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 जेफरी एपस्टीन की फाईल्स में भारत के प्रधानमंत्री का नाम 33 बार!

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सुसंस्कृति परिहार 

इधर संसद में सीतारमण जी देश का बजट पेश कर रही थीं और रात में ही सारी दुनियां में जेफरी एपस्टीन के नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण की विस्तृत फाईल्स जारी हुई। जिसमें इतिहास में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री का नाम संसार के सबसे क्रूरतम वीभत्स और बर्बर सेक्स स्कैंडल की फाइल में आया है। एक बार नहीं, पूरे 33 बार – नरेंद्र मोदी। दुनिया ने भारत के सनातनी प्रधान सेवक का एक गंदा संघी चेहरा पहली बार देखा है।यह शर्मनाक है।

इस रिपोर्ट में मोदीजी के दोस्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्म्प के साथ बहुत से राष्ट्र प्रमुखों के नाम हैं जो इन नापाक हरकतों में शामिल रहे हैं। भारत में पाश्चात्य संस्कृति के साथ भारत का अद्यतन विरोध रहा है यहां तक की इटली की बहू सोनिया गांधी जिसने देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पण किया भारतीय संस्कृति में जो रम गई ।उनका विरोध आज तक जारी है ‌ऐसे महान देश के एक कथित राष्ट्र भक्त स्वयं सेवक देश प्रमुख का दूषित चेहरा विदेशी मीडिया में सामने आना बहुत ही हिला देने वाला तो है ही साथ ही भारतीय सभ्यता पर कलंक है।

इसलिए आज आम बजट को बीच में रोककर पीएम से सवाल पूछा जाना चाहिए था पर हुआ ये कि रात में ही यह ज़रुरी समझा गया कि सभी अखबारों और टीवीऔर मीडिया में यह समाचार ना छपने पाए। विदेश मंत्रालय ने इसे अंजाम दिया और सुबह से बजट के शोर में सब थम गया। लेकिन डिजिटल ज़माने में भला कुछ भी कैसे छुप सकता है।अब कथित देशभक्तगण अपनी सफाई देते देखे जा रहे हैं।और भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एपस्टीन फ़ाइल्स’ के एक ईमेल मैसेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जेफ़री एपस्टीन की मुलाक़ात के दावों को ख़ारिज किया है।

जेफरी एपस्टीन की फाइल बता रही है  कि मोदी ने ट्म्प को खुश करने जेफरी जैसे कुकर्म कराने वाले की सलाह ली और उसके बाद 2017 में इज़राइल गए जहां जाकर खूब नाचे और गाए थे। काम हो गया। उन्होंने वहां क्या किया इसे यदि एक पल को हटा भी दें तो मान्यवर के मन में इस शख्स से परामर्श लेने का विचार कैसे आया?,क्या ऐसे शख्स से उनका गहरा नाता था ?यही से वे सब सवाल जन्म लेते हैं जिनने मोदी जी के चरित्र पर सवालिया निशान लगाया है।यदि वे साफ़ पाक हैं तो उन्हें अपने सारे सच को सामने लाना चाहिए। क्योंकि यह देश के प्रधानमंत्री पर लगे आरोप का सवाल है।देश की बहुत बदनामी हो रही है

सिर्फ समाचार दफ़न करने या इसे झूठी अफवाह कहकर इससे पीछा नहीं छुड़ाया जा सकता है। दुनिया भर की मीडिया इसे परोस रही है।आपके आका और अन्य राष्ट प्रमुख किसी ने भी इसका खंडन नहीं किया है।उन सब पर आरोप हैं।मोदी को जवाब के लिए मजबूर किया जाना चाहिए कि छोटी छोटी बच्चियों को विश्व के ताकतवर लोगों के सामने पटक देने वाले दलाल जेफरी एपस्टीन के साथ आपका क्या रिश्ता था।और नाच गाकर उन्होंने कौन सा काम पूरा किया।विदित हो,एपस्टीन 

