नपती कर चिन्हित की थी शासकीय भूमि, रातों-रात लोगो ने कर लिया कब्जा
पेटलावद। प्रशासिनक अधिकारीयो द्वारा शासकीय भूमि ओने-पाने दाम में बेचकर अपने व्यारे-न्यारे करने का पेटलावद में कोई पहला मामला नही है। राजस्व विभाग की मिलीभगत से करोड़ो रूपए की मुख्य मार्ग से लगी भूमि ओर अन्य दूसरी शासकीय भूमि, भूमाफिया को दे दी है। इतना ही नही कई शासकीय सर्वे नम्बर पर बिना किसी प्रकिया के पट्टे भी जारी कर दिए तो कही पटवारी और राजस्व अमले से मिलीभगत शासकीय भूमि पर कब्जे का फर्जी प्रकरण दर्ज कर उस पर रसीद बनाकर उसे कब्जे के मान से मालिक बना दिया है। ये सब खेल चल रहा है पेटलावद राजस्व विभाग में जहॉ आपकी राजस्व विभाग से पटरी बैठ गई तो फिर समझ लो कि जमीनों की रिकॉर्ड में हेरा-फेरी से लेकर सब कुछ संभव है।
पेटलावद राजस्व में शासकीय भूमि में रातों-रात हो गया बड़ा खेल
पेटलावद-बदनावर मार्ग स्टेट हाइवे पर ग्राम करडावद में मॉडल स्कूल के समीप स्टेट हाइवे से लगी करोड़ो की बेशकीमती शासकीय भूमि सर्वे नम्बर 2985 स्थित है। उक्त भूमि कमलेश बम के पेट्रोल पंप से लगी हुई थी जिस पर पेट्रोल पम्प मालिक का दावा था कि, उक्त भूमि उसकी निजी है। मामला मीडिया में आने के बाद एसडीएम और तहसीलदार पेटलावद द्वारा भूमि के सीमांकन के लिए राजस्व दल को भेजा। नपती में पता चला कि, रोड से लगी 116 फीट भूमि सरकारी सर्वे नम्बर 2985 की है, उक्त भूमि से लगा कुछ भाग पम्प मालिक का भी निकला। दल द्वारा सीमांकन के बाद शासकीय भूमि को चिन्हित किया गया। भूमि की नपती मई माह के लगभग की गई थी जिसके बाद से भूमि खाली पड़ी थी। राजस्व विभाग ने उक्त भूमि को अपने आधिपत्य में नही लिया और न ही किसी प्रकार की तारफेन्सिंग की गई, जो कही न कही राजस्व विभाग की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।
शासकीय भूमि पर रातों-रात हुआ कब्जा
विगत दिनों उक्त शासकीय भूमि पर ग्राम पंचायत करडावद के कुछ लोगो ने रातों-रात कब्जा कर लिया। जिसकी जानकारी मीडिया को मिली तो इस संबंध में पूछे गए सवालों पर पटवारी सहित पूरे राजस्व अमले को मानो साँप सूंघ गया और इस सम्बंध में कोई जानकारी नही होने और मामला दिखवाने की बात करने लगे। अतिक्रमणकार्ताओ ने केवल शासकीय भूमि ही नही बल्कि उससे लगी पम्प मालिक की निजी भूमि पर अतिक्रमण कर तंबू तान दिए, जिसे भूमि स्वामी की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मौके से हटाया लेकिन शासकीय भूमि पर किए कब्जे को नही हटाया गया।
पट्टे होने की बात आ रही सामने, पट्टे के नाम पर बड़ा खेल होने की आशंका
शासकीय भूमि पर कब्जे की बात सामने आने के बाद मामले की जानकारी हल्का पटवारी चंद्रावत से ली। लेकिन इस बारे में पहले तो कोई जानकारी नही होने की बात कही ओर जानकारी निकाल कर बताने की बात कही। दूसरी बार मे पटवारी द्वारा बताया गया कि, अतिक्रमणकार्ताओ के पास वर्ष 2018 के पट्टे होने की बात सामने आ रही है जिसकी जांच की जा रही।
वर्तमान में झाबुआ में 123 पट्टे वितरण में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हुआ है, यहां भी कुछ ऐसा ही बड़ा खुलासा पट्टे के खेल का हो सकता है। उक्त भूमि पर वर्षो से पम्प मालिक अपना अधिकार होना बता रहा था, तो उक्त भूमि को शासकीय मद में होने से मॉडल स्कूल के बच्चों के लिए विधायक निधि से बस स्टेशन स्वीकृत किया गया था लेकिन निर्माण नही हो सका।
जानकारी अनुसार उक्त भूमि पर पट्टे दिए गए है लेकिन किसी पट्टेधारी ने उक्त भूमि पर कब्जा नही किया। राजस्व अमले द्वारा सीमांकन के समय किसी भी पट्टाधारक ने मौके पर आकर पट्टा पेश नही किया, जिससे पट्टे का पूरा खेल फर्जी होना लग रहा है।
राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नही एक भी पट्टा
सीमांकन के दौरान राजस्व विभाग ने उक्त भूमि को पूरी तरह से शासकीय घोषित कर सीमा निर्धारित की थी। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पिछले चार माह पूर्व उक्त सर्वे नम्बर पर कोई पट्टा दर्ज नही था लेकिन अब वर्ष 2018 में पट्टे जारी होने की बात सामने आ रही है, जिसमे तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार ओर पटवारी की भूमिक संदिग्ध हो सकती है, जिन्होंने बिना किसी खानापूर्ति की पट्टे जारी किए होंगे। फिलहाल गूंज के पास कोई शासकीय पट्टा हाथ नही लगा है, ग्राम पंचायत के पास भी इस संबंध में कोई जानकारी नही है लेकिन पटवारी ने भूमि पर पट्टे होने की बात स्वीकार की है। पूरे मामले में राजस्व विभाग की क्या भूमिका रहती है ये देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि जिस शासकीय भूमि की बात की जा रही है वो वर्तमान में करोड़ो की लागत की है और ऐसे मामले के सामने आने के बाद शासकीय भूमि पर नजर रखने वाले बड़े भूमाफिया भी उक्त भूमि को हथियाने के उद्देश्य से अपनी तिजोरी का मुंह राजस्व अमले के सामने खोलकर जमीन हड़पने की कोशिश करेंगे ये तय है।
पूर्व में की गई राजस्व विभाग द्वारा नपती जिसमें सर्वे न. 2985 शासकीय मद की निकली।
तम्बू तान दिए रात में कब्जाधारियों ने महिलाओं को किया आगे।
मौके पर जांच करता राजस्व अमला।






