अग्नि आलोक
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तू ज़िदा है तू ज़िन्दगी की जीत पर यकीन कर ….!

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सुसंस्कृति परिहार   

         गीतकार शैलेन्द्र के गीत की ये प्रारंभिक पंक्तियां मनुष्य के अंधेरे वक्त में उम्मीद की रोशनी भर देती हैं । बहुत ख़ुशी होती जब इस दहशतज़दा वक्त में इक्का दुक्का ख़बरें हमारा मनोबल बढ़ाती हैं हमें जगाती हैं और बताती हैं तू ज़िदा है ।तू ज़िंदगी की जीत में यकीन कर । पिछले दिनों जब रवीश की विश्वसनीयता पर अदालत की मुहर लगी तो लगा हमें ऐसे वक्त में भी निराश होने की ज़रूरत नहीं है एनडीटीवी के रवीश कुमार और उनके लाखों करोड़ों चाहने वालों के लिए ये दिन गर्व का दिन है। आज उन्हें मैगसेसे पुरस्कार से भी बड़ा पुरस्कार मिला है और वो है विश्वसनीयता का तमगा। जब दिल्ली हाईकोर्ट ने एनडीटीवी के एक वीडियो के आधार पर दिल्ली दंगों के आरोप में एक साल से जेल में बंद तीन लोगों को ज़मानत दे दी है।

 राममनोहर लोहिया इस दौर में बहुत याद आते हैं  वे कहते थे- कि परिवर्तन लोकतंत्र की बुनियाद है और जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं। समय का मिजाज ही कुछ ऐसा मिला जुला था कि यह सारे विचार गांधी वादी और मार्क्सवादी- दोनों ही खेमों में गूंजते थे।आज देश में चल रहे किसान आंदोलन में जिस तरह मज़दूर, बेरोजगार एकजुट हो रहे हैं वे यह ताकीद करते हैं कि वे सब ज़िदा हैं और ज़िन्दगी की जीत में यकीन रखते हैं । 

एनडीटीवी के वीडियो में दिखाया गया था कि तीनों आरोपी घटना के वक्त वहां नहीं थे, जहां का दावा पुलिस कर रही है, बल्कि उस समय वे किसी और जगह पर मौजूद थे। दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय से यह दिलासा भी मिलता है कि लोकतंत्र अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और बहुत कुछ है जो सरकारी नियंत्रण से परे है।  टूलकिट मामले की आरोपी  पर्यावरण कार्यकर्ता् दिशा रवि को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है. उन्‍हें एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत मिली है. दिशा की पुलिस ने 4 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी. दिल्‍ली की कोर्ट से जमानत मिलने के कुछ घंटों बाद मंगलवार देर रात दिशा रवि को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया. गौरतलब है कि इससे पहले, सोमवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने दिशा रवि को एक और दिन की पुलिस कस्टडी  में भेजने का आदेश दिया था. दिल्ली पुलिस ने 5 दिन की पुलिस कस्टडी मांगी थी. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने जमानत पर सुनवाई के दौरान कहा, ‘रिकॉर्ड में कम और अधूरे सबूतों को ध्यान में रखते हुए मुझे 22 वर्षीय लड़की जिसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, को जमानत के नियम को तोड़ने के लिए कोई भी ठोस कारण नहीं मिल रहा है.’ इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने दिल्ली पुलिस के उस आवेदन का निस्तारण कर दिया, जिसमें पुलिस ने दिशा रवि की कस्टडी को चार दिन और बढ़ाने की मांग की थी.

