इंदौर के महू में पहले आदिवासी युवती की मौत पर जमकर बवाल हुआ। इस दौरान पुलिस की गोली से एक आदिवासी युवक की मौत हो गई। इसे लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। CM शिवराज सिंह ने महू की घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। वहीं पूर्व सीएम कमलनाथ ने इस घटना के बहाने सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जंगल राज है। कांग्रेस विधायक दल ने मौके पर पहुंचकर मृतक युवक के परिजनों से मुलाकात की है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं करने की नसीहत दी है।
दरअसल, महू में बुधवार रात एक आदिवासी युवती की मौत पर उसके परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया। परिजनों ने आरोप लगाए कि दबंगों ने गैंगरेप के बाद लड़की की हत्या कर दी। गुस्साए लोगों ने पुलिस चौकी पर पथराव कर दिया। पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। लाठीचार्ज किया। करीब 25 हवाई फायर भी किए।
इसी बवाल में पुलिस फायरिंग में एक आदिवासी युवक की मौत हो गई। एक अन्य युवक के पैर में गोली लगी है। आईजी आर. गुप्ता ने कहा- पुलिस ने सेल्फ डिफेंस में गोली चलाई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में 12 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। बडगोंदा थाना प्रभारी भरत सिंह ठाकुर गंभीर रूप से घायल हैं। उनकी आंख में चोटी लगी है।

प्रदर्शनकारियों ने रात में वाहनों में भी तोड़फोड़ की।
महू पुलिस ने बताया कि जिस युवक की मौत हुई है, उसकी पहचान 18 वर्षीय भेरूलाल आदिवासी के रूप में हुई है। युवक छोटी जाम का रहने वाला बताया जा रहा है। उसका शव एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया। पीड़ित परिवार को रेडक्रॉस सोसाइटी की ओर से 10 लाख रुपए की सहायता दी गई है। एक अन्य युवक संजय के पैर में भी गोली लगी है। ग्रामीण क्षेत्र में धारा 144 लगा दी गई है। इसके साथ ही पूरा क्षेत्र छावनी में तब्दील हो चुका है। आरोप है कि यदुनंदन धामनोद, जिला धार से युवती का अपहरण कर ग्राम गवली पलासिया लाया। यहां करंट लगा कर उसकी हत्या कर दी।
ग्रामीण एसपी भगवंत बिरदे ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर यदुनंदन पिता रामचरण पाटीदार के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। रेप के आरोप की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में होगी तो धारा बढ़ाई जाएगी।
पुलिस ने खदेड़ा तो हमला किया
युवती के परिजन ने बुधवार शाम को डोंगरगांव चौकी के सामने शव रखकर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक प्रदर्शन चला। प्रदर्शन करने वालों को पुलिस की टीम करीब एक किमी तक खदेड़ कर वापस चौकी पर आ गई थी। इसके बाद प्रदर्शन करने वालों ने पुलिस पर गोफन से हमला कर दिया। खबर है कि पुलिस ने भी सामने से फायरिंग की। करीब एक घंटे तक मचे बवाल के बाद फिलहाल हालात काबू में है। परिजन युवती का शव लेकर चले गए हैं।

महू में युवती की मौत के बाद हंगामा हो गया। महिला के परिजन ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया।
दबंग की प्रताड़ना से मौत का आरोप
युवती के परिजन का कहना है कि उसकी मौत एक दबंग युवक की प्रताड़ना के कारण हुई है। परिजन ने पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही है।’ युवती की बुआ ने आरोप लगाया कि उसकी भतीजी के साथ पाटीदार समाज के युवकों ने गैंगरेप कर हत्या की है। पुलिस ने हमारी रिपोर्ट भी नहीं लिखी।
युवती के मामा के बेटे ने आरोप लगाया कि उसकी बहन का मर्डर किया गया है। पुलिस ने उनसे सिर्फ इतना कहा कि आपकी बेटी की मौत हो गई है। पुलिस ने युवती का पोस्टमॉर्टम कराकर शव दे दिया। युवती के भाई ने किसी यदुनंदन परासिया का लेकर कहा कि वह उसकी बहन को अपनी पत्नी बता रहा है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है।
