-निर्मल कुमार शर्मा,
कितने आश्चर्य, दुःख और क्षुब्ध करनेवाली बात है कि जिन अन्नदाताओं द्वारा भारी मेहनत और श्रम से उगाए गये अन्न को एक गरीब से लेकर,अमीर,बड़े अफसर,भारतीय सेना,व्यापारी, कथित अर्थशास्त्री,जिला से लेकर उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश,सत्ता व विपक्ष का बड़े से बड़ा कर्णधार भी खाता है,लेकिन उन्हीं अन्नदाताओं द्वारा उपजाई गई फसल की सही और जायज कीमत की मांंग पर,जिससे वह,उसका परिवार,उसके बच्चे भी ठीक से अपना जीवनयापन कर सकें,को न देने की बेशर्म और निर्लज्ज अड़ियल रवैया न्यायालयों के जज से लेकर सत्ताधारी वर्ग के गुँडे नेता तक अड़े हुए हैं ! इस समूचे देश के बेशर्म,दरिंदे,आततायी, असहिष्णु,अमानवीय सत्ताधारियों सहित इस देश की अरबों जनता को भूख से मुक्ति दिलाने वाले अन्नदाताओं को बदनाम करने के लिए सत्ताधारियों और सत्ताप्रायोजित चमची और भांड़ मिडिया द्वारा क्या-क्या अपमानजनक, गालीगलौज,अमर्यादित और अश्लील शब्दों यथा आतंकवादी,पाकिस्तान परस्त,विपक्ष द्वारा प्रायोजित कुछ मुठ्ठी भर किसान,किसान ही नहीं हैं आदि-आदि शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उनके आंदोलन को समाप्त करने के लिए ऐसे-ऐसे हथकंडे अपनाए गए,जिसे किसी भी दृष्टिकोण से लोकतांत्रिक,संसदीय या संवैधानिक नहीं कहा जा सकता मसलन ठंड के दिनों में उन पर बेहद ठंडी,बदबूदार पानी का छिड़काव करना, उनके रास्ते में कंटीले तार बिछाना,नुकीली कीलें ठोकना,उनके तंबुओं में आग लगाना,उनको सीधे गोली मारना आदि-आदि सभी तरह के अमानवीय कुकृत्य किए गए,तब भी भारतीय अन्नदाता अपनी जायज,न्यायसम्मत मांग पर पिछले 11 महिनों से कर्मठता से डटे हुए हैं,लेकिन 3-10-2021 को इस देश के केन्द्र में सत्तारूढ़ दल के सत्ता के फॉसिस्ट,क्रूर,दंगाई दुश्चरित्र वाले कर्णधारों के इशारों पर कुछ बीजेपी के गुँडे लखीमपुर खीरी के तिकोनिया इलाके में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के खिलाफ सड़क के किनारे भारतीय अन्नदाताओं के साथ जो उसे काले झंडे दिखाने के लिए सड़क के किनारे पटरी पर खड़े थे,जो मनुष्येत्तर, घिनौना व नरपैशाचिक कुकृत्य किए हैं उसके सामने इस दुनिया में अभी तक पैदा हुए क्रूरतम् से क्रूरतम् तानाशाह यथा बेनिटो मुसोलिनी और अडोल्फ हिटलर द्वारा की गईं उनकी काली करतूतें भी शर्मा जाएंगी ! प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदर्शन कर रहे भारतीय अन्नदाताओं पर वर्तमान समय में केन्द्र में सत्तारूढ़ सरकार में गृहराज्यमंत्री के पद पर आसीन एक आदमी के गुँडे और अपराधिक प्रवृत्ति के कुपुत्र ने अपनी कारों के काफिले की दो कारों को अचानक पीछे से चढ़ा दिया है,जिससे 8 किसानों की घटनास्थल पर ही दुःखद मौत हो गई है,उससे उत्तेजित और आक्रोशित किसानों ने भी उन दोनों कारों को आग के हवाले कर दिया है और उन कारों में सवार 4 गुँडों को पीट-पीटकर मार डाला है !

