-सुसंस्कृति परिहार
यूं तो उत्तर प्रदेश में इस बार भाजपा की दाल गलती नज़र नहीं आ रही है किंतु जुबानी जमा खर्च और हेकड़ी तथा सत्ता की ऐंठन और मोदीजी की करीबी का पिछले आमचुनाव में फायदा उठाकर 2019 में सांसद बनने वाली स्मृति जुबैनी ईरानी इस बार बुरी तरह कांग्रेस के फंदे में फंस चुकी है। कुछ समय पूर्व अमेठी में अपने नवनिर्मित मकान में गृह प्रवेश करते समय जो तामझाम मतदाताओं को लेकर किए गए, उन्होंने जो ख़्वाब देखें थे वे यूं टूटेंगे सोचा भी ना होगा।

वे पूरी तरह से इस बात के लिए तैयार थीं इस क्षेत्र से इस बार इंदिरा गांधी के परिवार से संजय गांधी के पुत्र वरुण गांधी या प्रियंका गांधी उम्मीदवार होंगे। क्योंकि राहुल गांधी ने इस तरह का इशारा भी किया था वरुण चाहें तो उन्हें यह सीट इंडिया गठबंधन के किसी दल या निर्दलीय तौर पर दी जा सकती है।जब काफ़ी वक्त गुजर गया तो राहुल गांधी ने स्वयं यहां से लड़ने की घोषणा की।इस घोषणा से स्मृति की बांहें खिल गई। स्मृति की समस्त तैयारी गांधी परिवार के ख़िलाफ़ ही चल रही थी।
इधर कांग्रेस ने भी यकायक राहुल को अपने दादा फ़ीरोज़ गांधी और मां सोनिया गांधी की रायबरेली सीट लड़ने पर जोर दिया, जिसने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया है इसकी घोषणा होते ही स्मृति की तैयारियों को सांप सूंघ गया। राहुल गांधी ने अपने अब तक के सबसे विश्वसनीय सीधे सच्चे कांग्रेस साथी निज सलाहकार सचिव किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार घोषित कर दिया जो अमेठी के ही निवासी हैं।इसे सुनकर पहले तो अमेठी के मतदाता सकपका गए। दूसरे ही दिन जब राहुल अमेठी पहुंचे तो लोगों कांग्रेस की रणनीति समझ में आ गई। प्रियंका गांधी ने भी जब यहां अपनी बात कही तो अमेठी का पुराना प्रेम उमड़ पड़ा। उसके बाद शर्मा जी का जो जादू चला वह स्मृति के तामझाम के आगे फीका पड़ गया। अमेठी प्रायश्चित की भूमिका में है और इस बार दिखाना चाहती है कि वे वहां के लोग कितने पक्के कांग्रेसी हैं।
उधर स्मृति घर बनकर जिस आत्मीयता का परिचय देने जा रहीं थीं उसे घरेलू उम्मीदवार ने तार तार कर दिया। पिछले चुनावों में मोदीजी अपनी बहिन स्मृति के साथ राहुल प्रियंका भाई-बहन को चुनौती दिए थे वे अब आ भी जाएं तो कोई फ़र्क नहीं पडने वाला। क्योंकि मोदी पर लगातार जो भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं वे अपना दाग़दार चेहरा दिखाने शायद ही आएं और आते भी हैं तो मानसिक दिवालियापन से जो झूठ गढ़ रहे हैं वे नहीं चलने वाले। फिर स्मृति आजकल उनकी खास नहीं रहीं।
कुल मिलाकर जुबानी जमा खर्च और झूठ का पिटारा खोलने वालों को देश भर के लोग पहचान गए हैं इसलिए इस बार स्मृति की हेकड़ी और ऐंठ एक कांग्रेस का सीधा सच्चा सिपाही निकालने वाला है।उसे जनता सर आंखों पर बैठाए हुए है जो स्मृति के कद को कितना बौना कर देगी इसका आभास भाजपा को हो चुका है।




