्तेमाल इसलिये किया कि हरियाणा के स्वास्थ्य महानिदेशक की 3 दिसंबर 2020 को जारी एक अधिसूचना के बाद उसका नाम बदलकर भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर रख दिया गया है।
सीमांत गांधी बादशाह खान का नाम अस्पताल से मिटाने की ज़रूरत किया थी ? इस साल पर अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि इसका जवाब केवल प्रधानमंत्री कार्यालय दे सकता है .
शर्मनाक काम
इस ‘ शर्मनाक ‘घटना से वहां के लोग दुखी हैं। वहॉं नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस से भारत आये शरणार्थी रहते हैं , जो काफ़ी दुखी हैं , क्योंकि वे ख़ान अब्दुल गफ्फार खान से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। उनके बाप दादों ने अस्पताल को बनाने में ख़ून पसीना बहाया था.
उन लोगों के संगठन भाटिया सेवक समाज के 79- वर्षीय अध्यक्ष मोहन सिंह भाटिया का कहना है कि यह उनकी पहचान को मिटा देने जैसी घटना है , जिसे वे लोग किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। और इसका कड़ा विरोध करेंगे।
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि उनके हाथ में कुछ भी नहीं है। ऊपर से आदेश आया है।
सवाल यह उठता है कि विरासत सरीखे इस इस पुराने अस्पताल का नाम बदलने की ज़रूरत किया थी ? किस मानसिकता के चलते यह किया गया ? क्या कारण है कि राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों ने इस कदम का पुरज़ोर विरोध नहीं किया , जबकि आज आवश्यकता है कि खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान उर्फ़ बादशाह खान जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की यादों और उनकी विरासत को संजोया जाये .