कांग्रेस विधायक दल को युवती के पिता ने बताई कहानी
कांग्रेस विधायक दल आदिवासी युवती के पिता से मिलने पहुंचा। युवती के पिता ने बताया कि आरोपी यदुनंदन की मां ने फोनकर बताया कि यहां आ जाओ। तुम्हारी बेटी का हाथ जल गया है। मैंने कहा कि मेरी बेटी तो यहां रूम पर रहती है तो वहां कैसे आ गई। मैं किसी को साथ में लेकर आऊंगा। आधे घंटे बाद थाने से फोन आया कि आपकी बेटी का देहांत हो गया है। इसके बाद फिर पुलिसवालों के फोन पर हम गाड़ी करके वहां पहुंचे। मेरी बेटी को धामनोद से अगवा किया गया। युवक पाटीदार समाज का है।
इस घटना से जुड़े अपडेट्स
- कांग्रेस विधायक कांतिलाल भूरिया ने कहा- सरकार 10 लाख रुपए देकर पीड़ित परिवार को दबा रही है। आदिवासी की जान की कीमत क्या 10 लाख रुपए है। देना ही था तो सरकार 5 करोड़ रुपए देती। आदिवासी नौजवान पुलिस की गोली से मारा गया है। सरकार आदिवासियों पर अत्याचार कर रही है।
- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महू की घटना में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कहा- आदिवासी युवती से गैंगरेप के बाद हत्या और फिर पुलिस फायरिंग में आदिवासी युवक की मौत ने मध्यप्रदेश में जंगलराज को साबित किया है।
- कमलनाथ ने घटना की जांच के लिए आदिवासी विधायकों का दल गठित किया है। इसमें कांतिलाल भूरिया, बाला बच्चन, झूमा सोलंकी और पांचीलाल मेड़ा शामिल हैं। दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। कांग्रेस के इंदौर प्रभारी महेंद्र जोशी भी घटनास्थल के लिए रवाना हुए हैं।
- उज्जैन पहुंचे गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने महू में हुई घटना की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा- कांग्रेस को संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। पति कहते हैं करंट लगने से मौत हुई, जबकि दूसरे संगठन के लोग हत्या की बात कह रहे हैं। जांच के आदेश दे दिए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर जाम लगा दिया। इससे दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।
चार थानों क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. इलैयाराजा टी ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अजय देवशर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। कलेक्टर ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त रूप से दंडाधिकारियों को तैनात किया है। महू, बडगोंदा सहित चार थानों क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। 500 से ज्यादा जवानों ने देर रात तक अलग-अलग हिस्सों में तैनात रहे। दो वज्र वाहन और दो फायर ब्रिगेड मौके पर मौजूद हैं। डोंगरगांव चौकी के आसपास बैरिकेडिंग भी कर दी गई है।
आरोपी की मां बोली- डेढ़ साल से था प्रेम प्रसंग
हत्या के आरोपी की मां राधा बाई ने बातचीत में कहा- मेरा बेटा सच ही बोलेगा, झूठ बोलेगा तो वह मर जाएगा। डेढ़ साल से युवती और यदुनंदन का अफेयर चल रहा है। ये बात उसके घरवालों को भी पता थी। 6 दिन से वो लड़की हमारे घर में ही रह रही थी। कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। बुधवार को मैं और मेरा बेटा मजदूरी पर चले गए। घर में वो अकेली थी। इसी दौरान वह बिजली के रॉड से पानी गर्म कर रही थी, तभी करंट लगने से उसकी मौत हो गई।
पुलिस चौकी पर पत्थरबाजी में जयस को बदनाम करने की कोशिश