यह अतिदुःखद,बेहद शर्मनाक,हतप्रभ कर देने वाले व कथित वर्तमान समय के पदासीन भारतीय सत्ता के कथित लोकतांत्रिक, संवैधानिक व कथित रामराज के सब्जबाग, सपने और जुमलेबाजी के मुँह पर कालिख पोतने वाली घटना की पृष्ठभूमि और पटकथा पिछले कुछ महीनों से रची और बुनी जा रही है उदाहरणार्थ हरियाणा का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि का शातिर व क्रूर मुख्यमंत्री अभी पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुँडों की एक सभा में उन्हें सलाह देते हुए एक सार्वजनिक बयान दिया था कि इन धरना-प्रदर्शन करने वाले किसानों को सबक सिखाने के लिए हरेक गाँव में 500-700-1000 के हथियार बंद लोगों के ग्रुप बनाओ और इन प्रदर्शनकारी किसानों को जैसे के तैसा या शठे शाठ्ये समाचरेत् वाली भाषा में जबाब दो का उपदेश देता एक विडिओ सोशल मिडिया पर वायरल हुई है, इसी प्रकार जिस गृहराज्य मंत्री के बेटे पर भारतीय अन्नदाताओं पर अपने दल-बल के साथ पीछे से कार चढ़ाने का आरोप है वह मंत्री खुद कुछ दिनों पूर्व एक सार्वजनिक सभा में आंदोलनकारी किसानों को धमकी देते हुए कहा है कि ‘मैं ऐसे लोगों को कहना चाहता हूँ कि सुधर जाओ,नहीं तो सामने आकर मुकाबला करों,वरना सुधारने में सिर्फ दो मिनट लगेंगे ! ‘अभी पिछले दिनों सुप्रीमकोर्ट के दो जजों ने सत्तारूढ़ सरकार द्वारा प्रायोजित एक किसान संगठन द्वारा जंतरमंतर या वोटक्लब पर अपना धरना-प्रदर्शन करने की माँग की याचिका की सुनवाई पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘आपने पूरे शहर को पंगु बना दिया है, पूरे शहर का गला घोंट दिया है, अब आप शहर के भीतर आना चाहते हैं,प्रदर्शन जारी रखने का क्या औचित्य है,जब वह कृषि कानूनों को चुनौती देने के लिए पहले ही न्यायालय में याचिका दायर कर चुके हैं,इस देश के नागरिकों को बिना डर के स्वतंत्रता से घूमने का अधिकार है और कुछ संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए, आसपास के निवासी क्या आपके विरोध से खुश हैं ? ये बंद होना चाहिए, आप सुरक्षा और सुरक्षाकर्मियों के काम में व्यवधान पैदा कर रहे हैं। ‘
उक्त तरह के उदाहरणों से यह परिलक्षित और साबित नहीं हो रहा है कि भारतीय अन्नदाताओं के खिलाफ एक सुनियोजित, सुचिंतित व व्यवस्थित रूप से कुछ अमानवीय और क्रूर ताकतें एक संगठित अभियान छेड़ रखीं हैं। हम सुप्रीमकोर्ट के जजों की भारतीय अन्नदाताओं को दी गई उक्तवर्णित इस अनर्गल, व्यर्थ व अशोभनीय आदेश या नसीहत पर यह टिप्पणी करना चाहते हैं कि क्या सुप्रीमकोर्ट में किसी समस्या पर मात्र याचिका दाखिल कर देने से केस निबट जाता है ?इस तरह की लाखों याचिकाएं बगैर सुनवाई के सुप्रीमकोर्ट में ही वर्षों से धूल फाँक रहीं हैं ! जहाँ तक इस देश के नागरिकों को बिना डर के स्वतंत्रता से कहीं भी घूमने का अधिकार है,क्या दिल्ली की सीमाओं को भारतीय अन्नदाताओं ने रोक रखा है ?