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क्या इसी राजस्थान मॉडल से कांग्रेस गुजरात में चुनाव जीतेगी?

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रेल पुल पर विस्फोट में आतंकी साजिश, भर्ती परीक्षा का पेपर फिर आउट, 93 हजार गेस्ट टीचर की भर्ती पर अचानक रोक, कांग्रेस के 90 विधायकों के इस्तीफे के बाद मंत्री ही सरकार को धमका रहे हैं।

एस पी मित्तल,अजमेर

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुजरात चुनाव में कांग्रेस के सीनियर आब्र्जवर हैं। यानी चुनाव की कमान गहलोत के हाथ में ही है। गहलोत दावा कर रहे हैं कि गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनने पर राजस्थान सरकार का मॉडल लागू किया जाएगा। गहलोत अपनी सरकार पर चाहे जितना गर्व करें, लेकिन पिछले दो माह की घटनाओं को देखा जाए तो राजस्थान में अराजकता का माहौल है। सरकार के मंत्री ही मुख्यमंत्री को चुनौती दे रहे हैं। गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव ने कहा है कि यदि कोटपूतली को जिला नहीं बनाया गया तो वे मंत्री पद के साथ साथ कांग्रेस से ही इस्तीफा दे देंगे। सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि यदि ओबीसी में पूर्व सैनिकों के आरक्षण में कोई बदलाव किया गया तो वे सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। उन्हें चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस की जरुरत नहीं है। वहीं पूर्व मंत्री और पंजाब के प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा है कि यदि ओबीसी में पूर्व सैनिकों के आरक्षण की विसंगति को नहीं सुधारा गया तो सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। चौधरी की मांग है कि पूर्व सैनिकों को उन्हीं की जाति में मेरिट बना आरक्षण दिया जाए। मौजूदा समय में पूर्व सैनिकों को ओबीसी वर्ग में अलग से मेरिट बनाकर आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है। चौधरी ने इस संबंध में सीएम गहलोत की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। एक और कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने आईएएस अधिकारियों की एसीआर भरने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री के अधिकारों को चुनौती दी है। खाचरियावास का कहना है कि एसीआर भरने का अधिकार मुख्यमंत्री के बजाए मंत्रियों को होना चाहिए। खेल मंत्री अशोक चांदना भी सीएम के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। भरत सिंह जैसे विधायक भी मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे है। राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के पेपर आउट होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। 12 नवंबर को ही वनरक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर आउट हो गया। सरकार को मजबूरन इस परीक्षा का पेपर रद्द करना पड़ा है। असल में पेपर लीक को लेकर सरकार ने जो सख्त कानून बनाया उस पर अमल ही नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि कुछ प्रकरणों में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं के रिश्तेदार आरोपी हैं। इसलिए सरकार सख्त कार्यवाही नहीं कर रही है। अशोक गहलोत ही राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, इस मांग को लेकर कांग्रेस के 90 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को इस्तीफे सौंप रखे हैं। यानी राजस्थान के हालात कैसे भी हों, लेकिन सीएम गहलोत को कोई खतरा नहीं है। गहलोत सरकार किस तरह काम कर रही है, इसका अंदाजा 93 हजार गेस्ट टीचर की भर्ती को अचानक स्थगित किए जाने से लगाया जा सकता है। सरकार ढिंढोरा पीट रही थी कि 93 हजार युवाओं को अनुबंध पर नौकरी दी जा रही है। इसके लिए आवेदन भी मांग लिए। नियुक्ति पत्र जारी होता, इससे पहले ही भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। राजस्थान में कानून व्यवस्था का तो बहुत ही बुरा हाल है। 12 नवंबर को उदयपुर के निकट ओड़ा रेल पुल पर जोरदार विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में डायनामाइट का उपयोग किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस विस्फोट के पीछे आतंकी साजिश है। यदि अब आतंकी राजस्थान में वारदात करने में सफल हो रहे हैं तो हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। अशोक गहलोत ने अपने मुख्यमंत्री पद को बचाए रखने के लिए प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को बेहद कमजोर कर रखा है। उच्च पदों पर बैठे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का मकसद भी गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए रखने का है। लोकतंत्र में जनता के नौकर माने जाने वाले अधिकारियों को जनता की कोई चिंता नहीं है। इतनी अराजकता के बाद भी मुख्यमंत्री गहलोत गुजरात में राजस्थान का मॉडल लागू करने की बात कर रहे हैं। 

Ramswaroop Mantri

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