शशिकांत गुप्ते इंदौर
ब्रिज अर्थात पुल वह भी उड़ान पुल (Flyover birdeg)।फ्लाई ओवर मतलब सड़क के ऊपर जो पुल बनाया जाता है।मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी माँ अहिल्या की नगरी के पूर्व क्षेत्र में रिंग रोड पर उडान पुल निर्माणाधीन है।इस पुल की डिझाईन जिनके अधीन थी,वे अभियंता (Engineers) डिझाईन बनाते हुए सम्भवतः भूल गए की पुल के नीचे यातायात को सुगम बनाने के लिए उड़ान पुल निर्मित करना है।
पुल के नीचे चलने वाले यातायात को अवरोध पैदा करने के लिए नहीं।हमारी व्यवस्था को प्यास लगने पर कुआँ खोदने की आदत है।अब जो तकनीकी समस्या उपस्थित हुई है,इसे हल करने के लिए पुल निर्माण के कार्य में विलम्ब होगा।कोई बात नहीं हम भारतीय नागरिक है।हमारे अंदर सहनशीलता कूट कूट कर भरी है।हम इस उक्ति पर अमल करने वालें हैं। *जब जब जो जो होना है तब तब सो सो होता है।*इसका नहीं उसका नहीं किसी का नहीं ये दोष तक़दीर का सारा है।भारतीयों की तक़दीर में भरपूर इंतजार लिखा हुआ है।बहरहाल हम चर्चा कर रहें हैं।उड़ान पुल की,जिस सड़क पर यह पुल बन रहा है।
इसी सड़क के मुख्य चौराहे पर श्रीमंत महाराजा की मूर्ति स्थापित हुई थी।कुछ समय तो यह भ्रम बना रहा कि, शायद महाराज साहब की मूर्ति के कारण बिलंब हो रहा है।यह भ्रम तोड़ने के लिए महाराजा के उत्तराधिकारी ने तुरंत गले लटकाने वालें क्षमा करना पहनने वाले दुप्पटे में से एक रंग कम दिया और दुरंगी दुपट्टा धारण कर लिया।महाराज के सेवक ने बीच चौराहे पर स्थापित मूर्ति को स्थानंतरित करने लिए योग्य स्थान की तलाश शुरू कर दी।अपनी कुशल बुद्धिमत्ता से पवित्र स्थान खोज लिया।दुर्भाग्य से सिर मुड़ाते ही ओले गिरे वाली कहावत चरितार्थ हो गई।कोविद 19 ने अपनी दूसरी लहर का कहर ढा दिया।इस बीच जागरूक नागरिक बेचारे बोले भी तो कैसे? एक तो आर्टिकल 19 पर अप्रत्यक्ष अंकुश और कोरोना के कारण मुँह पर मास्क लगाना जरूरी है।अंततोगत्वा मूर्ति को यथा स्थान शिफ्ट कर दिया गया।अब पुल के नक्शे के कारण विघ्न आ गया।एक कहावत है। *कानी के ब्याह को सौ जोखो* अर्थात किसी कार्य में कदम कदम पर विघ्न आना।पुल बनेगा जरूर बनेगा अब वह सत्तर वर्ष वाली पुरानी सरकार नहीं है।इस पुल के निर्माण में जो विघ्न आर हें हैं वे इसलिए आ रहें है कि,जो अभियंता इस पुल निर्माण के लिए कार्यरत हैं वे सभी उस समय इंजीनियरिंग पढ़े जब देश में कुछ भी नहीं था।वैसे सामान्य ज्ञान की जानकारी के अनुसार अगले वर्ष अपने देश को स्वतंत्र होकर पचहत्तर वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।पुल बनेगा अब कोई ऐसी वैसी सरकार नहीं है।शुचिता वाली सरकार है।प्रदेश की बागडौर मामाजी हाथों में हैं।मामाजी को अपने भांजे और भांजियों की बहुत चिंता है।इसीलिए एनकेनप्रकारेण बहुमत जुटाकर कोरोना की परवाह किए बगैर सत्ता प्राप्त की।बाकायदा शपथ लेने के बाद पूर्ण विश्वास के साथ सम्पूर्ण रूप से प्रदेश लॉक डाउन की घोषणा की।इसे कहतें है एक प्रामाणिक भ्रष्ट्राचार विहीन सरकार?वाह मामाजी आपकी कुशाग्र बुद्धि की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।मामाजी शिवजी के अवतार है।शिवजी कैलाश पर्वत के ऊपर बैठ हैं।ऐसा पौराणिक कथाओं में वर्णित है।निर्माणधीन पुल बनेगा।
सरकार से आम जनता की गुहार है।महाराज साहब की मूर्ति जहाँ शिफ्ट की है, वहाँ बगीचा बनेगा। इस बगीचे में एक तुलसी का पौधा बाकायदा तुलसी वृदावन बनाकर जरूर लगाया जाए।यह एक एहतिहासिक कार्य होगा।जिन लोगों ने वर्षो से गले में पहने हुए थे, उन दुपट्टों को साहस के साथ बदले उन्हें सलाम।पुल बनेगा निश्चत बनेगा। सबुरी का फल मीठा होता है।बहुत से लोगों ने भगवान से मन्नत भी मांगी है।एक सुझाव है निर्माणाधीन पुल के निर्माण में आ रहे सारे अवरोध दूर करने के लिए बीच चौराहे पर एक हवन कर दिया जाए।निश्चित ही पुल निर्माण का सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी।स्मरण रहे कि,हवन के कारण ही हमारी क्रिकेट टीम विश्वकप जीतती है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





