-सुसंस्कृति परिहार
आज फ्रेंड दिवस हमारे देश में भी उत्साह पूर्वक मनाया गया अच्छा हुआ इस दिवस पर कहीं सनातनी आड़े नहीं आए।लोग मजाहिया तौर पर यह पता लगाने की कोशिश करते रहे कि मोदीजी ने अपने चर्चित चहेते फ्रेंड डोनाल्ड ट्रम्प को शुभकामनाएं दीं या नहीं।इतनी जल्दी इतने प्यारे दोस्त को कैसे भुलाया जा सकता और जब ट्म्प टेरिफ वार से दुनियां को दहशत में डाले हुए हैं तब हमारे सरेन्डर मोदीजी कैसे रिस्क ले सकते हैं।भले इस तरह की खबर नहीं मिल पा रही है पर ऐसा हो ही नहीं सकता उन्होंने अपने माई फ्रेंड को बधाई ना दी हो।
खैर छोड़िए यह दिवस तो गुज़र गया। अमेरिका का स्वाधीनता दिवस भी , 4 जुलाई 1776 में ब्रिटिश शासन से वह मुक्त हुआ था। गुज़र गया।आज वह दुनियां में अपनी हुकूमत जमाने व्यग्र है। याद रखिए अमेरिका ने ही सोवियत संघ को टुकड़े टुकड़े में बांटने में अहम् भूमिका निभाई।आज भी स्वतंत्र राष्ट्र जो सोवियत संघ का खनिज सम्पदा बाहुल्य क्षेत्र है उसके संसाधनों पर अधिकार जमाने ही इस युद्ध को लंबा खींच रहा है।
इतना ही रुस के विखंडन के बावजूद वह अमेरिका से बराबरी की टक्कर ले रहा है।उसने अब तक के इतिहास में खनिज संसाधनों को प्राप्त करने अफ़ग़ानिस्तान,ईराक, यूक्रेन और ईरान पर जितने हमले करवाए उन्हें मुंह की खानी पड़ी। इज़राइल और फिलीस्तीन के युद्ध में अमेरिका ने जो मानव नरसंहार किया और बचे लोगों को भूख से मार रहा है इतना दुर्दांत कार्य हिटलर मुसोलिनी भी नहीं कर पाए।आज गाज़ा तड़प रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपना स्वाधीनता दिवस जिस हर्षोल्लास से मनाया। वह फिलीस्तीन को जलाने काफ़ी था।
अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन ने जिस लोकतंत्र की स्थापना हेतु संविधान निर्मित कराया था उसका हाल और भारत के दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र में भी देखा जा रहा है। वहां पेंटागन के इशारे पर देश चलता है और यहां सर संघ चालक की मर्जी चलती है। दोनों देश लोकतांत्रिक जामा पहनाकर फासिस्ट हो गए हैं। हां कहा ये जाता है, और कुछ उदाहरण भी सामने आए हैं जहां वहां के सर्वोच्च न्यायालय ने ट्म्प के फैसलों के खिलाफ निर्णय सुनाए हैं।भारत में भी काश सुपरमेन के खिलाफ फैसला हो जाता।
ताज़ा जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने सीज़फायर करवाने के मामले पर अडिग हैं और पाकिस्तान को तेल भंडारों के खनन हेतु सहयोग को राजी कर लिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि एक दिन ऐसा आएगा जब पाकिस्तान से भारत खनिज तेल खरीदेगा।यह गप नहीं असलियत है। क्योंकि उसने मोदीजी को धमकी देकर रुस और ईरान से तेल लेने मना किया है।
अब माई फ्रेंड की बात का विरोध नहीं हो सकता।उसने भारत की सम्प्रभुता को कुचल के रखा हुआ है। देश सब कुछ देख सुन रहा है मोदीजी पर अतिविश्वास करना लाजमी नहीं है। उन्हें गाॅड मानने वाले और गृहमंत्री को शंकर मानने वाले देश को खोखला कर रहे हैं।हमारा स्वाधीनता दिवस करीब है
जो दोस्त देश की इकानामी को डेड कहने का साहस कर रहा है उसके तेवर आगे भारत के लिए कैसे होंगे। पूंजीवाद को समर्पित दोनों नेताओं में आज जो होड़ है उसमे भारत बहुत पिछड़ गया है।यदि यह यारी इसी तरह निभाई जाती रही तो देश को अमेरिका आर्थिक गुलाम बना लेगा।जैसा पाकिस्तान के साथ हुआ है।इतने बड़े देश के साथ यदि यह होता है,तो डूब मरने की बात होगी।
मोदीजी को जब स्वाधीनता दिवस पर देश वासियों को अमरीका की शुभकामनाए आती हैं तो यदि इस देश से ज़रा भी प्यार है तो अपनी स्वाधीनता गिरवी नहीं रखेंगे। उन्हें देश की सम्प्रभुता बनाए रखने कहेंगे।तथा साफ़ संदेश देंगे।वह हमारे मामले में हस्तक्षेप ना करें।
याद आता कोरिया, जर्मनी जैसे पांच देशों में मोदीजी कह चुके हैं कि ना जाने उन्होंने कौन से पिछले जन्म में पाप किए थे जो इस देश भारत मे जन्म लिया।
यह दिल दुखानें वाला संदेश उनकी मंशा जाहिर करता है। इसीलिए उन पर विश्वास करना देश को खतरे में डाल सकता है। अमेरिका तो मुंह बाए खड़ा ही है।





