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बजट 2026 में फंड के मामले में मध्य प्रदेश को ‘ठेंगा’, क्या राज्य ने खुद अपने पैरों पर मारी कुल्हाड़ी?

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बजट के बाद अगर किसी राज्य को सबसे तगड़ा झटका लगा है, तो वह मध्य प्रदेश ही है.

संसद में बजट पेश होने के बाद भले ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा खुशी से फूले नहीं समा रहे हों, लेकिन इसकी बड़ी वजह ये है कि सरकार ने अब राज्यों को फंड देने का तरीका बिल्कुल बदल डाला है. पहले सरकार, जो राज्य गरीब और पिछड़ा होता था. उसे ज्यादा पैसे देती थी, लेकिन अब सरकार ने प्रति व्यक्ति जीएसडीपी अंतर को अब भी सबसे ज्यादा वेटेज दिया गया है और आर्थिक कुशलता (Economic Efficiency) को भी जोड़ा है. अब जो राज्य ज्यादा टैक्स कलेक्शन करेंगे और अपने संसाधनों का शानदार तरीके से उपयोग करेंगे. उन पर पैसों की बरसात कर दी जाएगी. इस मामले में मध्य प्रदेश अंतिम पायदान पर पहुंच गया है.

मध्य प्रदेश को हुआ कितना नुकसान?
मध्य प्रदेश आर्थिक रूप से मजबूत राज्य नहीं है, जबकि उसकी आबादी 9 करोड़ से ज्यादा है. इसी वजह से पहले उसे इक्विंटी पिछड़ापन के नाम पर टैक्स पूल से 7.85% की हिस्सेदारी मिलती थी, लेकिन अब 16वें वित्त आयोग के नए फॉर्मूले के तहत यह घटकर 7.35% हो गई है. देखने में भले ही यह गिरावट छोटी दिखाई दे रही हो, लेकिन रुपए में हिमालय की ऊंचाई जितना नुक्सान मध्य प्रदेश को हुआ है. नए फॉर्मूले के तहत MP को 7677 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. वहीं अगले पांच साल तक, हर साल उसे करीब 7500 करोड़ रुपए का बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा.

प्रदेश सरकार की योजनाओं पर पड़ेगा असर
मध्य प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना से पात्र महिलाओं को हर महीने पैसे दिए जाते हैं. साल 2023 में बीजेपी को बहुमत में लाने में इस योजना ने अहम योगदान निभाया था. वहीं प्रदेश सरकार लैपटॉप वितरण योजना, नि: शुल्क साइकिल वितरण योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना भी चलाती है. इसके अलावा प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में भी वित्तीय मदद देती है. अब केंद्र से उसे कम पैसा मिलेगा, जिससे उसके लिए ऐसी योजनाएं चलाना टेढ़ी खीर से कम नहीं होगा. उसके सामने कर्ज बढ़ने का भी संकट सिर उठाए खड़ा हुआ है. अगर मध्य प्रदेश पहले से ही आर्थिक रूप से मजबूत होता, तो उसे ऐसा दिन नहीं देखना पड़ता.

अब क्या कर सकती है MP सरकार?
अब मध्य प्रदेश की सरकार को चाहिए की वह अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग करे और देश की जीडीपी में अहम योगदान दें, जिससे टैक्स हिस्से के बंटबारे में उसके पास बड़ा भाग आए. प्रदेश सरकार को खुद पैसा जुटाना होगा, जिससे खजाने पर असर ना पड़े और कर्ज और वित्तीय दबाव से भी बचा जा सके.

कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी दलित परियोजानाओं में पैसा कम कर दिया गया है. घर-घर मोदी और घर-घर पानी की बात करने वाली सरकार ने जल जीवन मिशन में कटौती कर दी है. कुंभ को लेकर हिंदू धर्म को लेकर बड़ी-बड़ी बाते करते हैं, लेकिन सिंहस्थ को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

मध्य प्रदेश के लिए राहत की है ये बात
ऐसा भी नहीं है कि बजट 2026 में मध्य प्रदेश के हाथ निराशा ही लगी है. केंद्र सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी. ऐसा समझा जा रहा है कि इससे मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों को फायदा पहुंचेगा. इसके अलावा इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हादसों से सबक लेते हुए अब 10,000 ‘महिला अमृत मित्र’ तैनात की जाएंगी, जिससे किसी की भी गंदा पानी से मौत ना हो.

अब क्या कर सकती है MP सरकार?
अब मध्य प्रदेश की सरकार को चाहिए की वह अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग करे और देश की जीडीपी में अहम योगदान दें, जिससे टैक्स हिस्से के बंटबारे में उसके पास बड़ा भाग आए. प्रदेश सरकार को खुद पैसा जुटाना होगा, जिससे खजाने पर असर ना पड़े और कर्ज और वित्तीय दबाव से भी बचा जा सके.

कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि आदिवासी दलित परियोजानाओं में पैसा कम कर दिया गया है. घर-घर मोदी और घर-घर पानी की बात करने वाली सरकार ने जल जीवन मिशन में कटौती कर दी है. कुंभ को लेकर हिंदू धर्म को लेकर बड़ी-बड़ी बाते करते हैं, लेकिन सिंहस्थ को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

मध्य प्रदेश के लिए राहत की है ये बात
ऐसा भी नहीं है कि बजट 2026 में मध्य प्रदेश के हाथ निराशा ही लगी है. केंद्र सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए 12 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगी. ऐसा समझा जा रहा है कि इससे मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों को फायदा पहुंचेगा. इसके अलावा इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हादसों से सबक लेते हुए अब 10,000 ‘महिला अमृत मित्र’ तैनात की जाएंगी, जिससे किसी की भी गंदा पानी से मौत ना हो.

Ramswaroop Mantri

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