आइए मिलकर गायें….
तिलक लगाने तुम्हें जवानों, क्रांति द्वार पर आई है।
दिल्ली की भारत-सरकार है जो,
वह सरकार तो अब बौराई है।।
-रघु ठाकुर
श्री सर्वेश मिश्रा बहादुर माता-पिता का बेटा है और बहादुर साथी संजय सिंह का सहयोगी है ।सर्वेश को भयभीत करने के लिए और ना केवल सर्वेश को बल्कि संजय सिंह के तीनों सहयोगीयों श्री सर्वेशमिश्रा, श्री अजीत त्यागी और श्री विवेक को, भयभीत करने के लिए, भारत सरकार ने पिछले दिनों ईडी का इस्तेमाल किया ।
जब पिछले दिनों खुद ईडी लिखकर श्री संजय सिंह से खेद व्यक्त कर चुकी है कि उसने गलती से उनका नाम दिया था तो फिर, संजय के सहयोगियों को परेशान करना, अपमानित करना, उन्हें तकलीफ देना इसका उद्देश्य क्या है??
एक दिन अचानक सुबह ईडी वाले श्री सर्वेश मिश्रा के घर पहुंचे। उनके घर 10 घंटे रहे। उनके मोबाइल ले लिए।उनके मोबाइलों के डाटा की प्रति उन्हें नहीं दी और 2 दिन के बाद तक मोबाइल वापस नहीं किए। प्रश्न उठता है की इस कार्रवाई का लक्ष्य व औचित्य क्या है??जब स्वत: ईडी श्री संजय सिंह से खेद व्यक्त कर चुकी है, तो फिर, उनके सहयोगियों को परेशान करने का उद्देश्य क्या है??
दरअसल ईडी अब लोगों को बताना चाहती है कि श्री संजय सिंह का तो हम कुछ नहीं बिगाड़ सकते परंतु जो उनके सहयोगी हैं उन्हें हम समाज में अपमानित करने के लिए, झूठ फैलाने के लिए और परेशान करके, उन्हें निराश करने के लिए, काम कर सकते हैं। मुझे खुशी इस बात की हुई कि जब ईडी वाले सर्वेश जी के घर पर आये, उस समय सर्वेश जी के माता और पिता दोनों घर में थे। उनके पिताजी गंभीर अस्वस्थ हैं उनका इलाज चल रहा है और वे इलाज कराने नई दिल्ली आए थे।परंतु ईडी की इस कार्रवाई से वे र्ंच मात्र भी विचलित नहीं हुए। उनकी मां ने खाना बनाया और नियमित पूजा-पाठ किया और उनके पिताजी भी अपना काम करते रहे। तथा बगैर एक शब्द कहे या पूछे खा पीकर सो गए।
यही बहादुरी श्री अजीत त्यागी के माताजी पिताजी ने भी प्रदर्शित की। वहां तो ईडी उन्हें साथ भी ले गईं थी।
धन्य हैं, वे माता पिता, जिन्होंने सत्ता के इस ईडी-आतंकवाद को, बच्चों के खेल जैसा, नजरदाज कर दिया।
मैं, भारत के प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जी आप आपात काल में जेल में नहीं रहे परंतु, हम लोग जेल में रहे हैं। हम आपको यह कहना चाहते हैं कि आपकी जो कार्यवाही है, वह, कुछ मामलों में आपातकाल से भी गंदी और असंवैधानिक है ।मुझे याद है कि आपातकाल के दिनों में ब्रिटेन में एक घटना हुई थी जिसे स्वर्गीय हरि विष्णु कामथ जी ने अपने पत्र के माध्यम से सारे देश में पहुंचाया था।वह थी कि- “ब्रिटेन के एक सांसद से मिलने के लिए एक व्यक्ति, जिसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज थी, आया था। पुलिस ने सांसद के घर के सामने से ही उसे गिरफ्तार किया।” इस पर से संसद सदस्य ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति की कि भले ही व्यक्ति अपराधी हो सकता है परंतु एक मतदाता के नाते उसे अपने जन प्रतिनिधि से अपनी बात कहने का अधिकार है तथा उसे गिरफ्तार करना सांसद के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री व गृह मंत्री ने इस पर खेद व्यक्त किया था।
प्रधानमंत्री जी क्या आप इस घटना को याद करेंगे??
और दूसरी बात कि आपातकाल में हम लोग जेल में लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के जिस क्रांतिकारी गीत को गाते थे उसकी एक पंक्ति थी-
“सत्ता तो बोराई है “
मुझे लग रहा है कि आज फिर वह समय आया है जब लगता है कि हिंदुस्तान की सत्ता बौरा गई है और पतन की ओर बढ़ रही है ।
मैं, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी का संरक्षक होने के नाते, आपसे कहना चाहता हूं कि -“आपकी इन घटनाओं से कोई भयभीत होने वाला नहीं है।”
अंततः आपको ही इनका खामियाजा उठाना होगा। आपको अपने समर्थकों को खोना पड़ेगा। क्योंकि ऐसी घटनाओं का समर्थन कोई भी व्यक्ति या संविधान में विश्वास करने वाला नहीं करेगा ।
आपने कर्नाटक चुनाव में जिस प्रकार सांप्रदायिक कार्ड खेला और बजरंगबली के नाम का इस्तेमाल किया उसका सटीक उत्तर वहां की जनता ने आपको दे दिया है।
प्रधानमंत्री जी आपने भरी सभा में बोला था कि-” वोट देने के बाद बजरंग बली की जय बोल देना।”
जनता समझदार है और उसने आपके खिलाफ वोट देकर बजरंग बली की जय बोली। इसलिए कि आप बजरंगबली का इस्तेमाल अपनी छोटी सी सियासत और सत्ता के लिए कर रहे थे। जनता किसी की गुलाम नहीं है।एक कहावत है कि-
दारा रहा न जम सिकंदर सा बादशाह।
तख्ते जमीन पर सैकड़ों आये चले गए।
रघु ठाकुर
संरक्षक
लोक्तांत्रिक समाजवादी पार्टी





