सुसंस्कृति परिहार
तकरीबन तीस वर्षों से जिस तरह पानी का व्यापार सिर चढ़कर बोल रहा है उसी तरह आज प्राणवायु का टोटा बड़े उद्यमियों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है।हवा ,पानी दोनों प्रकृति प्रदत्त नि: शुल्क उपहार है और कोरोना काल ने हवा को भी अब बड़े कमाई वाले व्यापार का हिस्सा बना दिया है।आज कोरोना मरीज को आक्सीज़न की आपूर्ति में कमी की किल्लत ने इसे आसमान छूने वाले रेट पर पहुंचा दिया है । ब्लेक में यह छोटे से शहर में 15,000 ₹ से कम में नहीं मिल रहा है जो जमाखोर हैं वे किस बेरहमी से लूट जारी रखे हैं इससे तो यह ज़ाहिर है कि सिर्फ सम्पन्न लोग ही अपनी सांसों को बचाने का इंतजाम कर पायेंगे । ग़रीब तो मारा ही जाएगा। इसीलिए दबंग जमाखोरों ने रेमेडिसवीर इंजेक्शन और आक्सीजन सिलेंडरों को अपने गोदामों में सुरक्षित कर लिया है।वे मौके पर भरपूर मुनाफे में निकाल ऐहसान भी जतला देते हैं मसलन बाहर से आपके लिए कितनी जद्दोजहद से लेकर आए ।मरता क्या ना करता शुक्रगुजार होना ही है ।यह स्थिति लगभग सभी जगह होगी ।इसके लिए सरकार को छापेमार कार्रवाई करनी होगी और लोगों को जागरूक होकर इन स्थानों का भंडाफोड़ करने में सहयोग करना होगा । जिससे आक्सीज़न और दवाएं निकलकर आम मरीजों तक पहुंच पाएं।
इस बीच सु को ने भी कोरोना मरीजों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख रखते हुए सरकार को तल्ख आदेश दिए हैं । पूर्व प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह ने भी अपनी सदाशयता के बरअक्स पांच बिंदुओं पर रहा काम करने के महत्वपूर्ण सुझाव प्रधानमंत्री जी को दिए हैं ।इन पर अमल होने की प्रत्याशा में देश प्रतीक्षारत है। बंगाल की रैलियां रद्द करने वाले राजनैतिक दलों का काम सराहनीय और जनसरोकार की दिशा में उठाया उम्दा कदम है ।उम्मीद की जा सकती है कि शायद साहिब की पार्टी भी अपना मिजाज बदल ले।देश में जिस तरह से कोरोना बढ़ रहा है उसको रोकने लाकडाऊन भी लगाया जा रहा है पर उसका परिपालन ठीक तरीके से हो रहा है यह सिर्फ पुलिस का काम नहीं यदि हमें अपनी रुंधती सांसों को बचाना है तो स्वयं प्रयास करने होंगे।यह लगने वाली बीमारी है इसलिए सिर्फ़ अपने घर के लोगों को ही नहीं बल्कि सभी मित्रों,पड़ौसियों आदि को तैयार करना होगा तभी जाके इस बीमारी से बचने की संभावना है ।कोरोना गाईड लाईन का पालन आवश्यक है ।किसी को सर्दी,खांसी , बुखार है तो घबराएं नहीं।घरु चिकित्सा इसके लिए कारगर है पर सांस लेने में तकलीफ है तभी जांच करवाएं और प्राथमिक उपचार जारी रखें मसलन गर्म पानी लें,हल्दी के गरारे करें,भाप का सेवन करें । पौष्टिक आहार लेते रहे । रिपोर्ट पाज़ीटिव भी आ जाए तो घबराएं नहीं खुली हवा में आक्सीज़न लें डाक्टर के परामर्श से ही दवाएं लें।दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है।ज्यादा दिक्कत में ही अस्पताल का रुख करें।
सबसे अहम बात यह है कि यदि किसी की सांस टूटने लगे तो उसके मनोबल को बढ़ाए रखें तो उसका कष्ट कम होगा। फिर भी यदि वह दुनिया से रुखसत कर ही ले तो शेष परिवार जनों को इस दर्द से उभारने उसे ताकत दें क्योंकि इंसान को आखिरकार इंसान का सहारा ही मिलता रहा है । सहयोग हर कदम पर बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।आइए,कदम बढ़ाया जाए।कोरोना को हराया जाए। बहुत से समाजसेवी इस दिशा में सक्रिय हुए हैं निरंतर सहयोग बढ़ रहा है यही सहयोग की गति रही तो हम सब टूटती सांसों को रवानी दे पायेंगे ।





