पुष्पा गुप्ता
वाराणसी में 23 दरिन्दों द्वारा 19 साल की लड़की के साथ 9 दिन तक किए गए बर्बर बलात्कार के मामले ने पूरे देश को एक बार फ़िर से झकझोर दिया है। ख़बर सामने आ रही है कि ये अपराधी उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार के नाक के नीचे सेक्स और ड्रग्स रैकेट चला रहे थे।
जाहिर है कि ऐसा कोई भी रैकेट बिना शासन-प्रशासन के संरक्षण के बगैर चल पाना सम्भव नहीं है। इनको बचाने को जुगत इसका सुबूत भी है.
इस घटना ने एक बार फिर से सरकार के स्त्री सुरक्षा के तमाम दावों की पोल खोल दी है। ग़ौरतलब है कि यह इस तरीके की कोई पहली घटना नहीं है।
आईआईटी की घटना, नीट की तैयारी कर रही बिहार की एक लड़की के साथ बलात्कार और हत्या की घटना और अब यह घटना प्रधानमन्त्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में बर्बर स्त्री विरोधी अपराधों के कुछ हालिया उदाहरण हैं।
बीएचयू कैम्पस तक में आये दिन लड़कियों के साथ छेड़खानी की घटना होती रहती है। विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन केवल मूकदर्शक बनकर देखता रहता है। हर बार की तरह इस बार भी घटना के सामने आने के बाद लीपापोती और बयानबाजियों का दौर शुरू हो चुका है।
आज फ़ासीवादी दौर में पुलिस प्रशासन से लेकर न्यायालय तक ऐसे अपराधियों को बरी करने और संरक्षण देने का काम खुलेआम कर रहा है। नारी शक्ति और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का राग अलापने वाली मोदी सरकार के कार्यकाल में स्त्री विरोधी अपराधों की बाढ़ सी आ गई है।
कहीं शिक्षकों द्वारा छात्राओं का उत्पीड़न, कहीं बालिका गृहों में बच्चियों पर यौन हिंसा, कहीं झूठी शान के लिए लड़कियों को मार देना, कहीं सत्ता में बैठे लोग स्त्रियों को नोचते हैं, कहीं जातीय या धार्मिक दंगों में औरतों पर ज़ुल्म होता है तो कहीं पर पुलिस और फ़ौज की वर्दी तक में छिपे भेड़िये यौन हिंसा में लिप्त पाये जाते हैं!
पिछले दस सालों की बात करें तो बलात्कार की घटनाओं में लगभग 26.5% की वृद्धि हुई है। आज हालत यह हो चुकी है कि प्रतिदिन लगभग 86 बलात्कार के अपराध हमारे देश में दर्ज़ हो रहे हैं। ये तो वे मामले हैं जो तमाम दबावों के बाद भी मीडिया और पुलिस तक पहुँच जाते हैं।
इससे कई गुना ज़्यादा मामले लोक-लाज के डर और लचर प्रशासनिक-न्यायिक व्यवस्था की वजह से कभी सामने आ ही नहीं पाते। आज प्रदेश में जो लोग न्याय के लिए आवाज़ उठा रहे हैं उनपर दमन का पाटा चलाया जा रहा है।
आईआईटी-बीएचयू में छात्रा के साथ भाजपा आईटी-सेल के गुण्डों द्वारा गैंगरेप की घटना के बाद न्याय के लिए संघर्ष करने वाले छात्रों पर ही मुक़दमा दर्ज़ कर निलम्बित करने का फरमान जारी कर दिया गया।
इस तरह की घटनाओं में वृद्धि की एक बड़ी वज़ह ये है कि सत्ता में बैठे हुए लोग ऐसे बर्बर अपराधियों-बलात्कारियों को शह देने का काम करते हैं।
उत्तर प्रदेश में 2017 के मुकाबले 2022 में दागी विधायकों की संख्या में डेढ़ गुना की वृद्धि हुयी है। आये दिन आसाराम और राम रहीम जैसे बलात्कारियों को पैरोल पर बाहर निकलने का मौका दिया जाता है।
ऐसी स्थिति में इन बर्बर बलात्कारियों के हौसले बुलन्द होते हैं। ऐसी मानसिकता वाले अपराधियों को लगता है, वे चाहे कुछ भी करें उन्हें कोई सजा नहीं होगी।
दरअसल संस्कार और शुचिता की बात करने वाली योगी-मोदी सरकार के खुद के सांसद और विधायक ही ऐसे बर्बर कृत्यों में लिप्त पाये जाते हैं। ऐसे में यह साफ़ जाहिर है कि ये लोग ऐसी मानसिकता को पोषित करने का ही काम करेंगे। ये फ़ासीवादी सरकार आज पूरे समाज के पोर-पोर में स्त्री विरोधी पितृसत्तात्मक मूल्य-मान्यताओं को फैलाने का काम कर रही है।
जिस वज़ह से ऐसे बलात्कारी और अपराधी किस्म की मानसिकता तैयार होती है। आज के दौर में फ़िल्मों से लेकर गाने-सिनेमा-साहित्य हर माध्यम से घोर स्त्री विरोधी संस्कृति को प्रचारित करने का काम किया जा रहा है। जिसका नतीज़ा है कि समाज में ऐसी घटनायें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
आज हर इन्साफ़पसन्द और संवेदनशील व्यक्ति को ऐसे बर्बर स्त्री विरोधी अपराधों के खिलाफ़ खड़े होने की ज़रूरत है। इन अपराधियों और बलात्कारियों को शह देने वालों के खिलाफ़ खड़े होने की ज़रूरत है।
साथ ही साथ यह समझने की भी ज़रूरत है कि जब तक पूँजीवाद रहेगा तब तक ऐसी स्त्री विरोधी मानसिकता उत्पादित और पुनरुत्पादित होती रहेगी।





