एस पी मित्तल, अजमेऱ
11 फरवरी को जब राजस्थान विधानसभा में रीट परीक्षा के घोटाले को लेकर विपक्षी विधायक हंगामा कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जयपुर स्थित सरकारी आवास पर उन कांग्रेसियों से मुलाकात कर रहे थे, जिन्हें 9 फरवरी को ही राजनीतिक पद प्राप्त हुए हैं। प्रदेश की 58 संस्थाओं में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के तौर पर कांग्रेस के वरिष्ठ और सीएम अशोक गहलोत के समर्थक माने जाने वाले नेताओं को नियुक्तियां दी गई हैं। इनमें 11 विधायक भी शामिल हैं। इन कांग्रेसियों से सीधा संवाद करते हुए गहलोत ने कहा कि 2023 में कांग्रेस सरकार का रिपीट होना जरूरी है। एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की जीत की इस परंपरा को इस बार तोडऩा है। गहलोत ने कहा कि 2013 में जब मैं ही मुख्यमंत्री था, तब अधिकारियों ने कहा था कि कांग्रेस सरकार रिपीट हो रही है, लेकिन कांग्रेस को 200 में से मात्र 21 सीटें मिली। इसलिए इस बार आप लोग यानी नियुक्ति पाने वाले कांग्रेसी नेता सही फीडबैक दें। इसमें कोई दो राय नहीं कि सीएम गहलोत ने अपनी बात बहुत स्पष्ट तरीके से रखी है, क्योंकि जब जब भी अशोक गहलोत मुख्यमंत्री रहे, तब तब चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। लेकिन यह गांधी परिवार का आशीर्वाद और गहलोत की तकदीर रही कि हार के बाद भी अगली बार उन्हीं को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन इस बार गहलोत चाहते हैं कि उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार रिपीट हो, ताकि यह दाग धुल सके कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सरकार कभी रिपीट नहीं हुई। लेकिन सवाल उठता है कि गहलोत के समक्ष सही बात कौन बोलेगा? सब जानते हैं कि ऐसी राजनीतिक नियुक्तियां सरकार के सवा तीन वर्ष पूरे होने पर की गई है। यानी नियुक्तियां पौने दो वर्ष के लिए हैं। इस अल्पावधि में नेता कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाएंगे, यह तो अशोक गहलोत ही जानते हैं। गहलोत अपनी ओर से सरकार के रिपीट होने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की कोई भूमिका नजर नहीं आ रही है। जिन पायलट की मेहनत के दम पर 2018 में कांग्रेस को 100 सीटें मिली उनके बगैर 2023 में सरकार कैसे रिपीट होगी, इसका फार्मूला अशोक गहलोत ही बता सकते हैं। गहलोत माने या नहीं, लेकिन सत्ता विरोधी लहर को समझने के लिए सचिन पायलट से संवाद करना ही पड़ेगा। पायलट की अनदेखी कर कांग्रेस सरकार का रिपीट होना मुश्किल है। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही गहलोत और पायलट के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे। मौजूदा समय में जिस तरह पायलट की अनदेखी हो रही है, उससे पायलट के समर्थक खास कर गुर्जर समुदाय खासा नाराज है।
क्या राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले कांग्रेसी 2023 के चुनाव से पहले सही बात बोल पाएंगे?





