तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को घोषणा की कि चेन्नई में कार्ल मार्क्स की एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जबकि उसिलामपट्टी में दिग्गज नेता पी.के. मूकैया थेवर के सम्मान में एक भव्य स्मारक (मणिमंडपम) का निर्माण किया जाएगा।
विधानसभा में नियम 110 के तहत बोलते हुए स्टालिन ने वैश्विक क्रांतियों पर मार्क्स के प्रभाव और मजदूर वर्ग को सशक्त बनाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “द्रविड़ मॉडल की यह सरकार कार्ल मार्क्स को सम्मानित करना चाहती है, वह क्रांतिकारी जिसने दुनिया को नारा दिया- ‘दुनिया के मजदूर, एकजुट हो जाओ!’ उनके दर्शन ने मजदूर वर्ग को ताकत दी, जिससे दुनिया भर में सामाजिक न्याय के लिए आंदोलन प्रेरित हुए।”
स्टालिन ने यह भी कहा कि मार्क्स ने भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति के बारे में लिखा था और इसके पुनरुत्थान की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने याद दिलाया कि “यह पेरियार ही थे जिन्होंने 1931 में पहली बार कम्युनिस्ट घोषणापत्र का तमिल में अनुवाद किया था।”
मुख्यमंत्री ने मूकैया थेवर को श्रद्धांजलि अर्पित की, उनके निडर नेतृत्व, चुनावी जीत और कच्चातीवु समझौते के खिलाफ उनकी लड़ाई को याद किया। उन्होंने थेवर समुदाय के भीतर शिक्षा को आगे बढ़ाने में थेवर के प्रयासों पर जोर दिया और घोषणा की कि सरकार उनके सम्मान में उसिलामपट्टी में एक स्मारक का निर्माण करेगी।
स्टालिन ने जोर देकर कहा कि चेन्नई के ट्रेड यूनियन आंदोलनों के समृद्ध इतिहास को देखते हुए, यह शहर मार्क्स की प्रतिमा के लिए आदर्श स्थान है।
गौरतलब है कि भारत में मई दिवस सबसे पहली बार चैन्नई – तबके मद्रास – में मनाया गया था।
शाम को मदुरै में, जहाँ सीपीएम का राष्ट्रीय महाधिवेशन चल रहा है वहाँ मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कामरेड प्रकाश करात के साथ भारतीय संविधान में दिए देश के संघीय – फेडरल – ढांचे को बचाने के लिए हुए एक विशाल भागीदारी वाले सेमिनार को भी संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके जन्म के चार दिन बाद विश्व के महान नेताओं में से एक जोसेफ स्टालिन का देहांत हो गया था। उनकी शोकसभा में बोलते हुए एम करुणानिधि ने मेरा नाम स्टालिन के नाम पर रखने काम एलान किया था : वामपंथ से मेरा रिश्ता अविभाज्य है। इसलिए सीपीएम को उनसे कोई अलग नहीं कर सकता।
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