अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

ऑपरेशन सिंदूर समीक्षा : अर्थवत्ता, औचित्य, आलोचना और निष्कर्ष

Share

    ~प्रखर अरोड़ा

      22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों की हत्या के जवाब में भारत ने 7 मई को Operation Sindoor शुरू किया, जिसमें नौ आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया — चार पाकिस्तान में और पाँच पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में।

      सटीक और सीमित कार्रवाई: ऑपरेशन को लगभग 23 मिनट में पूरा किया गया, जिसमें भारतीय एयर फोर्स, ड्रोन, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल जैसी तकनीकों का संयोजन हुआ। इसमें नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान से बचते हुए केवल आतंकवादी इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया।

       चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन ने पाकिस्तान के मनोबल पर भारी प्रभाव डाला। यह कार्रवाई आज भी “सक्रिय” मानी जा रही है।

     नई रणनीतिक टेक्नोलॉजी और संपर्क रहित युद्ध नीति: यह भारत की नई प्रतिक्रिया नीति की शुरुआत का प्रतीक बनी—सीधे क्षति पहुँचाने की क्षमता और वास्तविक समय निगरानी का तालमेल मिलाकर तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देना।

*औचित्य :*

तत्काल बदला और न्याय की बात: भारत ने इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली पाक संसथाओं को सबक सिखाने और पहलगाम हमले के शिकारों के परिवारों को न्याय दिलाने की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया।

     राजनैतिक और नैतिक सीमाएँ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन का उद्देश्य नियंत्रण रेखा पार करना नहीं बल्कि आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना था, जिसमें रुचि स्पष्ट नीति, नैतिकता और राज्यों के साथ सम्मान बनाए रखना शामिल था।

    संस्कृति एवं प्रतीकात्मक नामकरण: ऑपरेशन का नाम ‘Sindoor’ हिन्दू पितृसत्ता और पतियों की रक्षा का प्रतीक दर्शाता है। इसे “widows’ vengeance” के रूप में प्रस्तुत किया गया और इसे सांस्कृतिक भावना से जोड़कर न्याययुक्त प्रतिक्रिया बताया गया।

*आलोचना :*

जातीय और पितृसत्ता की प्रतीकात्मकता: आलोचकों ने कहा कि ऑपरेशन का नाम स्त्री-पितृसम्बंधवादी प्रतीकों (सिंदूर) पर आधारित था, जो महिलाओं की पहचान को पतियों से जोड़ता है। इसे पद्धतिगत पितृसत्तात्मक समझौता माना गया।

     राजनीतिक ध्रुवीकरण: विपक्ष के कुछ नेता और राजनेता जैसे जया बच्चन ने सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने जनता का विश्वास खोया है, और मांग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से माफी माँगे ताकि संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

     आलोचना विपक्ष द्वारा विरोधी धारणा बनाए रखना: विपक्ष ने संसद में इस ऑपरेशन पर बहस की मांग की, जिसे प्रधानमंत्री ने विपक्ष को जनता से दूर करने का प्रयास बताया — कहा गया कि इससे उनकी असहजता सामने आई है।

      नागरिक हानि का भारत और पाकिस्तान के बीच विरोधाभास: भारत ने दावा किया कि कोई नागरिक अक्षति नहीं हुई, लेकिन पाकिस्तानी सूत्रों ने 31 नागरिकों की मौत और मस्जिदों व आवास क्षतिग्रस्त होने की बात बताई — इस असहमतिपूर्ण बिन्दु ने पारदर्शिता पर प्रश्न उठाए।

*वैश्विक प्रतिक्रियाएँ :*

–  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने भारत और पाकिस्तान दोनों से अधिक से अधिक संयम बरतने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण एशिया में कोई सैन्य टकराव वैश्विक शांति के लिए खतरनाक हो सकता है — “maximum military restraint” की आवश्यकता है।

* यूएन प्रवक्ता ने कहा कि यह संघर्ष वैश्विक समुदाय के लिए चिंतास्पद है और दोनों पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान, कूटनीतिक बातें, और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते का पालन करने की अपील की गई है।

* डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति) ने ऑपरेशन को “unfortunate” और “dangerous” कहा — साथ ही आशा व्यक्त की कि तनाव जल्द शांत हो जाए। उन्होंने बताया कि U.S. प्रयास कर रहा है दोनों देशों के बीच सीमा पर सीमा शांति स्थापित करने में सहयोग करें।

* U.S. विदेश विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भारत का आत्मरक्षा का अधिकार मान्य है, लेकिन उन्होंने दोनों पक्षों से वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह किया।

* U.S. सेनेटर Marco Rubio ने भारत और पाकिस्तान को कहा कि “avoid escalation” करें — de‑escalation के लिए संवाद ज़रूरी है।

* संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की और संकट को बातचीत एवं समझदारी से हल करने का आग्रह किया — संवाद, शांति, और स्थिरता की दिशा में कदम आग्रह किए गए।