   अब  देश के लोगों को जो लोकतंत्र के वास्तविक हिमायती हैं उन्हें इस महत्वपूर्ण विषय ,सत्ता के  दुरूपयोग पर विचार करने को मजबूर करती है ।कन्हैया कुमार से लेकर दिशा रवि तक सारे प्रकरणों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट है कि जिस भी युवा ने इस सरकार के खिलाफ आवाज उठाई या किसी  सरकार के खिलाफ किसी अन्य आंदोलन का समर्थन किया उसे देशद्रोह के कानून की सजा निर्दोष साबित होने से पहले ही झेलना है ।अगर पुलिस के पास पुख्ता सबूत यदि है तो चार्जशीट पेश होने में वर्षों केसे लग रहे हैं ।साफ है पहले गिरफ्तार किया जा रहा है सबूत उसके बाद बनाए जा रहे हैं या एकत्रित किए जा रहे हैं ।    क्षक्ष क्षइस काम में आधुनिक विकसित टेक्नोलॉजी सबसे सहायक हो रही है । आप किसी मोबाइल या लेपटॉप में हैक करके कुछ भी मेटिरियल डाल सकते हैं । क्लोनिंग कर हजारों हस्ताक्षर सहित पत्र से लेकर कुछ भी आसानी से तैयार कर सकते हैं ।  पिछले दिनों मिमिक्री आर्टिस्ट श्याम रंगीला पर  भी एफ आई दर्ज हो गई.. 
अब देश मे महंगाई (पैट्रोल) पर मज़ाक भी नहीं कर सकते देश के युवा ।देखना है उन पर किस तरह का जुर्म कायम होता है।कितनों पर राजद्रोह जैसे संगीन मामले चल रहे हैं । किसान आंदोलन के साथियों के साथ भी यही व्यवहार चल रहा है ।  

      पिछले दिनों एक और महत्वपूर्ण ख़बर आई कि कवि समाजिक कार्यकर्ता वारवरा राव को भीमा कोरेगांव मामले  के कथित आरोपी  को बाम्बे हाईकोर्ट मेडिकल आधार पर जमानत दे दी है। आरोपी वरवारा राव को ये जमानत इस शर्त पर दी गई है कि वह मुंबई से बाहर नहीं जाएंगे और जब भी जांच के लिए बुलाया जाए उन्‍हें उपस्थित होना पड़ेगा। बता दें कि भीमा-कोरेगांव मामले में राव उन पांच आरोपियों में से एक हैं, जिन्हें नक्‍सलियों के साथ संबंध होने के चलते गिरफ्तार किया गया था। कहा जाता है कि पुणे के शनिवारवाडा में एल्गार परिषद कॉन्क्लेव में कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषण दिए गए थे।

पुलिस का दावा है कि इन भाषणों के बाद ही कोरेगांव भीमा वॉर मेमोरियल के पास अगले दिन दंगे भड़क उठे थे। पुलिस ने माना कि इसके लिए एल्गार परिषद में मानवाधिकार कार्यकर्याओं के भाषण जिम्मेदार थे। बाद में गिरफ्तार लोगों को अर्बन नक्सल बताकर उन पर प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश का आरोप भी लगा दिया गया। इनमें हैदराबाद के वरवरा राव, दिल्ली के गौतम नौलखा, फरीदाबाद की सुधा भारद्वाज,रांची के स्टीन स्वामी,ठाणे के अरुण फरेराऔर मुंबई के वारनान गोंजाल्विस ये पांच नाम प्रमुख हैं। इये तमाम कार्यकर्ता इस वक्त जेल में हैं । उन पर आरोप सिद्ध हो पायेंगे या नहीं लेकिन फिलहाल जिस हाल में वे हैं वह त्रासद है । उनके लिए बकौल शैलेन्द्र यही कहा जा सकता है


    ये ग़म के और चार दिन,

       सितम के और चार दिन 

   ये दिन भी जाएंगे गुज़र,  

     गुज़र गए हज़ार दिन

 राममनोहर लोहिया इस दौर में बहुत याद आते हैं  वे कहते थे- कि परिवर्तन लोकतंत्र की बुनियाद है और जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं। समय का मिजाज ही कुछ ऐसा मिला जुला था कि यह सारे विचार गांधी वादी और मार्क्सवादी- दोनों ही खेमों में गूंजते थे।आज देश में चल रहे किसान आंदोलन में जिस तरह मज़दूर, बेरोजगार एकजुट हो रहे हैं वे यह ताकीद करते हैं कि वे सब ज़िदा हैं और ज़िन्दगी की जीत में यकीन रखते हैं । 

Ramswaroop Mantri

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