त्रिस्तरीय पंचायत और निकाय चुनाव में दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में टिकट वितरण बाद विरोध के स्वर गूंज रहे हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज़ नेता बग़ावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। नाम वापसी की आज अंतिम तारीख़ है। जानकारी के मुताबिक़ नाम निर्देशन पत्रों की जांच बाद खरगोन निकाय में फ़िलहाल कुल 218 दावेदार मैदान में है। चर्चा है कि भाजपा-कांग्रेस के नेता रूठों को मनाने के लिये लगातार प्रयास कर रहे हैं। ये प्रयास कहां तक सफ़ल होगा ये आज दोपहर 3 बजे के पहले तक ही साफ़ हो सकेगा। इस बीच कल यानी 21 जून को देर शाम प्रदेश भाजपा कार्यालय से अध्यक्ष वीडी शर्मा के निर्देश बाद प्रदेश कार्यालय से प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी द्वारा एक फ़रमान जारी हुआ है। इस फ़रमान की प्रतिलिपि भाजपा जिलाध्यक्षों को प्रेषित की गई है। इस पत्र में स्पष्ठ उल्लेख है कि बग़ावत करने वालों का नाम, पद और मोबाईल नम्बर तत्काल प्रदेश कार्यालय को भेजें। पत्र में साफ़ कहा गया है कि पार्टी की ख़िलाफ़त करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त एक्शन लेकर उन्हें 6 साल के लिये पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा। पंचायत तथा निकाय चुनाव में अपनी साख़ कायम रखने के लिये जहां भाजपा ने कड़ा रुख़ अपनाया है वहीं कांग्रेस की तरफ़ से ऐसा कोई क़दम उठाया गया हो, अबतक सामने नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो ये चुनाव दोनों ही प्रमुख दलों के लिये 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाईनल है। इसलिये भाजपा कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है। इधर कांग्रेस के लिये कहा जा रहा है कि उसके पास खोने के लिये कुछ नहीं है। वो मौन रहकर भाजपा की गुटबाज़ी के बीच जीत का रास्ता खोज़ रही है। गौरतलब है कि पंचायत ओर निकाय चुनाव की इस जंग में भाजपा खेमें में वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आई है। अब जबकि प्रदेश भाजपा कार्यालय से फ़रमान आ चुका है ऐसी स्थिति में उन भाजपा कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है जिन्होंने अपने नेता के इशारे पर चुनाव मैदान में अबतक मोर्चा संभाल रखा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अब कितने समर्थक अपने नेता की साख़ बचाने के लिये अपना राजनीतिक कॅरियर दांव पर लगाते हैं। अपने नेताओं की प्रतिष्ठा को सर्वोपरि मानकर यदि समर्थक चुनाव मैदान में डटे रहकर अपनी राजनीति की बलि चढ़ाते हैं, तो त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति में भाजपा को बड़ा नुकसान होने की चर्चा जोरों पर है। इधर मौन बैठी कांग्रेस गदगद तो है लेकिन उसकी भी धड़कन तेज है क्योंकि उसके वोट बैंक में भी सेंध लगाने वालों की कमी नहीं है। कुल मिलाकर शहर, नगर ओर ग्राम सरकार के लिये हो रही इस जंग में किसका पलड़ा भारी रहेगा? यह देखना मज़ेदार होगा।
*तरुण कुमार सोनी*




