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*फिलीस्तीन को लेकर सरकार की नीति बदलवाने के लिए विपक्ष सड़कों पर क्यों नही है?*

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फिलिस्तीन में शांति और न्याय के लिए दिल्ली में 23 मई 2025  को इंटरनेशनल डेमोक्रेटिक राइट्स फाउंडेशन और ऑल इंडिया तंजीम उलेमा- ए -इस्लाम और एम एस ओ के द्वारा सम्मेलन आयोजित किया गया था। जिसे फिलिस्तीन के राजदूत एच ई अब्दुल्ला अबू शावेश, सांसद  चंद्रशेखर आज़ाद, सईद रूहुल्ला मेहदी, जिया उर रहमान बर्क, इंडिया फिलिस्तीन सॉलिडेरिटी फोरम के अध्यक्ष डॉ सुनीलम, एआईटीयूआई के अध्यक्ष मुफ्ती असफ़ाक हुसैन कादरी, सामाजिक कार्यकर्ता सज्जाद हुसैन कारगिली, एमएसओ के अध्यक्ष डॉ शुजात अली कादरी, आईडीआरएफ के डायरेक्टर डॉ फैज़ुल हसन द्वारा संबोधित किया जाना था।

   दिल्ली पुलिस द्वारा पहले सम्मेलन की अनुमति दी गई लेकिन रात में अचानक कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर दी गई।

    फिलिस्तीन में इजरायल- अमरीका द्वारा की गई सैन्य कार्यवाही में अब तक इजराइल के अनुसार 53 हजार तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार चार लाख फिलिस्तीनी नागरिक शहीद और घायल हो चुके हैं। लाखों विस्थापित हुए हैं।

    क्या भारत सरकार ने  फिलिस्तीन को लेकर कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने पर पाबंदी लगा दी है?

 क्या फिलिस्तीन में भुखमरी के हालात पैदा हो जाने और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा यह घोषणा किए जाने पर कि 48 घंटे में मेडिकल एड और खाद्य सामग्री नहीं पहुंचाई गई तो 14 हजार बच्चों की मौत हो जाएगी, भारत सरकार की यही प्रतिक्रिया उचित है? 

क्या देश पुलिस स्टेट में तब्दील हो गया है, जहां सवाल उठाने और विरोध करने की इजाजत नहीं दी जाती है? 

फिलीस्तीन को लेकर सरकार की नीति बदलवाने के लिए विपक्ष सड़कों पर क्यों खड़ा नही है?

Ramswaroop Mantri

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