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किसान संघर्ष समिति के आन्दोलन के 25 वर्ष

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आराधना भार्गव
25 दिसम्बर 1997 को मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित मुलताई तहसील में किसान संघर्ष समिति की स्थापना हुई, तब से लगातार किसान संघर्ष समिति सम्पूर्ण लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष कर रही है, 3 साल से लगातार अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखे से किसानों की फसल नष्ट हो रही थी किसानों के पास खाने के लिए अनाज भी नही था क्योंकि जो अनाज पैदा हुआ था वह काला पड़ चुका था, जिसे पशु भी खाने को तैयार नही थे। चारे के अभाव में भूख से तड़प तड़प कर जानवरों की मौत हो रही थी, उस पर से किसानों पर बिजली का बिल तथा सोसाईटी के कर्ज को पटाने के नोटिस लगातार दिये जा रहे थे । किसानों के हक में कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी लड़ने को तैयार नही थी। कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी और विधायक भी कांग्रेस के थे, पर उन्होंने कहा कि हमारी फसल भी खराब हो चुकी है हम कुछ नही कर सकते, यह सुनने के पश्चात् किसानों ने तय किया कि, वे अपनी लड़ाई स्वयं लड़ेंगे। 25 दिसम्बर 1997 को किसानों ने डाॅ. सुनीलम् के नेतृत्व में किसान संघर्ष समिति की स्थापना मूलतापी तहसील परिसर में 5000 किसानों ने की तथा अपना अध्यक्ष टंटी चैधरी जी को बनाया, अपने जीवनकाल में टंटी चैधरीजी किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष रहे, उनके इन्तकाल के पश्चात् चुनाव करवाने के पश्चात किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पद पर डाॅ. सुनीलम् जी को चुना गया।

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12 जनवरी 1998 को नष्ट हुई फसल का मुआवजा, बिजली तथा सोसाईटी का कर्ज माफ करने, पशुओं को चारा आदि मांगों को लेकर किसान मुलताई तहसील परिसर में एकत्रित हुए, सुबह 10 बजे के लगभग 25 हजार किसान एकत्रित हो चुके थे, आन्दोलन लगभग 17 दिन से चल रहा था, 09 जनवरी 1998 को 75 हजार किसान अपने ट्रेक्टर सहित बैतूल जिलाधीश के कार्यालय में मुआवजे की मांग को लेकर पहुँचे, तब तक शासन और प्रशासन यह समझ चुका था कि इस आन्दोलन को अगर यहीं पर नही रोका गया तो यह आन्दोलन पूरे प्रदेश में फैल जायेगा। सरकार ने साजिश रची, पुलिस अधिक्षक जे.पी. सिंग तथा जिलाधीश रजनीश बैस ने मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंग के आदेश पर किसानों पर गोली चालन करने की साजिश रची। 11 जनवरी की रात में ही पुलिस द्वारा गोली चालन किये जाने की चेतावनी अतिरिक्त कलेक्टर अवस्थी ने किसान संघर्ष समिति के कुछ कार्यकर्ताओं को दी।

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अनिरूद्ध गुरूजी को स्पष्ट कहा कि कल सुबह किसानों पर गोली चालन किया जायेगा, इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। 11 जनवरी की रात को ही धारा 144 हटा दी गई तथा मुलताई तहसील के चारों तरफ लगाये गये बैरीकेट हटा दिये गये, चारों तरफ से किसानों को मुलताई तहसील परिसर में आने की पूरी छूट दी तथा बिना सूचना के निहत्थे किसानों पर गोली चालन किया ढाई घण्टे तक लगातार गोली चालन किया गया, चैबीस किसानों की लाश बिछ गई। ताप्ती के उद्गम स्थान को किसानों के लहू से भर दिया गया, 24 किसान शहीद हुए, 150 किसानों को गोली लगी, 250 किसानों पर 67 फर्जी मुकदमें लादे गये। भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी शहीद हुए किसानों का पोस्टर छपवाकर राजनीतिक लाभ लेने का भरसक प्रयास किया। किसानों पर गोली चालन के पश्चात् धीरे धीरे कांग्रेस का पतन शुरू हुआ और अब देश के नक्शे से कांग्रेस का सफाया होते पूरा देश देख रहा है। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई, पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती ने मुलताई गोली चालन को जलियावाला बाग से भी ज्यदा बरबरता पूर्ण बताया, उन्हें भी भारतीय जनता पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। शिवराजसिंह चैहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने उन्हेंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंग के सपनों को साकार किया, तीन आन्दोलनकारियों को झूठे गवाह के आधार पर आजीवन कारावास की सजा करवाकर यह संदेश दिया कि जो किसान के हक में खड़ा होगा उसका यही हाल किया जायेगा डाॅ. सुनीलम् को कुल मिलाकर 54 साल की सजा दी गई, मूलतापीवासियों और किसान संघर्ष समिति के साथियों ने जब यह समझ लिया कि कोई पार्टी उनका साथ देने को तैयार नही है तब उन्होंने तय किया कि वे विधान सभा में अपनी आवाज पहुँचाने के लिए अपना विधायक चुनेगे और सर्वसम्मति से उन्होंने चिखलीकला की महापंचायत में डाॅ. सुनीलम को किसान संघर्ष समिति का उम्मीद्वार बनाया। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी तथा अन्य दलों को उम्मीदवार की जमानत जप्त कराके 50 प्रतिशत वोट देकर विधान सभा में पहुँचाया और भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाना को संदेश दिया तथा यह भी संदेश दिया कि देश में बिना जाति, पैसे, दारू, गुण्ड़ों और सरकारी मशीन के अपना उम्मीद्वार चुना जा सकता है। डाॅ. सुनीलम विधान सभा में पहुँचने के पश्चात् लगातार किसानों की आवाज उठाते रहे। कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी ने कई बार कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि अगर वे पार्टी में शामिल हो जाते तो उन पर चल रहे सभी मुकदमें वापस हो जाते, जिसे उन्होंने स्वीकार नही किया, और किसानों के हक में लड़ने की सजा आजीवन कारावास को स्वीकारा ।