फाइलें 6 मिलियन से अधिक पृष्ठों के दस्तावेज़, चित्र और वीडियो हैं जो अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी बाल 

यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन और उनके सार्वजनिक हस्तियों के सामाजिक दायरे की आपराधिक गतिविधियों का विवरण देते हैं, जिसमें राजनेता और हस्तियां शामिल थीं।

अपने 2024 के राष्ट्रपति अभियान के दौरान , डोनाल्ड ट्रम्प ने एपस्टीन फाइलों को जारी करने का विचार रखा,  हालाँकि उन्होंने तब से कहा है कि फाइलें डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों द्वारा गढ़ी गई हैं । 18 नवंबर, 2025 को, संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि सभा ने 427-1 मतों से एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट पारित किया , और संयुक्त राज्य अमेरिका की सीनेट ने सर्वसम्मति से इसे मंजूरी दी;  ट्रंप ने अगले दिन विधेयक पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी न्याय विभाग ने 19 दिसंबर, 2025 की अधिनियम की समय सीमा तक एपस्टीन फाइलों की अपेक्षाकृत कम मात्रा जारी की, जिससे द्विदलीय आलोचना हुई। 30 जनवरी, 2026 को, 2,000 वीडियो और 180,000 छवियों सहित 3 मिलियन से अधिक पृष्ठ जारी किए गए।  हालांकि न्याय विभाग ने स्वीकार किया कि कुल 6 मिलियन से अधिक पृष्ठ एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी किए जाने वाली फाइलों के रूप में योग्य हो सकते हैं, उसने कहा कि 30 जनवरी की रिलीज अंतिम होगी और उसने अपने कानूनी दायित्वों को पूरा कर लिया है।इस तरह ये फाइलें सामने आई है।

याद रहे- पीएम मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इसराइल दौरे पर थे. इसके तीन दिन बाद एपस्टीन ने यह मेल लिखा है. इसराइल दौरे से ठीक पहले 25-26 जून 2017 को मोदी, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे। जेफ़री एपस्टीन के मेल की कड़ियों को जोड़ें तो समझ आता है कि मोदी, जून 2017 में अमेरिका गए और वहां एपस्टीन से सलाह ली।

इसके एक हफ्ते बाद 4 से 6 जुलाई 2017 मोदी इसराइल पहुंचे और सलाह के मुताबिक वहां नाचे और गाए और काम हो गया। अब साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जेफ़री एपस्टीन से बहुत ही गहरा और पुराना नाता है, जो भारत के लिए शर्मनाक है. यह मामला राष्ट्रीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए।कांग्रेस ने तीन सवाल करते हुए लिखा, “नरेंद्र मोदी, जेफ़री एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे? मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इसराइल में नाच और गा रहे थे? एपस्टीन ने लिखा है- ‘इट वर्क्ड’…तो इसका क्या मतलब है?

नरेंद्र मोदी जी आज देश भी आपसे जवाब मांग रहा है। हालांकि जवाब देने का रिवाज़ यहां नहीं है इसलिए शक की गुंजाइश और मज़बूत होती है।मानसी सोनी का अमेरिका पलायन और चीन के पास इस के रहस्यों की मौजूदगी की जानकारी तथा भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के आरोप सब मिलाकर इस मामले को पुख्ता करते हैं।

जबकि कुछ लोग साफ़ कह रहे हैं कि संघ स्वयं सेवकों को वासना से दूर रखकर उन्हें कुंठाग्रस्त कर देते हैं ऐसे लोगों को जब मौका मिलता है यौन शोषण भले ही वह नाबालिग लड़के लड़की का हो, कर बैठते हैं।सनातन देश में इसीलिए संघ के इस नियम पर विवेकपूर्ण चिंतन होना चाहिए। पीएम का ऐसे गंदे लोगों से रिश्ता सिर्फ़ ट्म्प को खुश कर काम निकालने के लिए ही हुआ होगा।पर नितांत गंभीर मसला है।इसका खुलासा होना ही चाहिए।

Ramswaroop Mantri

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