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अनिद्रा और डिप्रेशन सरीखे मानसिक रोगों से मुक्ति क़े लिए :योग~निद्रा ध्यान

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 (मनोचिकित्सक- ध्यानप्रशिक्षक डॉ. विकास मानवश्री के प्रयोग पर आधारित अनुभूत पाथेय)     

    *~ आरती शर्मा (बोधगया)*
      _नींद निसर्ग का नायाब वरदान है. यह थके-हारे मनुष्य को अपनी गोद में लेकर आराम पहुंचाती है। यदि नींद को समाधि का बेस बनाया जाए, तो गहरी नींद हमें हम तक ले जाकर स्वस्थ और आनंदित कर सकती है।_      योग निद्रा का अभ्यास करने से रात्रि में समाधि यानी अद्वैत का आनंद और दिन में सतत-सहज ध्यान का आनंदरस जीवन को सहज पुलकित करता है।
   योग निद्रा के लिए अपने शयनकक्ष में ख़ुद को पूरा शरीर ढीला छोड़ते हुए आराम से सीधे लेट जाएं। निर्वस्त्र रहें तो ज्यादा बेहतर. आंत और मात साफ हो. यानी पेट मल-गैस ने नहीं भरा हो और दिमाग़ दुर्विचारों से नहीं भरा हो. 

  बॉडी को रिलैक्स करने के लिए कुछ समय तक गहरी लम्बे सांस लें और छोड़ें। शरीर के एक-एक अंग को मन की आंखों से देखें. मन ही मन शांत होते हुए, अपने को शिथिल करते जाएं।    इस क्रिया को सिर से प्रारम्भ करें और पैरों तक जाएं और फिर पैरों से वापस सिर तक लौटें।   

 _सीधे लेटे हुए मन को अपनी नाभि में केन्द्रित कर लें या पेडू क़े नीचे जननेंद्रीय पर. भाव बनाएं कि उदर-मण्डल, हथेलियां, कंठ, सब ऊर्जा से भर रहे हैं। मुखमण्डल और सिर के ऊपरी भाग से ध्यान ऊर्जा अंदर प्रवेश कर रही है। महसूस करें  : ब्रह्माण्ड से या कीसी को सिद्दत से प्रेम करते हैं तो उससे एनर्जी की बारिश हो रही है. मेरी रगरग को सिहरन से युक्त कर रही है. मैं इसमें पूर्णतया भींगकर आह्लादित अनुभव कर रहा/रही हूं।_   

आनंदित होने का अर्थ है आप परमानन्द यानी ईश्वर से जुड़ चुके हैं। यही समय है उस परम प्रिय से मन की बात करने का।
   इसी क्षण प्रार्थना का बीज बो दीजिए. अपनी एकमात्र इच्छा यानी अभीप्सा प्रकट कर दीजिए. उस इच्छा को पूरा होते हुए दृश्यात्मक अनुभव कीजिए।

    _भाव कीजिये : आप एक चुम्बकीय शक्ति से युक्त हैं. ब्रह्माण्ड से अपनी इच्छित वस्तु को अपनी ओर खींच रहे हैं. आपकी झोली भर रही है. कृतज्ञता से आपकी अश्रुधारा बहकर आपके प्रेमपात्र या ईश्वर के चरण पखारने लगी है।_ 

   फिर सांसों पर मन को केन्द्रित कीजिये.  यूं ही स्थिर रहिए। गहरी नींद आ जाएगी. जब आप प्रातःकाल जागेंगे तो मन में बहुत आह्लादित, आनंदित अनुभव होगा. लगेगा कहीं की दिव्य यात्रा से वापस लौटकर वापस आएं हैं। 

  _इस प्रयोग को शुरू करके देखिए. अगर आप 40 दिन नियमित कर सके तो आप जो हैं, वो नहीं रह जायेंगे. याद रखें :योगनिद्रा क़े इस ध्यान में आपका जितना गहन भाव होगा, निद्रा उतनी ही दिव्य बनेगी। आप व्हाट्सप्प 9997741245 पर समय लेकर, यह प्रयोग हमसे भी सीख सकते हैं – बिना कुछ दिए._     *🎇चेतना विकास मिशन* :

Ramswaroop Mantri

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