इस शहर का गला घोंट रखा है ? कतई नहीं, यह काम तो दिल्ली पुलिस, जिसके आका गृहमंत्री भारत सरकार है,उसने घोंट रखा है,तो ये आदेश या नसीहत तो इस देश के तड़ीपार गृहमंत्री के लिए होनी चाहिए थी ! सुप्रीमकोर्ट के कथित विद्वान न्यायाधीशों को इस देश के नागरिकों को बिना डर के स्वतंत्रता से कहीं भी घूमने के अधिकार की बड़ी चिंता सताए जा रही है,लेकिन इसी देश में भारतीय अन्नदाताओं को उनकी फसलों की स्वामीनाथन आयोग के अनुसार उचित कीमत नहीं मिलने से पिछले दो-तीन दशकों में चार लाख अन्नदाताओं की खुदकुशी करने से उनका एक रोम तक नहीं सिहरता,न उनकी चेतना जगती है !इसी प्रकार पिछले 44सालों में आज सर्वोच्च बेरोजगारी का दंश झेलते 12 करोड़ बेरोजगारों के प्रति और हर आधे घंटे पर उनकी आत्महत्या की भयावहतम् तस्वीर भी उनकी अंतर आत्मा को नहीं झंकझोरती ! न उनका स्वतः विवेक जगता !
आज से ठीक 2449 वर्ष पूर्व जन्मे रोमन दार्शनिक प्लेटो के इस कथन कि ‘जब किसी देश के सभ्य,शिक्षित व जागरूक लोग राजनीति में रूचि लेना कम कर देते हैं,बन्द कर देते हैं या उसके प्रति उदासीन हो जाते है,तब उस देश की सत्ता पर कुछ अपराधिक व संदिग्ध चरित्र वाले अपराधी कब्जा कर लेते हैं. ‘आज भारत में ठीक वही स्थिति पैदा हो गई है,आज इस देश की सत्ता पर दंगाई, मॉफिया,बलात्कारी, अपराधी प्रवृत्ति के अवगुणों वाले कुछेक व्यक्तियों और गुटों का पूर्णतः कब्जा हो गया है ! इन दुष्टों और अपराधी तत्वों को जितनी जल्दी हो संगठित होकर यहाँ की सत्ता से उन्हें जबरन बेदखल करने से ही ये दिल्ली,करनाल और लखीमपुर खीरी जैसी दुःखी व क्षुब्ध करने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी ! केवल अपने-अपने ड्राइंग रूम में छाती पीटने और व्यर्थ के हुँकार भरने से कुछ भी नहीं होगा,इसके लिए संसद के अलावे हर सड़क,हर गली,हर गली,हर नुक्कड़,हर गाँव में संगठित, सशक्त होकर इन भेड़ की खाल ओढ़े भेड़ियों की असलियत बतानी ही होगी नहीं तो यह भेड़िया उन्हीं पीड़ित और प्रताड़ित खुदकुशी करते आंदोलनरत अन्नदाताओं द्वारा उपजाए 5 किलो गेहूँ या चावल 80 करोड़ भूखमरी के कगार पर खड़े गरीबों को बाँटने के प्रहसन से उसी प्रहसन के बल पर 80 करोड़ गरीबी से अभिशापित परन्तु 5 किलो अनाज से उपकृत लोगों के वोटों के बल पर 2024 का चुनाव भी जीत सकता है ! और यह हर्गिज नहीं होने देना है ! इस पर भी रणनीति बननी चाहिए और सोचा जाना चाहिए !
-निर्मल कुमार शर्मा,
‘गौरैया एवंम् पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, राजनैतिक,सामाजिक,आर्थिक,अंधविश्वास व पाखंड के खिलाफ,सशक्त,निष्पृह,बेखौफ व स्वतंत्र लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,





