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 *प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों की ठगी,1 हजार से ज्यादा संदिग्ध क्लेम*

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मुर्दों के नाम की प्रीमियम भरी, फिर मृत बताकरक्लेम ले लिया

 भोपाल। ग्वालियर-चंबल संभाग में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में करोड़ों की ठगी का खुलासा हुआ है। फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र के जरिए बीमा घोटाला किया गया है। EOW को 1 हजार 4 संदिग्ध बीमा क्लेम मिले हैं। जिससे अब तक करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि गरीबों को लोन का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए जाते थे। उसके आधार पर फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाकर बीमा में नाम जुड़वाया जाता था। मामले में ग्वालियर में बीमा कंपनी के कर्मचारी विवेक दुबे, जिग्नेश प्रजापति, दीपमाला मिश्रा के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।  

वहीं मुरैना में 679 प्रकरणों में से 5 केसों में पहले से मृत लोगों को जीवित दिखा कर पंजीकृत किया गया। फिर दोबारा मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाकर बीमा क्लेम लिया गया। इस मामले में पंचायत सचिव सूरजराम कुशवाह, मानसिंह कुशवाह समेत कई लोगों पर मामला दर्ज हुआ है।

 ग्वालियर चंबल अंचल में पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। योजना में मृत्यु पश्चात मिलने वाली बीमा राशि दो लाख रुपये लेने के लिए मृतकों को जिंदा बताकर पहले बीमा का प्रीमियम भरा गया। उसके बाद उसे मृतक बताया गया।

ज्यादा से ज्यादा लोगों के नाम पर ठगी के लिए मृत्यु स्थल यानी जिले से लेकर प्रदेश तक बदल दिए गए। एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर ही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इनके आधार पर सत्यापन कराकर बीमा कंपनियों से राशि ली गई है।

ऐसे हुआ घोटाला… 15 सौ से ज्यादा केस सामने आए

  • आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर में एक शिकायत फरवरी में पहुंची। जब पड़ताल शुरू की गई तो अधिकारी भी अचंभित हो गए। पता चला कि ग्वालियर चंबल संभाग के जिलों में ऐसा गिरोह काम कर रहा है जो ग्रामीण क्षेत्र लोगों को टारगेट करता है।
  • दरअसल पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना में बीमा राशि तब मिलती है, जब मृत्यु से कम से कम एक माह पहले बीमा कराया हो। ऐसे में मरे हुए लोगों के दस्तावेज जुटाकर उन्हें बाद में मरना बताया गया।
  • रुपयों का लालच देकर स्वजन से दस्तावेज ले लिए गए और खाते खुलवाए गए। बीमा का एक माह पूरा होते ही मृत होना बताकर ग्वालियर जिले से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिए और अधिकृत बीमा कंपनियों में केस लगाकर बीमा राशि प्राप्त कर ली गई।

पड़ताल में सामने आया है कि कई साल से यह फर्जीवाड़ा चल रहा है। इसमें शहरी क्षेत्र से ज्यादा ग्रामीण लोग इसका शिकार हुए हैं, जिनमें पंचायत के सचिवों को मृत्यु प्रमाण पत्र दिए जाने का अधिकार होता है।

Ramswaroop Mantri

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