सुसंस्कृति परिहार
दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री होना नई बात नहीं है इससे पहले भाजपा से सुषमा स्वराज, कांग्रेस से शीला दीक्षित और आम आदमी पार्टी से आतिशी सिंह मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इनमें आतिशी का छोटा कार्यकाल कोई मायने नहीं रखता, किंतु पूर्व चयनित महिला मुख्यमंत्रियों की भूमिका पर दिल्ली वासी इतरा सकते हैं। भाजपा की समाजवादी पार्टी से भाजपा में आई सुषमा जी का अपना एक गरिमामय इतिहास रहा है। यहां दूसरी भाजपा की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आती हैं संघ की पसंद हैं भाजपा की पसंदीदा भी हैं।

इसकी वजह उनकी संघ में अपार निष्ठा और तीखा कटु बोलचाल है। यही संघ और भाजपा को पसंद भी है। उन्हें अनुराग ठाकुर,विधूड़ी और इलाहबदिया जैसे अक्खड़ लोग भाते हैं। अपने विरोधियों के लिए इनके शब्दकोष में वे शब्द बहुतायत से मिलेंगे जो आमतौर पर लोग बोलने में परहेज करते हैं।रेखा गुप्ता जी भी इस तरह की बोलचाल और उदंड व्यवहार के लिए विख्यात हैं। यह बात उनके फेसबुक एकाउंट से सार्वजनिक हुई है जो बताते हैं कुछ देर बाद डिलीट भी कर दी गई है। इसमें इतनी अभद्र भाषा केजरीवाल, दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी के लिए इस्तेमाल की गई है ,वह एक महिला मुख्यमंत्री को शर्मशार करने काफ़ी है।
अपने एक दशक से अधिक कार्यकाल में भाजपाई प्रधानमंत्री ने भी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी एवं प्रियंका गांधी को जिन दूषित शब्दों से नवाजा है, सदन में नौटंकी की है चुनावों में झूठ परोसा है।वे दबंगई से झूठा कहते हैं कितने किलो गाली खाई है। रेखा गुप्ता जी इसी श्रृंखला की एक मज़बूत कड़ी हैं। यह दिल्ली वासियों के लिए भाजपा का एक ऐसा तोहफा है जिससे दिल्ली में यमुना का गंदा जल भले ही प्रदूषण मुक्त हो जाएं लेकिन राजनीति में जिस तरह गंदगी फैलेगी उसका सामना दिल्ली की मेहनतकश अवाम कैसे कर पाएगी?
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के बाद मध्यप्रदेश और अब दिल्ली जहां सर्व धर्मावलंबियों की मौजूदगी है ,के साथ क्या रवैया अख्तियार किया जाएगा यह सब समझ रहे हैं। योगीराज जो संघ के भविष्य के प्रधानमंत्री की पसंद बताए जाते हैं यदि रेखा जी भी ऐसी ही असंवेदनशील लकीर खींचती हैं तो दिल्ली पुरानी दिल्ली नहीं रहेगी।योगी जी की मुल्ला, कठमुल्लावादी नीति अपनाना भी उनके कार्यों की फेहरिस्त में शामिल होगा इसे कहने में संकोच नहीं।
कैशरवानी लोगों की अधिकता को भी ध्यान में रखकर रेखाजी को मुख्यमंत्री बनाया गया है।वे हिंदू हैं इसलिए शपथग्रहण से पूर्व बापू की समाधि राजघाट नहीं गईं ,हनुमान मंदिर गईं और संध्या काल यमुना के वासुदेव घाट पहुंच कर आरती की।वे केबिनेट मीटिंग भी जल्दबाजी में आज ही कर रही हैं।शीशमहल में नहीं रहूंगी कहने वाली नवागत मुख्यमंत्री लगता है अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खात्मा हेतु आज ही केबिनेट मीटिंग करने बाध्य हैं। सचिवालय पर पहले से ताला लगाने से यह बात जाहिर होती है।
लगता तो यह भी है यमुना के वासुदेव घाट का कायाकल्प कर किसी बड़े मंदिर का निर्माण भी तय हो जाए। आखिरकार भक्तिपथ ही इन दिनों राजनीति का सबसे बड़ा तुष्टिकरण का हथियार बन चुका। आगे आगे देखिए दिल्ली के विकास का क्या ख़ाका सामने आता है। पुरानी लीक से हटकर कोई रेखा खींचना उनके बस की बात नहीं। संघ और मोदी जी की आज्ञापालन ही उनका प्राथमिक लक्ष्य होगा।