जयस संगठन के अध्यक्ष भीम सिंह गिरवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा, बुधवार रात को डोंगरगांव पुलिस चौकी में हम लोगों ने आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस प्रशासन में उस युवक के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज कर लिया था और शव को लेकर जा रहे थे। लेकिन भीड़ में कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ दिया। उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया और संगठन को बदनाम करने की कोशिश की। गिरवाल ने कहा कि हम भी अपने प्रयासों से असामाजिक तत्वों की पहचान कर रहे हैं। जो भी वीडियो हमें उपलब्ध होंगे, पुलिस प्रशासन को उपलब्ध करा देंगे। हम पुलिस कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट है। चर्चा के दौरान कुछ शंका थी, वह दूर हो गई है।
उसका पेट पूरा छलनी था, कपड़ा बांधकर मोटर साइकिल से अस्पताल लाया भाई
महू के जाम गेट से एक किलोमीटर दूर माधौपुरा गांव। खेतों के बीच 10 बाय 12 फीट की कवेलु की छत वाली झोपड़ी। पूरा गांव इकट्ठा है। महिलाएं फूट-फूटकर रो रही हैं। बाहर 5 से ज्यादा पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं। पुलिस हर आने-जाने वाले पर नजर रख रही है। यह उस भेरूलाल मदन छारेल (21) का घर है, जिसकी 15 मार्च की रात महू के पास डोंगरगांव चौकी के सामने पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। जाने-अनजाने वह उस भीड़ का हिस्सा बन गया था जो आदिवासी युवती के कथित गैंगरेप और हत्या का विरोध करने पुलिस चौकी पर जुटी थी। चार भाइयों में सबसे बड़ा भेरूलाल घर का इकलौता कमाने वाला था। माली हालत ऐसी थी कि उसने अपना मोबाइल भी गिरवी रखा है।

भेरूलाल के घर में मातम पसरा है। मां (हरी साड़ी) के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। घर में गांव के लोग जुट रहे है। गमजदा परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।
बहन को पता नहीं भाई नहीं रहा, मां फूट-फूटकर रो रही
मां सुनीता और दादी झूमका बाई घर के कोने में बदहवास हालत में रो रही हैं। बेटे भेरूलाल के नाम का दीया जल रहा है। पास ही बड़ी टोकरी के नीचे गोबर लिप रखा है, यहीं पर दस दिन तक पूजा चलेगी। भेरूलाल के 3 छोटे भाई और सबसे छोटी बहन तुलसी है। 8 साल की बहन तुलसी को यह पता ही नहीं कि उसका भाई नहीं रहा। उसकी मासूमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कैमरा देखकर मुस्कुरा दी। उसे रत्तीभर अहसास नहीं है कि इतने लोग क्यों उसके घर आ रहे हैं..। मां से हमने बेटे के बारे में जानने की कोशिश की तो वे सिर्फ अपना नाम बता पाईं। इसके बाद फूट–फूटकर रो पड़ीं। उनकी ननद को संभालना पड़ा।
अपने बड़े पोते की शादी होते देखना चाहती थी दादी
दादी भी दिये के ही पास अपने पोते की याद में आंसू बहा रही हैं। घर के सबसे बड़े पोते की मौत ने उनके कई सपने तोड़ दिए। वे बताती हैं कि माधौपुरा से पिछले साल ही वह अपने ताऊ दयाराम के घर गवली पलासिया रहने चला गया था। वह पहले जेसीबी चलाता था, अब नल फिटिंग का काम करता था। गवली पलासिया में ही रहने वाले चचेरे भाई सुनील के साथ काम पर जाता था। दादी अपने जिंदा रहते भेरूलाल की शादी देखना चाहती थी। यह उनका सबसे बड़ा पोता था। बरसों बाद घर में शहनाई गूंजने की खुशी दादी को थी और अब सिर्फ आंसू..। वे बताती हैं कि रिश्ते की बात निमाड़ में चल रही थी। वह हफ्ते, 15 दिन में गवली पलासिया से माधौपुरा पैसे और सामान देने आया करता था।

भेरूलाल के 3 छोटे भाई और सबसे छोटी बहन तुलसी है। 8 साल की बहन तुलसी को यह पता ही नहीं कि उसका भाई नहीं रहा। ।
उसे मौत ही खींच ले गई थी डोंगरगांव चौकी…
चचेरे भाई सुनील छारेल का कहना है कि एक साल पहले तक भेरूलाल अपने गांव माधौपुरा में रहता था। वहीं से आना-जाना करता था, लेकिन ज्यादा समय लगने के कारण वह हमारे साथ ही गवली पलासिया में रहने लगा था। वह जो कमाता था, उसी से उनके घर का चूल्हा जलता था। कल मैं और भाई भेरूलाल दोनों ही काम पर गए थे। कल मैं शाम 5 से 5.30 बजे के बीच ही वापस लौट आया था। तब गांव में भीड़ जमा हो गई थी और डोंगरगांव चौकी पर हंगामा हो रहा था। मैंने कुछ देर देखा और अपने घर चला आया।
