अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*मर्जी

Share

अपनी ख़ुमारी में तुम आज
हमें दाता से याचक
और खुद को
याचक से दाता ही नहीं,
भाग्यविधाता बनाने की सोच रहे हो!

तुम्हारे नाजुक पैरों में
एक दिन जूते पहनाकर,
अपने पैरों में बिवाइयां…
हमने अपनी मर्जी से चुनी थी।

आज एहसानफरामोशी की
सारी हदें पार करके
अपनी खुदगर्जी में तुम
हमारे ही लिए खाइयां खोद रहे हो!

मर्जी और खुदगर्जी में
होता है फर्क जमीन आसमान का
तो चलो तुम भी करके देख लो
सारे जतन सारी कोशिशें
हमपर अपनी सोच थोपने के लिए..!
पर सच तो यही है न
आसमान कभी मजबूर नहीं हो सकता
धरती को सलाम ठोकने के लिए…!

सरिता सिंह

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें