शशिकांत गुप्ते
आदिकाल से एक मछली बदनाम हो रही है। यह मछली जल की रानी नहीं है। जो नन्हे मुन्नों के हाथ लगाने से डर जाएगी।ना ही यह पानी से बाहर निकालने पर मर जाएगी।
यह अदृश्य मछली है।यह सिर्फ कहावत में प्रतीक के रूप में प्रयोग की हुई मछली है।
यह मछली अदृश्य होते हुए भी आदिकाल से ही तालाब को गंदा कर रही है।
यह मछली अदृश्य होते हुए सिर्फ कहावत में ही मिलती है।
इस एक मछली की हरकत देखकर सभी प्रजातियों की मछलियां आहत हैं।अन्य मछलियों का मानसिक रूप से आहत होने कारण है कि, यह मछली हम सभी मछलियों को बदनाम कर रही है।
इस मुद्दे पर सभी प्रजातियों की मछलियों ने आपस में स्वयं के सभी मतभेद भुलाते हुए एक संयुक्त सभा आयोजित की।
एक मछली ने तालाब को गंदा करने वाली अदृश्य मछली का विरोध करते हुए सभा में उस मछली के लिए सभा में एक निंदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया। वह मछली निंदा प्रस्ताव का वाचन करना शुरू ही वाली थी,उसी समय एक प्रगतिशील विचारों वाली मछली ने निंदा प्रस्ताव का विरोध करतें हुए अपना वक्तव्य सुनाया।
उस मछली ने अपने वक्तव्य में सिलसिलेवार बिंदुओं को प्रस्तुत किया।
1) यह निंदा प्रस्ताव उस अदृश्य मछली के लिए प्रस्तुत करना ही गलत है।
2) यदि निंदा करनी ही है तो मानवों की करना चाहिए।
3) मानवों ने मानवों पर कटाक्ष करने के लिए सिर्फ हम मछलियों का ही नहीं अन्य प्राणियों को प्रतीक के रूप में उपयोग किया है।
4) मानव जैसा स्वार्थी प्राणी समूचे संसार में कोई अन्य प्राणी नहीं है।
5) जो मानव वातावरण को गंदा करता उस पर व्यंग्य करने के लिए मछली को कहावत के रूप में वापरता है।यह मानव के शोषण करने की प्रवृत्ति का द्योतक है।
6) जो कोई मानव तालाब के मतलब माहौल को गंदा करता है,उस मानव को सीधे सीधे प्रताड़ित करने बजाए,मछली की कहावत बनाकर माहौल को गंदा करने वाले मानव को अप्रत्यक्ष प्रश्रय ही तो देतें हैं।
7) माहौल को गंदा करें मानव और लांछन लगे मछली पर यह बात सभी मछलियों को बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए।
8) अव्वल तो विरोध इस बात का होना चाहिए कि,मानव विशाल समुद्र से पकड़ कर मछली को तालाब रखता ही क्यों हैं?
9) तालाब में पालपोस कर मछलियों को मानव स्वयं का आहार बनाता है? यह भी एक निंदनीय मुद्दा है?
10) मुख्य रूप से निंदा प्रस्ताव मानव के विरुद्ध पारित होना चाहिए।
सभी मछलियों ने मानव के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव का स्वागत करते हुए निंदा प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया।
सभा समाप्ति की घोषणा के पूर्व एक परिपत्र मतलब Circular का वाचन हुआ।
यह परिपत्र सभी पशु,पक्षियों,जीव,जंतुओं, और सभी जलचर प्राणियों को Circulate अर्थात प्रसारित करने की योजना बनाई गई।
इस परिपत्र में मानव को सभी प्राणियों की ओर से एक चेतावनी दी गई। मानव एक दूसरें पर व्यंग्य करने के लिए हम प्राणियों को कहावतों में प्रतीक न बनाएं।
कहावतों में हमें प्रतीक बनाना यह हम सभी प्राणियों की अवहेलना है।
सभी मछलियों का आभार मानते हुए सभा समाप्ति को घोषणा की गई।
मछली एकता जिंदाबाद नारा बुलंद किया गया।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