* इज़राइल ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। इज़रायली राजदूत Reuven Azar ने कहा कि आतंकवादियों को दुनिया में कहीं भी छुपने की जगह नहीं होनी चाहिए और भारत का निर्णय न्यायसंगत था।

* चीन ने भारत की कार्रवाई को “regrettable” बताया और क्षेत्रीय तनाव पर गहरी चिंता जताई, साथ ही पाकिस्तान का समर्थन किया  ।

* रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जकारोवा ने भारत–पाक तनाव पर “deep concern” व्यक्त करते हुए दोनों देशों को द्विपक्षीय समझौते, विशेषकर Simla Agreement (1972) और Lahore Declaration (1999) के अनुरूप शांतिपूर्वक समाधान का आग्रह किया।

* तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए स्थिति को विश्लेषित किया और सीमाओं पर बातचीत की वकालत की, साथ ही पाकिस्तान में अपनी उपस्थिति बनाए रखी — भारत के खिलाफ चीनी समर्थन पर भी संकेत दिया गया।

* पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ़ ने ऑपरेशन को “act of war” करार दिया और बदले की कसम खाई। उन्होंने कहा कि यह भारत द्वारा पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला था और पाकिस्तान “inevitable retaliation” करेगा।

    इसके बाद पाकिस्तान ने शांतिपूर्ण वार्ता की पहल की. उन्होंने प्रस्तावित संवाद की बात कही, हालांकि भारत ने बताया कि वह केवल आतंकवाद और PoK मुद्दों पर बातचीत करेगा।

    पाकिस्तान ने यह भी माना कि चीन ने उसे ऑपरेशन के दौरान और उसके पश्चात भारत पर नजर रखने में गुप्त जानकारी साझा की—इंटेलिजेंस सहयोग का उल्लेख किया गया है।

  *तटस्थ विश्लेषक दृष्टिकोण :*

      विश्लेषकों ने इसे Doval Doctrine की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव माना—जहाँ आतंकवाद के खिलाफ कड़ा और सटीक प्रतिक्रिया दी गई, न कि विस्तारवाद। यह भारत के जवाबदेही रणनीति में बदलाव का संकेत है।

     इसे भारत की आधुनिक सैन्य क्षमता, विशेष रूप से ब्रह्मोस और S‑400 समेत उपकरणों का पहला प्रभावी उपयोग माना गया, जिससे पाकिस्तान के रक्षा ढांचे की कमजोरी सामने आई।

    विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक तनाव जारी रहेगा, और क्षेत्रीय अशांति के चलते द्विपक्षीय वार्ता, जल वितरण, पर्यावरण, एवं व्यापार जैसे जटिल मुद्दे प्रभावित हो सकते हैं।

      वैश्विक स्तर पर ऑपरेशन सिन्दूर को एक द्विध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय घटना के रूप में देखा गया: एक ओर भारत की रणनीतिक सटीकता, आत्मरक्षा और आतंकवाद विरोधी निर्णय को सराहा गया; वहीं दूसरी ओर कई देशों ने संयम, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया। पाकिस्तान ने इसे “रणनीतिक आक्रमण” माना और आक्रामक प्रतेक्श का सिलसिला शुरू किया, जिसमें चीन की भूमिका भी नजर आई। इस पूरी घटना ने दक्षिण एशिया में बयानबाजी, सेना‑राजनीति‑कूटनीति के बीच घनी जटिलता, और भागीदारी हस्तियों की भूमिकाओं को उजागर किया।

यह न केवल आतंकवादियों को निशाना बनाने की कार्रवाई थी, बल्कि एक नया दुश्मन प्रतिक्रिया सिद्धांत स्थापित करने वाली घटना भी थी—“प्रोवोकेशन पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया, पर विस्तारवादी नहीं।

    यह भारत की निर्णायक और आत्मनिर्भर नीति को उजागर करता है—“टेररिज़्म की किसी भी मदद वाली संस्था को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसकी नीति निजी हो या राज्य स्तर पर”।

     नकारात्मक ध्रुवीकरण और सांस्कृतिक प्रभाव: जबकि जनता में सीमित समर्थन रहा, लेकिन नामकरण और प्रतीकवाद, विशेषकर पितृसत्ता-संबंधी प्रतीकों की चुनाव ने सामाजिक आलोचना और विभाजन को भी जन्म दिया। यह दर्शाता है कि किसी सैन्य अभियान में नैतिक संकल्प और सांस्कृतिक दृष्टिकोण दोनों की समझ आवश्यक होती है।

     स्थायी प्रभाव: ceasefire के बाद भी ऑपरेशन की “प्रतिसाद नीति” जारी है, जैसे सैन्य और साइबर दोनों फ्रंटों पर सतर्कता बढ़ाना। पाकिस्तान के मनोबल पर प्रभाव देर तक बना रहा है।

ReplyForwardAdd reaction

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें