नई दिल्ली. दिल्ली के बाजार इस बार दिवाली पर रोशनी ही नहीं, बल्कि रिकॉर्ड तोड़ बिक्री से भी जगमगाने वाले हैं. कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि इस त्योहारी सीजन में राजधानी में करीब 75,000 करोड़ रुपये का कारोबार होगा. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है.
उपभोक्ताओं का रुझान ‘लोकल’ की ओर
कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर साफ नजर आ रहा है. लोग अब स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं और बाजार भारतीय सामानों से भरे पड़े हैं. कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान से लेकर सजावटी वस्तुओं तक, हर जगह भारतीय ब्रांड्स की पकड़ मजबूत हो चुकी है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार चीनी सामान बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं.
बदलता उपभोक्ता व्यवहार
कैट द्वारा किए गए सर्वे में यह सामने आया है कि उपभोक्ता अब विदेशी की बजाय भारतीय वस्तुओं पर भरोसा कर रहे हैं. खासकर दिवाली की सजावट और पूजा से जुड़े सामान स्थानीय स्तर पर तैयार हो रहे हैं. खंडेलवाल का कहना है कि 2020 की गलवान घटना के बाद से ही लोगों में चीनी उत्पादों को छोड़कर स्वदेशी वस्तुएं खरीदने का रुझान लगातार बढ़ा है. यही वजह है कि इस बार दिवाली देश की आर्थिक मजबूती का भी प्रतीक बनने जा रही है.
देशभर में 4.75 लाख करोड़ का कारोबार संभव
कैट का अनुमान है कि दिल्ली की तरह देशभर के बाजार भी इस बार ऐतिहासिक बिक्री दर्ज करेंगे. पूरे भारत में त्योहारी सीजन का कुल कारोबार 4.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने की उम्मीद है. यह भारतीय खुदरा अर्थव्यवस्था के लिए नया रिकॉर्ड साबित होगा. खंडेलवाल ने कहा कि इस दिवाली पर खर्च किया गया हर रुपया न केवल उपभोक्ताओं की खुशी बढ़ाएगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, कारीगरों और स्थानीय व्यापारियों को भी मजबूती देगा.





