अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर भारत को निशाना बनाया, पर फायदा कम हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को सालाना लगभग 2.5 अरब डॉलर का ही फायदा हो रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना बढ़ाया था। अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सामानों पर टैरिफ भी बढ़ा दिया है।
अमेरिका ने कुछ समय में रूसी तेल खरीद के मुद्दे को हौव्वा बनाया हुआ है। खासतौर से इसके लिए भारत को निशाना बनाया गया है। इसे लेकर भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाए हैं। अमेरिका ने यहां तक आरोप लगाया कि भारत यूक्रेन युद्ध का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी कर रहा है। लेकिन, सच इससे कोसों दूर है। ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए की ताजा रिपोर्ट इसकी बानगी है। इसके अनुसार, रूस से सस्ते में कच्चा तेल (क्रूड) खरीदने से भारत को होने वाला फायदा जितना सोचा गया था, उससे कहीं कम है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को इससे सालाना लगभग 2.5 अरब डॉलर का ही फायदा हो रहा है। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि भारत को 10 से 25 अरब डॉलर तक का फायदा होगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना बढ़ा दिया था। लेकिन, अब यह फायदा कम हो गया है। साथ ही, अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सामानों पर टैरिफ भी बढ़ा दिया है।
सीएलएसए की रिपोर्ट बताती है कि रूस से तेल खरीदने का भारत को उतना फायदा नहीं हो रहा है, जितना कि मीडिया में बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘रूसी कच्चे तेल के आयात से भारत को होने वाला लाभ मीडिया में बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। हमारे अनुमान के मुताबिक, यह लाभ भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का सिर्फ 0.06 फीसदी यानी करीब 2.5 अरब डॉलर है।’ इसका मतलब है कि भारत की जीडीपी में इसका योगदान बहुत कम है।
2022 से भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई
फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था। इसके बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना तेजी से बढ़ा दिया। 2024-25 में भारत ने जितना तेल खरीदा, उसमें से 36% रूस से खरीदा गया था। यह लगभग 18 लाख बैरल प्रतिदिन था। युद्ध से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था, यह आंकड़ा 1% से भी कम था।
पश्चिमी देशों ने रूस पर तेल बेचने को लेकर कई तरह के प्रतिबंध लगाए। इस वजह से रूस ने अपने तेल पर भारी छूट देनी शुरू कर दी। इससे भारत को सस्ते में तेल मिलना शुरू हो गया। लेकिन, अमेरिका जैसे कुछ देशों ने भारत की आलोचना की और कहा कि भारत मुनाफाखोरी कर रहा है।
सीएलएसए का कहना है कि रूस के तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल की जो सीमा लगाई गई है, वह देखने में तो बड़ी छूट लगती है। लेकिन, बीमा, जहाजरानी और पुनर्बीमा जैसी कई पाबंदियों के कारण भारत को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023-24 में रूसी तेल पर औसतन 8.5 डॉलर प्रति बैरल की छूट मिली थी। लेकिन, 2024-25 में यह घटकर 3-5 डॉलर प्रति बैरल हो गई। हाल के महीनों में तो यह सिर्फ 1.5 डॉलर प्रति बैरल ही रह गई है। इसका मतलब है कि रूस से तेल खरीदने पर मिलने वाली छूट लगातार कम होती जा रही है।
ब्रोकरेज फर्म ने दी चेतावनी
सीएलएसए ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई कम हो जाएगी। इससे कच्चे तेल की कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। इसके चलते दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय तेल कंपनियों को रूसी तेल के साथ बेहतर क्वालिटी वाले और महंगे कच्चे तेल को भी मिलाना पड़ता है। इस वजह से तेल के औसत दाम में कोई खास फायदा नहीं दिखता है।
सीएनएसए की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से तेल खरीदना भारत के लिए जरूरी है। इससे भारत को तेल की सप्लाई मिलती रहती है। साथ ही, यह दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों को भी कंट्रोल में रखने में मदद करता है। हालांकि, अब यह मामला सिर्फ आर्थिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक भी हो गया है। भारत अपने व्यापार से जुड़े फैसले खुद ही ले रहा है।
अमेरिकी सरकार ने रूस से सस्ते तेल की खरीद जारी रखने को लेकर भारतीय उत्पादों के आयात पर टैक्स को 27 अगस्त से बढ़ाकर 50% कर दिया है। इसका मतलब है कि भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ सामान अब महंगे हो जाएंगे।