भेरूलाल अपने समय से ही वापस घर आने वाला था। वह रोज 8 बजे तक वापस आता था। जब वह वापस आ रहा था तो रास्ते में भीड़ के कारण वह वहीं रुक गया। देर तक घर नहीं आया तो हमें लगा कि कहीं रुक गया है। उसने अपना मोबाइल पैसों के लिए गिरवी रखा हुआ था इसलिए उसे फोन भी नहीं कर पा रहे थे। रात 9 बजे के बाद मुझे मेरे दोस्त प्रकाश का फोन आया कि तू जल्दी डोंगरगांव चौकी आ जा, भेरूलाल को पुलिस की गोली लग गई है।
जब मैं वहां पहुंचा तो भेरूलाल के पेट के पास पूरा छलनी था। वह कुछ नहीं बोल रहा था, लगा कि उसकी डेथ वहीं हो चुकी थी। हम उसके पेट पर एक कपड़ा बांध दिया और मोटर साइकिल से ही महू के एक अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने देखते ही हाथ खड़े कर दिए तो फिर एमवाय इंदौर ले गए, लेकिन मौत पहले ही हो चुकी थी। वह कुछ भी नहीं बोला कि वह कैसे वहां पहुंचा था लेकिन कुछ ग्रुपों में आदिवासियों के लिए डोंगरगांव चौकी पहुंचने के मैसेज डले हुए थे। संभवत: इसी कारण वह भी वहां रुक गया था।

राज्य सरकार ने तत्काल मदद के रूप में मृतक के परिवार को दस लाख रुपए का चेक दिया है।
9 हजार कमाता था, 5 हजार बचा लेता था : चचेरा भाई
परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि बिना पार्टिशन के एक झोपड़े में 8 लोग रहते हैं। पास ही खेती करते हैं। 4 दिन पहले ही पिता मदन ने गेहूं काटकर बेचा है। वे बताते हैं कि मैंने भेरूलाल को गेहूं काटने के लिए आने का कहा था, लेकिन वह नहीं आ सका था। वह अपने काम में ही व्यस्त था। भेरूलाल के तीन छोटे भाई में से एक दारासिंह (18) गांव माधौपुरा में ही पिता के पास खेत में काम करता है। दो छोटे भाई आकाश (14), सोमीलाल (13) 7वीं कक्षा में पढ़ते हैं जबकि सबसे छोटी बहन तुलसा (11) 6वीं क्लास में है। भेरूलाल के साथ में काम करने वाला चचेरा भाई सुनील बताता है कि भेरूलाल को 9 हजार रुपए महीना मिलता था। 4 हजार रुपए खर्च काटकर 5 हजार रुपए बचा लेता था। उससे सामान परिवार को भेज दिया करता था।
10 लाख रुपए तत्काल दिए, कांग्रेस ने कहा- यह पर्याप्त नहीं
घटना के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतक भेरूलाल के परिवार को 10 लाख रुपए सहायता का ऐलान किया। इसके तुरंत बाद कलेक्टर इलैयाराजा ने राशि मंजूर कर चेक परिवार को सौंप दिया है। चेक पिता के नाम पर दिया है। इधर, कांग्रेस नेताओं ने इसे पर्याप्त नहीं बताया है। कांग्रेस के आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया ने 5 करोड़ रुपए की सहायता दिए जाने की मांग की है। साथ ही परिवार में किसी को नौकरी भी दिलाने का वादा सरकार से मांगा है।

कांग्रेस के आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया ने 5 करोड़ रुपए की सहायता देने की मांग की है। साथ ही परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग भी सरकार से की है।
ऐसे शुरू हुआ था बवाल
बुधवार को खरगोन जिले के मंडलेश्वर थाना क्षेत्र के एक गांव की आदिवासी युवती की मौत महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र के गवली पलासिया गांव में हो गई थी। परिजनों ने डोंगरगांव पुलिस चौकी के सामने शव रखकर जाम लगा दिया। उनका आरोप था कि युवती की गैंगरेप के बाद हत्या की गई। गुस्साए लोगों ने पुलिस चौकी पर पथराव कर दिया। पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। लाठीचार्ज किया। करीब 25 हवाई फायर भी किए। प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने फायरिंग भी की। गोली लगने से आदिवासी युवक भेरूलाल की मौत हो गई।