Multai massacre' of 24 innocent farmers in 1998 at the behest of Digvijay  Singh govt in MP - YouTube


दाम दुपट का सिद्धांत किसानों के संघर्ष के परिणाम स्वरूप ही आया, किसान संघर्ष समिति ने उच्चतम् न्यायालय में याचिका दायर की इसके पश्चात् ही ये तय हुआ कि किसान जितना कर्ज लेता है उससे दुगना कर्ज उससे वसूल नही किया जा सकता है, उसी प्रकार अगर आदिवासी ने कर्जा लिया है और वह योजना किसी कारण से असफल हो जाती है तो आदिवासी से कर्ज की वसूली नही की जा सकती। फसल बीमा की आवाज सबसे पहले किसान संघर्ष समिति ने ही उठाई गेरूआ रोग को प्राकृतिक आपदा में शामिल कराने का काम किसान संघर्ष समिति के संघर्ष के परिणाम स्वरूप ही हुआ। किसान संघर्ष समिति ने देश को यह संदेश दिया कि देश की मौजूदा हालत में अगर परिवर्तन करना है तो संगठित होकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाना होगा। इन 25 सालों में किसान संघर्ष समिति प्रदेश के अन्य जिलों में लगातार काम कर रही है, प्रतिमाह की 12 तारीख को किसानों की महापंचायत प्रदेश के अलग अलग जिलों में होती है जिसमें सर्वसम्मति से फैसले लिये जाते है, अगर एक भी कार्यकर्ता असंतुष्ट होता है तो जब तक वह संतुष्ट नही होता बात आगे नही बढ़ती, सर्वसम्मति से ही फैसले लिये जाते है। किसान संघर्ष समिति द्वारा मुलताई में किसान आन्दोलन का अंकुर डाला और पेड़ हमें दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों के बीच में बनते दिखाई दिया। मुलतापी, मन्दसौर, बाड़ी-बरेली आदि जगहों पर किसानों के आन्दोलन को जिस तरीके से दमन किया गया उससे सबक लेते हुए दिल्ली में लगभग 1 साल तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठे रहे, 700 किसानों ने अपनी शहादत दी आन्दोलनकारीयों को नक्सली, आतंकवादी, खालिस्तानी, आदि शब्दों से नवाजा, आन्दोलनकारियों पर हत्या के मुकदमें भी दर्ज किये गये किसानों को गाड़ियों से कुचलडाला गया पर किसान पीछे नही हटे, तीन किसान विरोधी कानून रद्द करने के बाद ही किसान अपने घर लोटे।
छिन्दवाड़ा में किसान संघर्ष समिति ने गौतम अडानी की पेंच पाॅवर प्रोजेक्ट को रद्द करने की मांग को लेकर धूल चटा दी, जिस समय देश गौतम अडानी की लूट को समझ भी नही पाया था किसान संघर्ष समिति अडानी की किसानों की जमीन की लूट के खिलाफ संघर्ष करने में जुटी थी। छिन्दवाड़ा जिले की सबसे सिंचित चार फसल पैदा करने वाले क्षेत्र को पानी में डूबोकर अडानी पेंच पाॅवर प्रोजेक्ट को माॅचागोरा बाँध बनाकर पानी उपलब्ध कराना डबल ईंजन की सरकार ने तय किया और अडानी पेंच पाॅवर प्रोजेक्ट हेतु पानी पहुँचा दिया, किन्तु किसान संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने अपनी जमीन पर कब्जा करके खरीब की फसल पैदा कर ली और रवि की फसल बोनी की तैयारी में किसान लगा हुआ है। पुलिस का सहारा लेकर गौतम अडानी ने पुलिस के गुण्डों को भेजा पर किसानों के सामने अडानी की नही चली। गौतम अडानी के ईशारो पर मध्यप्रदेश सरकार ने अनेक फर्जी मुकदमें बनाकर नेतृत्व करने वाले किसानों को डराने की कोशिश की, किन्तु न्यायपालिका के सामने सच्चाई आने के पश्चात छिन्दवाड़ा जिले के किसान संघर्ष समिति के सभी कार्यकर्ताओं पर लादे गये फर्जी मुकदमें समाप्त हो चुके है, अडानी के गुण्डों को सभी भी हुई है। ‘कितनी ऊँची जेल तुम्हारी देख लिया और देखेंगे’ ‘कितना दम है दमन में तेरी देख लिया और देखेंगे’ के नारों के साथ किसान संघर्ष समिति के कार्यकर्ता सम्पूर्ण लोकतंत्र की बहाली के लिए अपना संघर्ष जारी रखे हुए है। किसान संघर्ष समिति जिन्दाबाद !
एड. आराधना भार्गव

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