हरनाम सिंह
मध्य प्रदेश के छतरपुर के ग्राम गढ़ा में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बहु चर्चित हिंदू ग्राम योजना बड़ी तेजी से आकार ग्रहण कर रही है। इस हेतु भूमि पूजन पश्चात निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। योजना अंतर्गत इस गांव में एक हजार सनातनी हिंदू परिवारों को बसाने की योजना है। आलोचक इसे संघ और भारतीय जनता पार्टी के हिंदू राष्ट्र निर्माण की योजना के पहले कदम के रूप में देख रहे हैं। हालांकि संवैधानिक मजबूरी के चलते प्रधानमंत्री हिंदू राष्ट्र की बात नहीं करते, लेकिन उनके और उनकी पार्टी के लक्ष्य से सभी परिचित हैं।
धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार पहले हिंदू ग्राम बनेंगे फिर तहसील, फिर जिला और राज्य की स्थापना के साथ कालांतर में हिंदू राष्ट्र का स्वरूप सामने आएगा। उनकी योजना में हिंदू गांव में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। धीरेंद्र शास्त्री यह नहीं बताते कि उनके कथित भावी हिंदू राष्ट्र में गैर हिंदुओं की स्थिति क्या होगी ? पिछले महीने में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बागेश्वर धाम पहुंचकर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना छोटा भाई बताया था। प्रधानमंत्री इस बात से तो अनजान नहीं होंगे कि उनका छोटा भाई और उनके दल को समर्थन देने वाले साधु- संत जिस हिंदू राष्ट्र निर्माण की बात कर रहे हैं वह असंवैधानिक है।
#संवैधानिक स्थिति
भारतीय संविधान के प्रस्तावना में भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है। हिंदू राष्ट्र की मांग धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करती है। देश के संविधान ने हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19 (2) इस स्वतंत्रता को देश की एकता अखंडता और अन्य समुदायों के प्रति वैमनस्यता बढ़ाने वाला पाता है तो ऐसी अभिव्यक्ति पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के अनुसार संसद को संविधान संशोधन का अधिकार है। लेकिन वह भी संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदल सकती। हिंदू राष्ट्र की मांग संविधान की प्रस्तावना या धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल तत्वों को बदलने की कोशिश करती है तो यह असंवैधानिक है।
#सजा का प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 तथा 299 के अनुसार हिंदू राष्ट्र की मांग विभिन्न धार्मिक समुदायों में नफरत या दुश्मनी को बढ़ावा देता है तो इस धारा के तहत कार्यवाही हो सकती है। 3 साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजा दी जा सकती है।
लेकिन यदि हिंदू राष्ट्र की मांग के साथ हिंसा, भेदभाव या अन्य समुदायों के अधिकारों को दबाने की बात की जाती है तो यह भी गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में पुलिस को एफआईआर दर्ज करना होती है, यह बात अलग है कि व्यवहार में पुलिस ऐसा नहीं कर रही है।
#गुजरात में है कई हिंदू गांव
भारत जैसे बहुसंस्कृति भाषा वाले देश में धार्मिक आधार पर बने गांव को प्रशासनिक स्तर मान्यता मिल सकती है ? वैसे तो बाबा बागेश्वर की योजना के पूर्व ही हमारे शहरों में जातीय आधार पर कॉलोनियों, हाउसिंग सोसाइटियों में विधर्मियों को मकान बनाने, फ्लैट खरीदने, किराए से देने पर अघोषित प्रबंध लगा ही हुआ है। गुजरात के कई गांवों के प्रवेश द्वार पर बोर्ड लगे हैं। जिन पर लिखा है “हिंदू राष्ट्रानु गांव में आपुन हार्दिक स्वागत करें थे”। हालांकि उन गांव में अच्छी खासी तादाद में मुस्लिम भी रहते हैं। ऐसा बोर्ड लगाने से उन्हें भी कोई एतराज नहीं है।
#बाबा बागेश्वर की योजना
छतरपुर में के गांव गढ़ा के निकट योजना अंतर्गत तीन मंजिला फ्लैट बनाए जा रहे हैं। निचले तल के फ्लैट की कीमत 17 लाख रुपए,् पहली मंजिल पर 16 तथा दूसरी मंजिल के फ्लैट की कीमत 15 लाख रुपए रखी गई है। बुकिंग के लिए 25 हजार रुपए जमा करवाने होंगे। बाद में 50 लाख रुपए एडवांस देना होंगे। फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं होगी। खरीदार को निर्माण समिति के साथ अनुबंध करना होगा। शर्तों के अनुसार फ्लैट की एक चाबी समिति के पास रहेगी। फ्लैट न तो बेचा जा सकेगा, नहीं किसी को किराए पर दिया जा सकेगा।
आलोचक इस योजना को व्यवसाय मान रहे हैं, धर्म की आड़ में धंधा। क्योंकि जिस गांव गढ़ा में फ्लैट बनाए जा रहे हैं वहां वैसे भी गैर हिंदू रहते ही नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नए हिंदू गांव का क्या औचित्य है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार उनके हिंदू गांव में सनातनी और वैदिक धर्म को मानने वाले हिंदू ही रह सकेंगे। गैर सनातनी मसलन सिख, जैन, बौद्ध, कबीरपंथी, राधा स्वामी, निरंकारी आदि धार्मिक समूहों को इस हिंदू गांव में स्थान मिलेगा स्पष्ट नहीं है





