सत्येंद्रनाथ टैगोर, यह वो नाम है जिसे भले ही आम इंसान न जानता हो, लेकिन भारत के इतिहास में गहरे अक्षरों में दर्ज है. सत्येंद्रनाथ टैगोर देश के पहले IAS अधिकारी थे. वो सिविल सेवक होने के साथ संगीतकार, कवि, लेखक और समाज सुधारक भी थे. उनकी उपलब्धियां आज भी भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है.संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सीएसई 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. 180 छात्रों का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए किया गया है. इस बीच देश के पहले IAS अधिकारी सत्येंद्रनाथ टैगोर की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं. जानिए, देश के पहले IAS अफसर सत्येंद्रनाथ टैगोर का सफरनामा.
देश के पहले IAS अधिकारी सत्येंद्रनाथ टैगोर का जन्म 1 जून 1842 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ. वे महर्षि देबेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के सबसे बड़े पुत्र थे. प्रतिष्ठित टैगोर परिवार में जन्मे सत्येंद्रनाथ, रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई थे. परिवार के अन्य सदस्यों की तरह बचपन से ही उदार और प्रगतिशील विचारों का वाले थे.

सत्येंद्रनाथ टैगोर.
कैसे बने IAS?
सत्येंद्रनाथ टैगोर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्राप्त की. ब्रिटिश भारत में पश्चिमी शिक्षा का प्रमुख केंद्र होने के नाते, इस कॉलेज ने उनके मन और विचारों को गहराई से प्रभावित किया. 1862 में सत्येंद्रनाथ टैगोर भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा देने के लिए इंग्लैंड गए, जो उस समय केवल लंदन में आयोजित की जाती थी. यह प्रक्रिया कठिन थी और विशेष रूप से ब्रिटिश उम्मीदवारों के पक्ष में बनाई गई थी.
1863 में नस्लीय भेदभाव तोड़ते हुए भारत के पहले भारतीय सिविल सेवक बने. यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था और इसने उन भारतीयों के लिए मार्ग प्रशस्त किया जो अपने देश की शासन व्यवस्था के भीतर सेवा करने का सपना देखते थे.
बहुमुखी प्रतिभा के धनी
सत्येंद्रनाथ टैगोर एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. टैगोर परिवार से होने के नाते, उन्हें भाषाई कौशल और दार्शनिक क्षमता विरासत में मिलीं.
- उनके निबंध सांस्कृतिक आधुनिकीकरण और लैंगिक समानता जैसे साहसिक विषयों पर केंद्रित थे और उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी विचारों को नया नजरिया दिया.
- उन्होंने रूमी, हाफ़िज़, शेक्सपियर और बायरन की रचनाओं का बंगाली में अनुवाद किया, जिससे आम जनता के बौद्धिक स्तर का विस्तार हुआ.
- उनके गीतों में भारतीय रागों का पश्चिमी धुनों के साथ मिश्रण था. उनका गीत ‘मिले सबे भारत संतान, एकतान गागो गान’ बहुत चर्चा में रहा था.
- प्रशासनिक सेवा में में रहते हुए, उन्होंने महिला सशक्तिकरण और जाति व्यवस्था को समाप्त करने के लिए केंद्रित नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन का हिस्सा होने के बावजूद सत्येंद्रनाथ टैगोर भारतीयों की जरूरतों और सपनों के प्रति सहानुभूति रखते थे. न्याय और सत्यनिष्ठा के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता और ICS में उनकी उपस्थिति ही भारतीयों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत थी. उन्होंने सामाजिक सुधार लाने के लिए, विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के साथ भारतीयों के बीच आधुनिक शिक्षा की वकालत की.






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